चंद्रपुर:
चंद्रपुर जिले में प्रस्तावित लोहाडोंगरी लौहखनिज (आयरन ओर) खनन परियोजना को लेकर विधानसभा में बड़ा मुद्दा उठ गया है। विधायक किशोर जोरगेवार ने बजट सत्र के दौरान इस परियोजना को वन्यजीव और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताते हुए तत्काल रद्द करने की मांग की।
जोरगेवार ने सदन में कहा कि यह प्रस्तावित खनन परियोजना करीब 35 से 36 हेक्टेयर वन क्षेत्र में शुरू करने की योजना है, जिससे जंगल, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और स्थानीय नागरिकों के जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि ताडोबा और घोड़ाझरी के बीच का इलाका बाघों का बेहद महत्वपूर्ण कॉरिडोर माना जाता है। यदि इस संवेदनशील क्षेत्र में खनन गतिविधियों को अनुमति दी जाती है तो बाघों का प्राकृतिक आवास प्रभावित होगा और मानव-वन्यजीव संघर्ष और बढ़ने की आशंका है।
गौरतलब है कि चंद्रपुर जिला पहले ही बाघ-मानव संघर्ष की घटनाओं से जूझ रहा है, जहां पिछले कुछ वर्षों में 200 से अधिक लोगों की मौत इस संघर्ष में हो चुकी है।
विधायक जोरगेवार ने यह भी कहा कि इस परियोजना के विरोध में ईको प्रो संस्था के संस्थापक बंडू धोतरे कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं और उनके आंदोलन को स्थानीय नागरिकों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि आंदोलनकारियों, ईको प्रो के प्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित कर इस मुद्दे का समाधान निकाला जाए।
इस पूरे मामले पर जवाब देते हुए वन मंत्री गणेश नाईक ने सदन में स्पष्ट किया कि लोहाडोंगरी खनन परियोजना को अभी तक कोई अंतिम मंजूरी नहीं दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है और सरकार का इस परियोजना को मंजूरी देने का कोई इरादा नहीं है।
फिलहाल, पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण को लेकर उठी इस बहस ने लोहाडोंगरी खनन परियोजना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।