घुग्घूस में ज़हरीला धुआं बना जानलेवा संकट

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घुग्घूस में ज़हरीला धुआं बना जानलेवा संकट



नगर परिषद ने गुप्ता पावर प्लांट को दी अंतिम चेतावनी।


“प्रदूषण नियंत्रण करो, नहीं तो उद्योग बंद करो!” – नगराध्यक्षा दिप्ती सोनटक्के की दो टूक चेतावनी


घुग्घूस (चंद्रपुर) : शहर से सटे उसगांव रोड पर स्थित विदर्भ मिनरल पॉवर प्लांट की चिमनियों से पिछले आठ दिनों से निकल रहे जहरीले धुएं ने घुग्घूस शहर की हवा को ज़हर में बदल दिया है। घने काले धुएं और राख के गुबार से नागरिकों को सांस, आंखों में जलन, त्वचा रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। शहर में आक्रोश की लहर है और लोग इसे सीधे-सीधे “मौत का धुआं” बता रहे हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए घुग्घूस नगर परिषद की नगराध्यक्षा दिप्ती सोनटक्के ने 9 फरवरी 2026 को पावर प्लांट प्रबंधन को आधिकारिक पत्र भेजकर प्रदूषण पर तत्काल नियंत्रण की मांग की थी। लेकिन कंपनी अधिकारियों द्वारा पत्र का कोई जवाब नहीं दिया गया। इस खुले अनदेखी रवैये से नगर परिषद और नागरिकों में और अधिक रोष फैल गया।

आखिरकार 14 फरवरी को नगराध्यक्षा दिप्ती सोनटक्के के नेतृत्व में उप-नगराध्यक्ष एवं सभापति राजुरेड्डी, बांधकाम सभापति रोशन पचारे, स्वच्छता व स्वास्थ्य सभापति नुरूल सिद्दीकी, महिला व बाल कल्याण उपसभापति श्रुतिका लड्डू चिलका, स्थायी समिति सदस्य सुरज कन्नूर सहित कई नगरसेवकों और कामगार नेताओं का प्रतिनिधिमंडल सीधे कंपनी पहुंचा और अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई।
कंपनी के अधिकारी आशिष नरड को प्रदूषण, किसानों की समस्याओं और स्थानीय युवाओं को रोजगार न देने जैसे मुद्दों पर जमकर घेरा गया।

प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर आठ दिनों के भीतर प्रदूषण पूरी तरह बंद नहीं किया गया, तो नगर परिषद आंदोलनात्मक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।

बैठक के दौरान कंपनी प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि:
आठ दिनों में प्रदूषण पूरी तरह नियंत्रित किया जाएगा।
स्थानीय किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाएगा।
कंपनी सुचारू रूप से शुरू होने के बाद स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता दी जाएगी।
नगराध्यक्षा दिप्ती सोनटक्के ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कंपनी ने अपने वादे पूरे नहीं किए, तो “कंपनी बंद कराने” तक की कार्रवाई की जाएगी।

अब सवाल यह है कि क्या पावर प्लांट प्रबंधन अपने वादों पर खरा उतरेगा, या फिर घुग्घूस की जनता को एक और बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहना पड़ेगा? फिलहाल शहर की निगाहें आने वाले आठ दिनों पर टिकी हैं।

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