वणी कोल डेपो,औद्योगिक कंपनी पर सख्ती से कार्रवाई करने का निर्देश

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वणी कोल डेपो,औद्योगिक कंपनी पर सख्ती से कार्रवाई करने का निर्देश



उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सभा में प्रशासन अधिकारी को दी चेतावनी


घुग्घुस : पुरे विदर्भ मे ब्लैक डाइमंड के रूप में चर्चित चंद्रपुर जिला और वणी यवतमाल में अनेक बरसों से महाजेनको, एमएसएमसी और कोल वॉशरीज की मिलीभगत से शुद्ध कोयले(बड़ा कोयला) हेराफेरी और बड़े बड़े घोटाले का धंधा वैध/अवैध कोल डेपो के आड में खुब फलफूल रहा है। इसका सर्वाधिक लाभ महामाया,हिंद मिनरल्स,आरआईपीएल,एसीबी जैसी कंपनी और वैध अवैध कोल डेपो संचालक को करोड़ों से हो रहा है।

सीधे कोल डेपो से कोयले की मिलावटखोरी,कालाबाजारी और हेराफेरी में संचालक और कंपनी के अधिकारी में करोड़ों के लेन-देन हो रहे हैं।इस कालाबजारी में चंद्रपुर,यवतमाल से लेकर नागपुर और मुंबई राष्ट्र तक के बडे-बडे अधिकारियों,नेता तक में ही रही है।

बीते अनेक बरसों से वाशरी और कोल डेपो के आड मे कोयले की कालाबाजारी,मिलावटखोरी का यह खेल पैमाने पर चल रहा है। लेकिन बडे कोल स्मग्लिंग पर अंकुश लगाने में सक्षम शासन प्रशासन का कोई अधिकारी का कडा रुख नजर नहीं आया । बीतें कुछ वर्ष से वणी,चंद्रपुर वाशरी और वैध अवैध कोल डेपो में कोयला मिलावटखोरी के खेल बडे पैमाने पर रचा जा रहा है।

वाशरी से कोलवाश और कोल डेपो से ट्रान्सपोर्ट करने के बजय कोयले में रेत,सेल कोयला,चारपाईन,बैंड मटेरियल मिक्स करके रेल्वे साईडीग, ट्रक ट्रान्सपोर्ट के माध्यम से नागपुर महाऔष्णिक केन्द्र में बडे मात्र से भेजने का कार्य चल रहा है।

महाऔष्णिक केन्द्रीत कंपनियां वेकोलि के अलग अलग कोयला खदानों से लाखो टन शुद्ध कोयला(G-10) खरीदकर कोल बॉशरीज के लिए भेजती हैं।जिससे अच्छे गुणवत्ता मिले और बायलर में कोई खराबी न पहुंचे।

लेकिन कोयला स्मग्लिंग का असली खेल और मिलावटखोरी के पहेले सीढी कि सुरूवात यही से शुरू होती है।

कोल वाशरी में वेकोलि खदान से आए कोयले में से लगभग 70 % शुद्ध कोयला निकालकर हिंद मिनरल्स, आरआईपीएल, एसीबी, जैसी अन्य कंपनियों को यह कोयला ऊंचे दामों में बेचकर बेचा जा रहा है।बचे 30 % कोयले में चारकोल (बैड मटेरियल)काली मिट्टी की मिलावटखोरी करना और फिर यह मिलावटी कोयले को रोड ट्रान्सपोर्ट ,रेल ट्रान्सपोर्ट से महाऔष्णिक पावर केंद्रों में भेजना यह कोल वाशरीज और कोल डेपो का मुख्य उद्देश्य,काली कमाई का गोरखधंधा बन गया है।

इससे न तो केवल कोल वाशरीज के मालीक ही नही बल्कि कोल डेपो,इस्पात कंपनियों के मालिक और नेता मालामाल हो रहे हैं। लेकिन कोयले के बड़े बड़े घोटाले से सरकारी गैर-सरकारी बिजली केंद्रों मे अरबों की बायलर,महेंगे मशीनरीज खराब हो रही हैं। इससे से सरकारी तिजोरी को नुक्सान हो रहा है। साथ ही इसका खामियाजा बिजली के बढ़ते दाम के रूप में गरीब जनता को भी भुगतना पड़ रहा है।

लेकिन महाजेनको,एमएसएमसी और कोल यॉशरीज, नेताओं की साठगांठ से यह काला खेल चल रहा। कोयले की हेराफेरी का खेल हिंद,आरआईपीएल और एसीबी की भी मिलीभगत होने पर चंद्रपुर,घुग्घुस, बल्लारपुर,मुल,यवतमाल (वणी) से लेकर नागपुर, मुंबई तक करोड़ों के काले खेल मे लिप्त नेता,शासन प्रशासन भ्रष्ट अधिकारियों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है और न ही स्थानिक जनप्रतिनिधियों को कुछ असर हो रहा। वेकोलि से लेकर महाऔष्णिक केंद्र,तथा कोल वाशरी से फिर कोयला वापस महाऔष्णिक केंद्र तक पहुंचने तक कदम-कदम पर कोयले की सैम्पलिंग जांच की जाती है।

लेकिन इतना सबकुछ होने के बावजूद भी इतने बड़े पैमाने पर कोयले में हेराफेरी, मिलावटखोरी बगैर संबंधित विभागों की मिलीभगत के बगैर संभव नहीं हो सकता है।अनेक बरसों से इसी तरह की श्रेणीयों में श्रृंखला चली आ रही है। लेकिन सरकारी तिजोरी से इतना बडा करोड़ों का घोटाला होने के बावजुद फिर भी कोल वाशरीज से लेकर शासन प्रशासन गैर शासकीय अधिकारियों तक किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती।

महाराष्ट्र,छत्तीसगढ़,मध्यप्रदेश, उड़ीसा,आंध्र प्रदेश से लेकर गुजरात जैसे अनेक राज्यों के साथ कोयले का आदान प्रदान बड़े पैमाने पर होता है।इस बीच करोड़ों के घोटाले हो रहे हैं।साथ ही कोल डेपो और वाशरी से उडने वाला प्रदुषण शहर के वातावरण को बिगाड़कर रख दिया है।साथ ही वणी शहर के चिखलगांव,लालपुलिया परीसर में वाशरी और कोल डेपो से होनेवाले प्रदुषण से किसान के फसल साथ मानव जनजाति पर बुरा प्रभाव पड़ रहा। मनुष्य स्वास्थ्य पर गंभीर परिणाम होकर अलग-अलग बिमारी बढ रही है।वणी लालपुलिया यवतमाल महामार्ग पर कोल डेपो से उडने वाले प्रदुषण से दुर्घटना का प्रमाण बढ गया।

कोल डेपो में उड़ने वाले प्रदुषण से स्थानीय लोगों का जीना मुश्किल हो रहा। संबंध में स्थानीय लोगों ने शासन प्रशासन को कोल डेपो हटाने तथा प्रदुषण से मुक्त कराने के लिए निवेदन भी लिखा,लेकिन वणी शहर में लालपुलिया परीसर मे आज भी उसी तरह प्रदुषण कि काली लहर हवा में तरंगते हुए दिखाई देते हैं।

उक्त समास्या पर अंकुश लगाने में कोई शासन प्रशासन का सक्षम अधिकारी नजर दिखाई नहीं दे रहा है।हाल ही में वणी प्रचार सभा में पहुंचे महाराष्ट्र राज्य उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र प्रदुषण नियंत्रण विभाग तथा शासन प्रशासन के सभी अधिकारी,कर्मचारी को निर्देश देकर प्रदुषण करनेवाले औद्योगिक कंपनी तथा वैध अवैध कोल डेपो पर सख्ती से कार्रवाई करने के लिए आदेश दिए लेकिन सभा के खत्म होते ही कोल डेपो और कंपनीयों से उसी तरह काला धुल उड रहा है।रात कोल डेपो में पेलोडर मशीन से कोल मिक्स प्रकिया के कारण प्रदुषण फैल रहा।

बीते वर्ष में अनेक बार महाराष्ट्र प्रादेशि प्रदुषण नियंत्रण विभाग ,जिलाधिकारी यवतमाल, एसडीपीओ वणी, पुलिस थाना वणी, तहसीलदार वणी,अधिकारी में निवेदन दिया था। परंतु कार्रवाई कुछ नही हुई।

आज भी उसी तरह सभी शासकीय प्रशासकीय अधिकारी परीसर मे केवल फेरी लगा रहे।सांठगांठ के कारण कार्रवाई केवल दिखावे के लिए कागजों पर है।
आदेश देने के बाद भी महाराष्ट्र राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के दिए गए निर्देश का पालन नही हो रहा।

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