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” सोनू-दिपक ” की ‘तगड़ी सेटिंग’ से दिनदहाड़े रेत तस्करी

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” सोनू-दिपक ” की ‘तगड़ी सेटिंग’ से दिनदहाड़े रेत तस्करी

वढा घाट से टीपी का खेल, प्रशासन की बढ़ी बीपी

वर्धा नदी संगम तट पर सफेद रेत की खुली लूट,

किसानों की फसलें रौंदकर बनाए जा रहे रास्ते; ट्रैक्टर ट्रॉली से 4-5 हजार में हो रही अवैध बिक्री

घुग्घुस:
घुग्घुस पुलिस थाना क्षेत्र से कुछ किलोमीटर दूर वढा-पांढरकवडा वर्धा नदी संगम घाट इन दिनों रेत तस्करी का बड़ा अड्डा बनता जा रहा है। आरोप है कि सोनू और दिपक की तगड़ी सेटिंग के चलते यहां दिनदहाड़े खुलेआम रेत की लूट जारी है और संबंधित विभाग के नाक के नीचे अवैध उत्खनन धड़ल्ले से चल रहा है।
जानकारी के अनुसार सरकार की आवास योजना के तहत लाभार्थियों को 5 ब्रास रेत मुफ्त देने की व्यवस्था है, लेकिन कई जगह इसी योजना की टीपी (ट्रांजिट पास) का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर अवैध रेत निकाली जा रही है। एक ही टीपी पर कई-कई ट्रिप रेत निकालने के मामले सामने आ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि तहसील कार्यालय में काम का दबाव अधिक होने के कारण कई बार महसूल अधिकारी समय पर घाटों तक नहीं पहुंच पाते, जिसका सीधा फायदा रेत तस्कर उठा रहे हैं। इतना ही नहीं, टीपी की खरीद-फरोख्त और कालाबाजारी की भी चर्चा जोरों पर है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि महसूल और पुलिस संरक्षण में वढा घाट से सोनू और खारकर की रेत तस्करी का नेटवर्क घुग्घुस, शेनगांव, पांढरकवडा, उसगांव, धानोरा, पिपरी, सोनेगांव, महाकुर्लो सहित कई गांवों और शहर तक फैल चुका है। यहां प्रति ट्रैक्टर ट्रॉली 4 से 5 हजार रुपए में अवैध रेत की बिक्री खुलेआम की जा रही है।घुग्घुस से सोनु शेनगांव से दिपक कि रेत तश्करी खुलें आसमान मे दिनदहाड़े बेखौफ सुरु है।

रेत तस्करी से स्थानीय किसान भी भारी परेशानी में हैं। रात-दिन दौड़ते ट्रैक्टरों की कर्कश आवाज और खेतों के बीच से बनाए गए अवैध रास्तों के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं। आरोप है कि तस्करों ने खड़ी फसलों को रौंदकर मशीनों से रास्ते बना दिए, जिससे किसान सदमे में हैं।

पीड़ित किसानों और स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से वढा घाट पर चल रही रेत तस्करी पर बड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही तस्करी में पकड़े जाने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली और चालक-मालिकों पर सख्त और बाध्यकारी कार्रवाई करने की आवाज भी उठाई जा रही है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि वर्धा नदी के इस घाट पर दिनदहाड़े चल रही रेत की लूट पर आखिर प्रशासन कब लगाम लगाएगा? या फिर इसी तरह ‘सेटिंग’ के दम पर सफेद रेत की यह काली कमाई यूं ही जारी रहेगी।

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