सेटिंग से सत्ता तक : छोटा मारडा में रेत माफिया को किसका संरक्षण?

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🚨 एक्सपोज़े – PART 2



सेटिंग से सत्ता तक : छोटा मारडा में रेत माफिया को किसका संरक्षण?


वणी | PART-1 में हमने दिखाया कि छोटा मारडा  मे रात बेधड़क रेत तस्करी कैसे चल रही है। अब सवाल है — यह चल किसके दम पर रही है? प्रति ट्रैक्टर फिक्स वसूली, ऊपर तक बंटता पैसा बटता है,ग्रामीणों और सूत्रों का आरोप—
👉 हर ट्रैक्टर से महीना तय रकम किया जाता है।
👉 यह हिस्सा पुलिस और महसूल विभाग तक बटता है।
👉 नीचे से लेकर ऊपर में भी राजनीतिक छाया तक पहुचता है।

इसीलिए कारवाई मे-
❌ अधिकांश ट्रैक्टर जब्त नहीं होते
❌ कभी जेसीबी सील नहीं होती
❌ बड़े आकाओं के नाम कभी भी सामने नहीं आते है।

🏛️ यहां पर ग्राम पंचायत सरपंच से लेकर राजनीतिक आकाओं तक साया मिलता है।

रेत माफिया को—
🔴 गांव के सरपंच व पदाधिकारी का संरक्षण
🔴 कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं की खुली ढाल
🔴 प्रशासन पर सीधा दबाव ,इसी कारण से देरकर जैसे नाम बेखौफ होकर दादागिरी और मुजोरी से रेत तस्करी चला रहे हैं।

🚓 महसूल और पुलिस : लापरवाही या साझेदारी?
सवाल उठते हैं—
❓ जब घाट सक्रिय हैं, तो निरीक्षण रिपोर्ट कहां हैं?
❓ ट्रैक्टर नंबर, ड्राइवरों के नाम क्यों नहीं?
❓ अवैध रास्तों पर गड्डे खोलकर बुलडोजर क्यों नहीं चला?
क्या यह चुप्पी मिलीभगत का सबूत है? पुलिस पेट्रोलिंग में रात चौराहे मे खडे रहेने वाले मुखबिर तथा टैक्टर पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?

⚖️ ग्रामीणों का आर-पार का ऐलानढ
अब गांव का गुस्सा फूट रहा है।
मांगें साफ हैं—
🔥 मुखबिर द्वारा दिए जानेवाले नेटवर्क की जांच जरुरी 
🔥 पुलिस–महसूल अधिकारियों की संपत्ति जांच
🔥 राजनीतिक संरक्षण का पर्दाफाश
🔥 CBI  से मोबाइल कालिंग कि स्वतंत्र जांच 

⚠️ आखिरी चेतावनी ग्रामीणों का ऐलान—
“अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई,
तो छोटा मारडा सड़कों पर उतरेगा।
इसके परिणाम की जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।”

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