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वेकोलि अधिकारी की मिलीभगत से घोन्सा कोयला खदान में स्टीम कोयले की हेराफेरी ?

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वेकोलि अधिकारी की मिलीभगत से घोन्सा कोयला खदान में स्टीम कोयले की हेराफेरी ?



क्या ? इस ओर सीएमडी,ईडी,विजीलेंस,
ध्यान देंगे!


घुग्घुस –वणी शहर से लगभग 35 /40 किलोमीटर दूर पर वेकोलि वणी नार्थ भालर क्षेत्र के घोन्सा कोयला खदान में मिक्स कोल के नाम पर स्टीम कोयले का ज़बरदस्त कालाबाज़ारी का काला खेल रचा जा रहा है। खदान से हज़ारों-लाखों मीट्रिक टन कोयले की हेराफेरी पर अधिकारी को लाखों रुपए का चढ़ावा भेट दिया जा रहा है।
ट्रान्सपोर्ट के बीच चर्चा है कि खदान में क्षेत्रीय,उप-क्षेत्रीय प्रबंधक,तथा खान प्रबंधक तिगडे मिलकर चुपचाप कोयले के कालाबाज़ारी को खुलकर समर्थन कर रहे हैं।जिसका केंद्र बिंदु प्रबंधक, व्यवस्थापक कार्यलय मुख्य माना गया है।
सुञो के अनुसार
प्रबंधक व्यवस्थापक कार्यलय से सभी अधिकारियों के लिए लाखो कि लेन-देन लिफाफे से कि जाती है ।कभी गुर्गे के हाथ से बंद लिफाफे में आर्थिक लेन-देन का व्यवहार होता तो कभी डस्ट बीन में पैसे को छुपाकर फेक देते हैं। खदान में अलग-अलग जगह से अलग तरीके से बंद लिफाफे में आर्थिक व्यवहार लाखों में हो रहा है।
अवैध वसूली का सारा काला कारोबार प्रबंधक व्यवस्थापक कार्यलय के काउंटर में जमा होकर क्षेत्रीय, उप-क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय मे बंदरबाट होता है। अवैध वसूली का केंद्र बिंदु प्रबंधक व्यवस्थापक कार्यलय को को बताया गया है।
डीओ धारक से 25% प्रति टन साइनिंग अमाउंट लेकर हज़ारों-लाखों मीट्रिक टन कोयला दिया जाता है। साइनिंग अमाउंट देने पर डीओ को स्वीकृत किया जाता है। अन्यथा डीओ कैशल कर देते हैं।इन सभी मामलों में उप-क्षेत्र प्रबंधक, प्रबंधक व्यवस्थापक और खान प्रबंधक का मिला-जुला साथ होता है।
नियम अनुसार खदान में किसी अन्य अनधिकृत व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति नहीं है।ट्रांसपोर्टर का सुपरवाइजर ,चालक,मालक अपने मनमर्जी से कोयले का चयन करता है। निजी कंपनी के स्टीम कोयला (बडा माल) के लिए वोल्वो ट्रक चालक को भी प्रति ट्रक के हिसाब से कोयला उपलब्ध कराने‌ के लिए पैसे देते है। सुपरवाइजर ऐसा कोयला डीओ धारक को हमेशा उपलब्ध कराता है। खदान में अनधिकृत व्यक्तियों की भीड़ चौबीस घंटे लगी रहेती है।
दूसरी बात यह है कि जिन ड्राइवरों और सुपरवाइजरों को चेक पोस्ट के बाहर रहेंगे के लिए अस्पष्ट निर्देश दिए जाते है। वे लोग चेक पोस्ट में घुसकर टोकन बनवाने के लिए अंदर भीड़ लगा देते हैं।किसी तरह टोकन बनवा भी लेते हैं। ट्रकों के लिए टोकन बनाते समय टोकन तभी देना ज़रूरी होता है जब ट्रक चेक पोस्ट के पास हो। यह काम सभी चेक पोस्ट पर बिना सुनिश्चित किए चलता रहता है कि ट्रक कहाँ से है।
इसी तरह जहाँ वाहनों को सूर्योस्त से सूर्यादय तक खदान में प्रवेश की अनुमति है।वहीं सूत्रों से पता चल रहा है कि कोयला रोडसेल वाहन रात में खदान में अवैध रूप से पार्क किए जाते हैं जो ट्रक रद्द हो जाते हैं।
खदान में प्रबंधक व्यवस्थापक के मनमर्जी से गुंडागर्दी, तानाशाही, अवैध वसूली धड़ल्ले से सुरु है। जहां पुलिस और सुरक्षा यंञणा पर ढेर सारे सवाल खडे हो रहे हैं।
क्या ? नागपुर के कप्तान,ईडी, विजीलेंस,सीबीआई ,पुलिस प्रशासन खदान में होनेवाले हेराफेरी तथा अवैध वसूली करनेवाले अधिकारी पर कार्रवाई करेंगे।यह सवाल जनता और समाजिक कार्यकर्ता द्वारा उठाया जा रहा है।

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