“ढोंगी बाबा अशोक खरात ” और उसके राजनीतिक संरक्षणकर्ताओं को सख्त सजा दो’ :- माकपा की मांग
नाशिक कांड पर भड़की CPI(M), SIT या न्यायालयीन जांच की मांग; दोषियों की संपत्ति जब्त करने की उठी आवाज
वणी/यवतमाल:
भारत का कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की यवतमाल जिला कमेटी ने कथित ढोंगी बाबा अशोक खरात के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उसे और उसके कथित राजनीतिक संरक्षणकर्ताओं को तुरंत गिरफ्तार कर सख्त सजा देने की मांग की है।
पार्टी द्वारा जारी प्रेस नोट में आरोप लगाया गया है कि अशोक खरात ने नाशिक में राज्यभर के हजारों लोगों के साथ आर्थिक, शारीरिक और मानसिक शोषण किया है। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए माकपा ने कहा कि यह कोई सामान्य धोखाधड़ी नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर संगठित अपराध है, जिसमें प्रभावशाली राजनीतिक और प्रशासनिक लोगों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता।
माकपा ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की जाए, जिसे SIT या न्यायालय की निगरानी में कराया जाए। साथ ही, आरोपी अशोक खरात से जुड़ी सभी संपत्तियों को सरकार तत्काल जब्त करे।
प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि अगर इस मामले में कोई भी राजनेता, अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति शामिल पाया जाता है, तो उनके नाम सार्वजनिक कर उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। पीड़ितों को त्वरित न्याय और आर्थिक मुआवजा देने के लिए विशेष तंत्र स्थापित करने की भी मांग की गई है।
माकपा ने राज्य में अंधश्रद्धा के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे अपराधों को रोकने के लिए अंधश्रद्धा निर्मूलन कानून का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। पार्टी ने साफ कहा कि “कोई भी कानून से ऊपर नहीं है”, चाहे वह कितना ही बड़ा नेता या अधिकारी क्यों न हो।
इस मामले में महिलाओं के शोषण के आरोपों को बेहद गंभीर बताते हुए माकपा ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई, तो पार्टी सड़कों पर उतरकर तीव्र जन आंदोलन छेड़ेगी।
प्रेस नोट में माकपा के जिला सचिव कॉ. एड. कुमार मोहरमपुरी, किसान सभा के राज्य कमेटी सदस्य कॉ. एड. दिलीप परचाके, जिलाध्यक्ष कॉ. चंद्रशेखर सिडाम, जिला सचिव कॉ. देविदास मोहकर सहित कई पदाधिकारियों ने हस्ताक्षर कर सभी प्रगतिशील, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक ताकतों से इस मुद्दे पर एकजुट होने का आह्वान किया है।
माकपा ने इसे केवल अपराध नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता बताते हुए अंधविश्वास और शोषण के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की जरूरत पर जोर दिया है।