घुग्घुस नगर परिषद में सत्ता पक्ष की ‘कलह’ उजागर

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घुग्घुस नगर परिषद में सत्ता पक्ष की ‘कलह’ उजागर



विकास की जगह कुर्सी–केबिन की लड़ाई, शहर ठहर गया?


सत्ता पक्ष आपसी झगड़े छोड़े, वरना विकास असंभव – भाजपा नगरसेवक विवेक बोढे का तीखा हमला


घुग्घुस, 07 फरवरी :
नगर परिषद चुनाव के करीब डेढ़ महीने बाद आयोजित पहली सामान्य सभा से शहर को विकास की उम्मीद थी, लेकिन यह सभा विकास की चर्चा के बजाय सत्ता पक्ष के अभूतपूर्व हंगामे और आपसी गुटबाजी के कारण सुर्खियों में रही। 06 फरवरी को हुई इस बैठक में सत्ता पक्ष की अंदरूनी कलह पूरी तरह सामने आ गई, जिससे अब आम नागरिक सवाल पूछ रहे हैं— “शहर का विकास होगा या सत्ता पक्ष की केबिन तय होगी?”

सभा की शुरुआत होते ही सत्ता पक्ष के भीतर ही टकराव देखने को मिला। नगराध्यक्ष और सभापति के बीच अधिकारों को लेकर चला आ रहा विवाद इतना उग्र हो गया कि सत्ता पक्ष के सदस्य ही एक-दूसरे के खिलाफ खड़े नजर आए। हालात ऐसे बने कि सत्ता पक्ष खुद ही विपक्ष की भूमिका निभाता दिखाई दिया। इस गहमागहमी में जनहित के मुद्दे पूरी तरह हाशिए पर चले गए और सभा की गरिमा तार-तार हो गई।

इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा नगरसेवक विवेक बोढे ने कड़े शब्दों में नाराज़गी जताई। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष को न अपने अधिकारों की समझ है और न ही अपनी जिम्मेदारियों का एहसास। शहर के विकास पर ठोस निर्णय लेने के बजाय सभापति केवल अपनी केबिन के लिए लड़ते नजर आ रहे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब तक सत्ता पक्ष अपने निजी झगड़े और गुटबाजी नहीं छोड़ेगा, तब तक घुग्घुस शहर का विकास केवल काग़ज़ों में ही सिमटा रहेगा।

जहां सत्ता पक्ष आपस में उलझा रहा, वहीं भाजपा ने शहर की बुनियादी जरूरतों को लेकर आक्रामक रुख अपनाया। विवेक बोढे और उनके साथियों ने सभा में 54 से 55 महत्वपूर्ण मुद्दे मजबूती से उठाए। इनमें शहर में 1,000 से अधिक स्ट्रीट लाइट्स लगाने, साथ ही हर वार्ड में 10 सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति जैसी अहम मांगें शामिल रहीं।

इस दौरान भाजपा गुटनेता मीना मोरपाका, नगरसेवक आशीष माशिरकर, स्वीकृत नगरसेवक निरीक्षण तांड्रा तथा नगरसेविकाएं वैशाली ढवस, चैताली सातपुते, मधु तिवारी और नगरसेवक गणेश पिंपळकर भी उपस्थित रहे और सत्ता पक्ष की भूमिका का खुलकर विरोध दर्ज कराया।

कुल मिलाकर, सत्ता पक्ष की आपसी खींचतान और कुर्सी की राजनीति के चलते घुग्घुस शहर के विकास कार्यों पर ब्रेक लगने की आशंका गहराती जा रही है। अब देखना यह है कि सत्ता पक्ष आत्ममंथन करता है या फिर शहर का विकास आपसी कलह की भेंट चढ़ता रहेगा।

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