यवतमाल :
मेंढोली से पिंपरी सड़क निर्माण की मांग को लेकर शुरू किया गया जंगल सत्याग्रह और अनशन आखिरकार तीसरे दिन समाप्त हो गया। यह अनशन जनहित से जुड़ा एक अहम मुद्दा बन गया था, जिस पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को ध्यान देना पड़ा।
बताया जा रहा है कि सामाजिक कार्यकर्ता मनोज काले द्वारा शुरू किया गया यह आंदोलन गांव के नागरिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण था। सड़क निर्माण की मांग को लेकर किए गए इस अनशन को शिवसेना (शिंदे गुट) के पदाधिकारियों का समर्थन मिला और उनके हस्तक्षेप से समाधान का रास्ता निकला।
यह पूरा घटनाक्रम राज्य के पालकमंत्री संजय राठोड के मार्गदर्शन में सुलझाया गया। उनके आश्वासन के बाद अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
इस दौरान शिवसेना उपजिला प्रमुख उमेश वैरागडे, दीपक कोकास, किरण नांदेकर, आशीष खुलसंगे, प्रसाद ठाकरे, राजू तुरणकर, अजिंक्य शेंडे, युवराज ठाकरे, शिवराज पेचे समेत कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
आंदोलन के दौरान तात्याजी पावडे ने प्रशासन से अपील की कि शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से चल रहे इस अनशन को गंभीरता से लिया जाए और मेंढोली–पिंपरी सड़क का काम जल्द से जल्द मंजूर किया जाए।
वहीं, शिवसेना के पश्चिम विदर्भ संपर्क प्रमुख पराग पिंगळे से फोन पर चर्चा के बाद यह आश्वासन दिया गया कि जल्द ही सड़क निर्माण के लिए निधि उपलब्ध कराई जाएगी और काम शुरू किया जाएगा।
इस आश्वासन के बाद अनशनकारियों ने गांववासियों से चर्चा कर अनशन समाप्त करने का फैसला लिया। पालकमंत्री के आश्वासन पर भरोसा जताते हुए आंदोलन वापस लिया गया।
इस दौरान जिला परिषद निर्माण विभाग के शाखा अभियंता बोरघाटे ने मौके पर ही सड़क निर्माण का अनुमान (एस्टिमेट) भी प्रस्तुत किया।
शिवसेना पदाधिकारियों ने भविष्य में भी गांव के अन्य विकास कार्यों को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया और अनशन समाप्त करने पर मनोज काले व ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया।
इस आंदोलन की सफलता के बाद यह संदेश गया है कि जनहित के मुद्दों पर एकजुट होकर लड़ाई लड़ी जाए तो समाधान संभव है।