पैनगंगा नदी  घाट मे अंतरगांव रेत माफियाओं का नंगानाच !

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पैनगंगा नदी  घाट मे अंतरगांव रेत माफियाओं का नंगानाच !



कडस्कर–गीडसावळे बड़े रेत तश्कर नही मान रहे।


कोरपना महसूल व पुलिस संरक्षण में कानून का खुला खेल!


चंद्रपुर (ता. कोरपना) | विशेष जांच रिपोर्ट
कोरपना तहसील एवं पुलिस थाना क्षेत्र में अवैध रेत तस्करी अब चोरी-छिपे नहीं, बल्कि प्रशासन की खुली छत्रछाया में चल रही है। पैनगंगा नदी के सोनुर्ली घाट से पिछले कई महीनों से रात के अंधेरे में आधा दर्जन से अधिक ट्रैक्टरों द्वारा खुलेआम रेत तस्करी की जा रही है, जिससे जिला प्रशासन को लाखों रुपये के राजस्व नुकसान की जानकारी सामने आ रही है।

गड्ढे भरकर फिर शुरू हुआ अवैध कारोबार
कुछ माह पूर्व कोरपना महसूल विभाग द्वारा रेत तस्करी रोकने के लिए घाट के मुख्य मार्ग पर गड्ढे खोदकर रास्ता बंद किया गया था। लेकिन महज कुछ दिनों बाद ही मुजोर रेत तस्करों ने जेसीबी मशीन से गड्ढे भर दिए और पहले से भी तेज़ रफ्तार में तस्करी दोबारा शुरू कर दी।

शाम ढलते ही यह अवैध कारोबार शुरू होता है और रात 12 बजे से सुबह 4–5 बजे तक लगातार ट्रैक्टर-ट्रॉलियां रेत ढोती नजर आती हैं।
रेत के रेट अलग–अलग, मुनाफा बेहिसाब
रेत तस्कर सोनुर्ली गांव में ₹2500 से ₹3000 में रेत बेच रहे हैं, जबकि गांव से कुछ दूरी पर वही रेत ₹5000 से ₹6000 में बेची जा रही है।

इसी भारी मुनाफे के चलते तस्करों के हौसले बुलंद हैं और उन पर काबू पाना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।
दहशत का माहौल, गांव वाले डर के साए में
रेत तस्करों की दादागिरी और धमकियों के कारण स्थानीय ग्रामीण जानकारी देने से भी हिचकिचा रहे हैं।

स्थिति यह है कि मुजोर तस्करों ने खड़ी फसलों पर जेसीबी चलाकर रास्ते बनाए, ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दौड़ाईं और उपजाऊ खेतों को बंजर बना दिया।रात ट्रैक्टर के गड़गड़ाहट आवाज से किसान मजदूर कि नींद हराम हो गई।
कडस्कर–गीडसावळे नामक रेत तस्करों का दबदबा
सूत्रों के अनुसार अंतरगांव के नामी-गिरामी रेत तस्कर कडस्कर और गीडसावळे अपने आधे दर्जन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए सोनुर्ली घाट से रेत तस्करी कर लाखों रुपये कमा रहे हैं। घाट क्षेत्र में इनकी दहशत और धमकी का माहौल बना हुआ है।

🚨 महसूल–पुलिस संरक्षण का गंभीर आरोप
सबसे गंभीर आरोप यह है कि यह पूरा अवैध कारोबार कोरपना तहसील के महसूल विभाग और कुछ पुलिस अधिकारियों के संरक्षण में चल रहा है।
रात के अंधेरे में गांव, चौराहों और मुख्य मार्गों पर तस्करों के मुखबिर तैनात रहते हैं, जो अधिकारियों की आवाजाही की सूचना पहले ही दे देते हैं।

सवाल यह है कि—
प्रशासन को सब कुछ पता होने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?
रात में खड़े मुखबिरों पर अब तक सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
एक भी ट्रैक्टर या जेसीबी जब्त क्यों नहीं?

⚖️ लागू होती हैं ये कानूनी धाराएं
➡️ IPC धारा 379 – चोरी
➡️ IPC धारा 447 – आपराधिक अतिक्रमण
➡️ IPC धारा 427 – संपत्ति को नुकसान
➡️ IPC धारा 119 व 120B – लोकसेवक द्वारा अपराध में सहयोग व आपराधिक षड्यंत्र
➡️ महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता 1966
➡️ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986
➡️ NGT व सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन

❓ सबसे बड़ा सवाल – संरक्षण किसका?
क्या कडस्कर–गीडसावळे को राजनीतिक आशीर्वाद प्राप्त है?
क्या महसूल और पुलिस की चुप्पी हिस्सेदारी का संकेत है?
क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा?
जनता की दो टूक मांग
✔️ सोनुर्ली पैनगंगा घाट तत्काल सील किया जाए
✔️ कडस्कर–गीडसावळे के सभी ट्रैक्टरों की जांच
✔️ ट्रैक्टर व जेसीबी जब्त कर FIR दर्ज हो
✔️ दोषी महसूल व पुलिस अधिकारियों पर निलंबन
✔️ NGT व उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच
पैनगंगा को लूटने वाले तस्करों के साथ-साथ उन्हें संरक्षण देने वालों को भी अब कानून के कटघरे में खड़ा करना ही होगा।

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