कोरपणा (ता. कोरपना) | विशेष जांच रिपोर्ट कोरपना तहसील में अवैध रेत तस्करी अब चोरी-छिपे नहीं, बल्कि प्रशासन की खुली छत्रछाया में चल रही है। पैनगंगा नदी पात्र और गाडेगांव–सोनुर्ली रेत घाट के बाद अब कडस्कर और गीडसावळे क्षेत्र के ट्रैक्टरों से रात के अंधेरे में धड़ल्ले से रेत तस्करी शुरू होने की पुख्ता जानकारी सामने आ रही है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, रात 12 बजे से सुबह 5 बजे तक आधा दर्जन से अधिक ट्रैक्टर बेखौफ होकर रेत की ढुलाई करते नजर आते हैं। न कोई डर, न कोई रोक—मानो कानून नाम की कोई चीज़ बची ही न हो।
🚨 कोरपना महसूल और पुलिस थाना के संरक्षण में तस्करी!
सबसे गंभीर आरोप यह है कि यह पूरा अवैध कारोबार कोरपना महसूल विभाग और कोरपना पुलिस थाना के संरक्षण में चल रहा है। यदि संरक्षण न होता, तो सवाल उठता है— हर रात वही ट्रैक्टर कैसे गुजरते हैं? रास्ते बंद क्यों नहीं किए जाते?
अब तक एक भी ट्रैक्टर जब्त क्यों नहीं हुआ?
➡️ यह स्थिति IPC धारा 379 (चोरी) ➡️ महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता 1966 ➡️ और IPC धारा 119 व 120B (लोकसेवक द्वारा अपराध में सहयोग व आपराधिक षड्यंत्र) को सीधे तौर पर आकर्षित करती है। 🌾 किसानों की जमीन और नदी दोनों लुट रही रेत तस्कर जेसीबी और ट्रैक्टरों के जरिए खेतों से होकर अवैध रास्ते बनाकर रेत निकाल रहे हैं। इससे: किसानों की फसलें तबाह हो रही हैं। जमीन की उर्वरता नष्ट हो रही है।
नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है
➡️ यह IPC धारा 447 (आपराधिक अतिक्रमण) ➡️ धारा 427 (संपत्ति को नुकसान) ➡️ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 ➡️ तथा NGT के आदेशों का खुला उल्लंघन है। ❓ सबसे बड़ा सवाल — संरक्षण किसका? क्या कडस्कर–गीडसावळे के ट्रैक्टर मालिकों को राजनीतिक आशीर्वाद प्राप्त है? क्या महसूल और पुलिस विभाग की चुप्पी हिस्सेदारी का संकेत है?
क्या किसी हादसे या जनआंदोलन के बाद ही कार्रवाई होगी?
स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो वे तहसील कार्यालय और पुलिस थाना का घेराव करने को मजबूर होंगे।
जनता की दो टूक मांग ✔️ कडस्कर–गीडसावळे के सभी ट्रैक्टरों की तत्काल जांच ✔️ रात्री गश्त बढ़ाकर अवैध रेत ढुलाई बंद की जाए ✔️ ट्रैक्टर, जेसीबी जब्त कर FIR दर्ज हो ✔️ दोषी महसूल व पुलिस अधिकारियों पर निलंबन ✔️ NGT व उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच
पैनगंगा को लूटने वालों के साथ-साथ उन्हें संरक्षण देने वालों को भी अब कानून के कटघरे में खड़ा करना ही होगा।