घुग्घुस नगर परिषद में समस्याओं का अंबार

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घुग्घुस नगर परिषद में समस्याओं का अंबार



नगर विकास ठप, नगराध्यक्ष व नगरसेवक स्वागत-समारोह और सैर-सपाटे में व्यस्त


घुग्घुस | प्रतिनिधि
घुग्घुस नगर परिषद में लंबे पांच वर्षों बाद नवगठित परिषद और नगराध्यक्ष का पद भले ही संपन्न हुआ हो, लेकिन शहर की तस्वीर आज भी बदहाल और विकास से कोसों दूर नजर आ रही है।

नगर परिषद के गठन को कई महीने बीत जाने के बावजूद नगराध्यक्ष और अधिकांश नगरसेवकों को शहर की मूलभूत समस्याओं से कोई सरोकार नहीं दिख रहा। शहर के विकास कार्यों में जुटने के बजाय जनप्रतिनिधि घूमने-फिरने, स्वागत समारोह, गुलदस्ते और सोशल मीडिया फोटो सेशन में ही व्यस्त दिखाई दे रहे हैं।

हालात यह हैं कि कई नगरसेवक महीनों बाद भी कार्यालय में सिर्फ एक-दो घंटे औपचारिक उपस्थिति दर्ज कर, समय बर्बाद कर लौट जाते हैं। दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर रोज़ाना अलग-अलग राजनीतिक हस्तियों, सामाजिक संगठनों और कथित नागरिक प्रतिनिधियों से मुलाकात की तस्वीरें डालकर खुशी से फूले नहीं समा रहे, मानो शहर की सारी समस्याएँ हल हो चुकी हों।

जबकि जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है।
शहर मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा
घुग्घुस शहर में आज भी,पेयजल संकट,शिक्षाव्यवस्था की बदहाली,बिजली आपूर्ति की अनियमितता,सफाई व स्वच्छता का अभाव,जर्जर सड़कें,प्रदूषण नियंत्रण की अनदेखी,आरओ मशीनों की समस्या, अवैध होर्डिंग बॅनर से शहर कि खुबसूरती खराब हो रही, बाजार मे टेंडर के नाम पर अवैध वसूली जोरो पर,शहर के बीच देशी शराब भट्टी से महीला,छाञ को परेशानी,बोरिंग व जलस्तर गिरावट,मेडिकल सुविधाओं की कमी,गुजरी बाजार व साप्ताहिक बाजार की अव्यवस्था,ट्रैफिक जाम, बेलगाम अतिक्रमण,खुला शौच,
जैसी गंभीर समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
इन तमाम मुद्दों पर नगर परिषद की चुप्पी और उदासीनता आम नागरिकों में भारी आक्रोश पैदा कर रही है।

विकास छोड़ कुर्सी की राजनीति हावी

शहर के विकास पर चर्चा करने के बजाय नगरसेवकों में अब भी आपसी मतभेद, गुटबाजी और कुर्सी की राजनीति हावी है। कोई किसी शहर में तो कोई किसी राज्य में अपने-अपने बड़े नेताओं से मुलाकात और जोड़-तोड़ में व्यस्त है।
लेकिन घुग्घुस के विकास को लेकर न कोई ठोस योजना, न बैठकें, न ही ज़मीनी कार्रवाई नजर आ रही है।

जनता पूछ रही है सवाल

अब शहर की जनता सवाल पूछ रही है —
👉 क्या नगर परिषद केवल स्वागत समारोह और फोटो खिंचवाने के लिए बनी है?
👉 क्या मूलभूत सुविधाओं के बिना ही शहर को “विकसित” माना जाएगा?
👉 आखिर कब जागेगा नगर प्रशासन और कब मिलेगी घुग्घुस को उसका हक

यदि यही रवैया जारी रहा तो आने वाले दिनों में जन आंदोलन और तीखे विरोध की आहट से इनकार नहीं किया जा सकता।

🔥 विस्फोटक हेडलाइन्स

घुग्घुस नगर परिषद बना फोटोशूट परिषद!
पांच साल बाद सत्ता मिली, पर विकास अब भी लापता नगराध्यक्ष–नगरसेवक सैर-सपाटे में व्यस्त,
घुग्घुस की जनता पानी–सफाई को तरसी
स्वागत समारोह, गुलदस्ते और सोशल मीडिया शो,
शहर की सड़कों पर गंदगी और गड्ढों का राज!
कुर्सी की राजनीति में उलझी नगर परिषद,
घुग्घुस का विकास बना मज़ाक
एक-दो घंटे कार्यालय, बाकी समय नेता-दर्शन!
नगर परिषद की कार्यशैली पर सवालों का सैलाब
पानी, बिजली, रोड, अस्पताल—सब भगवान भरोसे,
नगर परिषद सिर्फ़ पोस्ट और फोटो में व्यस्त
घुग्घुस में समस्याओं का अंबार,
नगर परिषद को जनता की पुकार सुनाई नहीं देती
पांच साल बाद बनी नगर परिषद,
दो-तीन महीने में भी नहीं दिखा एक भी ठोस विकास कार्य शहर डूबा गंदगी और ट्रैफिक में,नगरसेवक डूबे राजनीति और दौरे में,जनता परेशान, प्रशासन बेख़बर!
घुग्घुस नगर परिषद पर उठे बड़े सवाल

⚠️ अल्ट्रा-आक्रामक (सोशल मीडिया ट्रेंडिंग टाइप)

घुग्घुस नगर परिषद = फोटो, फूल और फुर्सत
विकास = जीरो
विकास छोड़ सत्ता-सुख में मग्न नगर परिषद,
घुग्घुस की हालत बद से बदतर,कुर्सी के लिए दौड़,
शहर के लिए कोई दौड़ नहीं! नगर परिषद या सेल्फी परिषद? जनता पूछ रही है तीखे सवाल
शहर जल रहा समस्याओं में, नगर परिषद ठंडी एसी मीटिंग में चल रही।

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