वनाधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर वणी में धरना-प्रदर्शन

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📰 वनाधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर वणी में धरना-प्रदर्शन



मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और किसान सभा ने एसडीओ के माध्यम से जिलाधिकारी को सौंपे व्यक्तिगत आवेदन


वणी (जिला यवतमाल):
वनभूमि पर वर्षों से खेती कर रहे किसानों को वनाधिकार कानून के तहत जमीन का पट्टा दिलाने की मांग को लेकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले 25 फरवरी 2026 को वणी में एक दिवसीय धरना और प्रदर्शन किया गया।
आंदोलनकारियों ने उपविभागीय अधिकारी (एसडीओ) के माध्यम से जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए लंबित दावों की पुनः समीक्षा कर पात्र भूमिहीनों को जमीन के पट्टे प्रदान करने की मांग की।

📌 लंबित दावों पर कार्रवाई की मांग

पार्टी पदाधिकारियों ने बताया कि अतिक्रमण धारकों को वनाधिकार कानून के तहत अधिकार दिलाने के लिए पार्टी और किसान सभा लगातार संघर्ष कर रही है। पूर्व में कॉ. शंकरराव दानव के नेतृत्व में जिले के एक हजार से अधिक लोगों को पट्टे दिलाए गए थे।
हालांकि, अभी भी कई पात्र लाभार्थी पट्टों से वंचित हैं। 27 जनवरी को महाराष्ट्र सरकार द्वारा नाशिक से खर्डा तक निकाले गए ‘लॉन्ग मार्च’ के दौरान सरकार ने आश्वासन दिया था कि जिन लोगों के दावे लंबित हैं, उनकी पुनः जांच कर न्याय किया जाएगा।
आंदोलनकारियों ने मांग की कि जिन भूमिहीनों ने वनाधिकार के तहत दावे प्रस्तुत किए हैं, उनके आवेदनों की त्वरित छानबीन कर प्रक्रिया शुरू की जाए।

👥 बड़ी संख्या में किसानों की भागीदारी

धरना-प्रदर्शन में वणी और मारेगांव तहसील के वनभूमि पर खेती करने वाले पुरुष एवं महिला किसानों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। आंदोलन के दौरान जोरदार नारेबाजी कर अपनी मांगों को बुलंद किया गया।
इस आंदोलन का नेतृत्व माकपा के जिला सचिव कॉ. एड. कुमार मोहरमपुरी, किसान सभा के राज्य समिति सदस्य कॉ. एड. दिलीप परचाके और कॉ. गजानन ताकसांडे ने किया।
आंदोलन को सफल बनाने में किसान मोहुर्ले, कवडू चांदेकर, बादल कोडापे, संजय वालकोंडे, सुधाकर सोनटक्के, हरिश्चंद्र चिकराम, अरुण चिंचोलकर, शंकर गौतरे, वसंता नागोसे, रामभाऊ जिद्देवार, श्रीकांत तांबेकर, सुदर्शन टेकाम, नेताजी गेडाम, संभाजी टांगे, सुभाष नांदेकर, अर्जुन शेडमाके और अमोल चटप सहित कई कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।

⚖️ प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि वनाधिकार कानून के तहत पात्र किसानों को जल्द पट्टे नहीं दिए गए, तो आगे भी चरणबद्ध आंदोलन किए जाएंगे।
अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि लंबित दावों पर कब तक ठोस निर्णय लिया जाता है।

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