घुग्घुस (चंद्रपुर) :
घुग्घुस–बेल्सणी–मुर्सा–म्हातारदेवी मुख्य मार्ग पर स्थित महामाया कोलवाशरी से उड़ रही कोयले की काली धूल ने किसानों की कमर तोड़ दी है। आरोप है कि वाशरी से रोज बड़े पैमाने पर उड़ने वाली कोयले की राख और धूल के कारण सैकड़ों हेक्टेयर में खड़ी फसल बर्बाद हो चुकी है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से वाशरी खुलेआम हवा में काला जहर घोल रही है। खेतों पर मोटी परत में जम रही कोयले की धूल ने फसलों की बढ़वार रोक दी है। पत्तियां काली पड़ रही हैं, उत्पादन घट रहा है और कई जगह पूरी फसल चौपट हो गई है।
“रोजी-रोटी पर सीधा वार”
किसानों का आरोप है कि यह केवल प्रदूषण नहीं, बल्कि उनकी रोजी-रोटी पर सीधा हमला है। किसानों को मुआवजा मिलता भी है तो वह न के बरोबर मिलता है। नागरिको का आरोप है कि ग्राम पंचायत के कुछ दलालों के माध्यम से वाशरी प्रबंधन पैसा देती हैं तो उसे भी हडप लिया जाता है।जिन खेतों से परिवार का पालन-पोषण होता था, आज वहीं बर्बादी का मंजर दिखाई दे रहा है। पशुओं के चारे पर भी काली धूल जम रही है, जिससे मवेशियों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों का दावा है कि वाशरी में पर्याप्त पानी की व्यवस्था नहीं होने से कोयले की धूल को नियंत्रित नहीं किया जाता। दिन में तो धूल उड़ती ही है, लेकिन रात के समय और अधिक मात्रा में खुलेआम फैलने की बात कही जा रही है।
बीमारियों की बढ़ती मार
ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में सांस संबंधी बीमारियां, खांसी, आंखों में जलन और त्वचा रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर ज्यादा देखा जा रहा है। लोग अलग-अलग बीमारियों से जूझ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग मौन हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
सबसे गंभीर आरोप यह है कि शासन-प्रशासन के कुछ अधिकारी और स्थानीय ग्रा पंचायत वाशरी को संरक्षण दे रहे हैं। यदि सैकड़ों हेक्टेयर फसल बर्बाद हो रही है तो अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जिलाधिकारी और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से अब तक कोई बड़ी कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द कठोर कदम नहीं उठाए गए तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों की मांग है कि:
वाशरी पर तत्काल पर्यावरणीय जांच हो
धूल नियंत्रण के लिए पर्याप्त पानी और आधुनिक उपकरण अनिवार्य किए जाएं।
किसानों को हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाए
प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
किसानों का साफ कहना है — उद्योग विकास के लिए हो सकता है, लेकिन यदि वह खेती, पर्यावरण और मानव जीवन को बर्बाद करे, तो ऐसे विकास पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब देखना यह है कि प्रशासन नींद से कब जागेगा और किसानों को न्याय कब मिलेगा।