नगराध्यक्ष और सीओ की निष्क्रियता से घुग्घुस में प्लास्टिक माफिया बेलगाम

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नगराध्यक्ष और सीओ की निष्क्रियता से घुग्घुस में प्लास्टिक माफिया बेलगाम



बैन प्लास्टिक का खुलेआम इस्तेमाल, नागरिकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ — प्रशासन बना मूकदर्शक!


घुग्घुस | प्रतिनिधि
घुग्घुस नगर परिषद की लापरवाही और निष्क्रियता अब खुलकर सामने आ चुकी है। शहर के मटन मार्केट, सब्जी मंडी और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर राज्य सरकार द्वारा प्रतिबंधित प्लास्टिक थैलियों का धड़ल्ले से उपयोग और खुलेआम बिक्री जारी है, लेकिन नगराध्यक्ष और मुख्याधिकारी (CO) इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह खामोश नजर आ रहे हैं।
जहां एक ओर महाराष्ट्र शासन ने प्लास्टिक पॉलिथीन पर सख्त प्रतिबंध लगाया है, वहीं दूसरी ओर घुग्घुस में प्लास्टिक माफियाओं को नगर परिषद ने मानो खुली छूट दे दी है। न कोई जांच, न कोई कार्रवाई और न ही किसी प्रकार का दंड — जिससे साफ जाहिर होता है कि प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ चुका है।

स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़

सबसे गंभीर बात यह है कि मटन, मछली और खाद्य सामग्री प्रतिबंधित प्लास्टिक थैलियों में बेची जा रही है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव पड़ने की पूरी संभावना है। जहरीले प्लास्टिक के संपर्क में आने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है, लेकिन नगर परिषद को न तो जनता की सेहत की चिंता है और न ही पर्यावरण की।

पशुधन भी खतरे में

सड़कों पर फेंके गए प्लास्टिक कचरे को आवारा पशु निगल रहे हैं, जिससे उनकी जान पर बन आई है। इसके बावजूद प्रशासन आंख मूंदकर बैठा है। ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है कि
👉 “नगर परिषद आखिर किसके संरक्षण में काम कर रही है?”

नागरिकों में आक्रोश

तेजी से बढ़ती जनसंख्या, गंदगी, प्लास्टिक कचरा, स्वास्थ्य समस्याएं और प्रशासन की उदासीनता — इन सबका खामियाजा आम नागरिक भुगत रहे हैं। नगर परिषद की यह बघिया भूमिका अब जनता को स्वीकार नहीं है।

नागरिकों की स्पष्ट और सख्त मांगें

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए मांग की है कि—
प्रतिबंधित प्लास्टिक थैलियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए।
नियमित जांच दल गठित किया जाए।
दोषी व्यापारियों पर भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई हो
शहर की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं

आंदोलन की चेतावनी

यदि नगर परिषद ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो नागरिक आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे, और इसकी पूरी जिम्मेदारी नगर परिषद प्रशासन, नगराध्यक्ष और मुख्याधिकारी पर ही होगी, ऐसा कड़ा इशारा नागरिकों ने दिया है।
अब देखना यह है कि घुग्घुस नगर परिषद जनता की सेहत और पर्यावरण को बचाने के लिए जागती है या फिर प्लास्टिक माफियाओं की मूक समर्थक बनी रहती है।

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