कोलवाशरी से मिलावटी कोयले को रेल्वे साइडिंग भेजा जा रहा।
महाजैनको को करोड़ों का नुक़सान,बिजली महेंगी से जनता परेशान।
वणी की उकणी कोयला खदान में हाई-क्वालिटी कोयले की संगठित हेराफेरी का सनसनीखेज मामले का खुलासा
बिजली उत्पादन पर मंडरा सकता है संकट!
यवतमाल/वणी
वेकोलि भालर क्षेत्रीय महाप्रबंधक मे वणी नार्थ क्षेत्र की उकणी कोयला खदान में कोयला परिवहन के नाम पर बड़े पैमाने पर संगठित गड़बड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
सूत्रों के अनुसार, परिवहन संचालक कृष्णा इन्फ्रा ट्रान्सपोर्ट पर आरोप है कि खदान से निकाला गया उच्च गुणवत्ता वाला कोयला खुले बाजार में बेचा जा रहा था, जबकि उसकी जगह मिक्स कोल,घटिया दर्जे का कोयला और कोयला चुरी (बेड़ मटेरियल) रेल्वे सायडिंग पर भेजा जा रहा था।
यह पूरा खेल बेहद सुनियोजित तरीके से संचालित किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
🔎 कैसे चल रहा था कथित गोरखधंधा?
मिली जानकारी के मुताबिक, उकणी खदान से निकला उच्च दर्जे का कोयला सीधे अधिकृत रेलवे सायडिंग पर भेजने के बजाय वणी के लालपुलिया क्षेत्र स्थित एक निजी कोल डिपो में उतारा जा रहा था।
वहीं पर अच्छे कोयले को अलग कर ऊंचे दामों में वणी खुले बाजार में बेचने की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद ट्रकों में निम्न स्तर का कोयला और कोयला चुरी भरकर रेलवे सायडिंग पर भेजे जाने का पर्दाफाश हुआ।
सोमवार रात रेलवे सायडिंग प्रभारी अधिकारियों ने CG-11-BM-9033 और CG-11-BM-3214 नंबर के दो ट्रकों की जांच की। प्राथमिक जांच में पाया गया कि लोड किया गया कोयला निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप नहीं था। दोनों ट्रकों को तत्काल रोक दिया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वेकोली के अधिकारियों ने पुलिस से संपर्क किया। हालांकि देर रात तक औपचारिक अपराध दर्ज नहीं होने की खबर है, लेकिन वरिष्ठ अधिकारी थाने में डटे होने की जानकारी सामने आई है।
⚡ बिजली उत्पादन पर सीधा असर?
यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल राजस्व हानि का मामला नहीं, बल्कि राज्य की बिजली व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय है।
सूत्रों के मुताबिक, यदि निम्न गुणवत्ता का कोयला बिजली उत्पादन कंपनियों को सप्लाई किया गया, तो उत्पादन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विशेष रूप से महाराष्ट्र राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड (महाजेनको) जैसी संस्थाओं को घटिया कोयला मिलने से राज्य की बिजली आपूर्ति पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
यह सीधे तौर पर आम नागरिकों और उद्योगों पर असर डाल सकता है।
❓ निगरानी तंत्र पर सवाल
सूत्रों का दावा है कि यह कथित खेल कई महीनों से जारी था। यदि निष्पक्ष और गहन जांच हुई, तो करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का पर्दाफाश हो सकता है।
इस पूरे प्रकरण में संबंधित ट्रांसपोर्ट कंपनी के साथ-साथ खदान क्षेत्र के सब-एरिया मैनेजर,जीपीएस कंट्रोल अधिकारी और सुरक्षा अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल —
जब यह खेल महीनों से चल रहा था, तब निगरानी व्यवस्था क्या कर रही थी?
क्या यह महज लापरवाही थी या संगठित मिलीभगत?
🚨 उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो शासन को करोड़ों का नुकसान और बिजली उत्पादन पर संकट गहराने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब सबकी नजर प्रशासन और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी है।