चंद्रपुर की ‘वाघ्या हल्दी’ को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल, जीआई टैग के लिए प्रशासन करेगा प्रयास
हल्दी उत्पादक किसानों से जिलाधिकारी वसुमना पंत का संवाद, आधुनिक कृषि उपकरण उपलब्ध कराने का आश्वासन
चंद्रपुर, 6 जून। चंद्रपुर जिले की पारंपरिक और उच्च गुणवत्ता वाली ‘वाघ्या हल्दी’ को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाने के संकेत दिए हैं। खांबाडा (ता. वरोरा) स्थित लभान सराड फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा आयोजित हल्दी उत्पादक किसान संवाद मेले में जिलाधिकारी वसुमना पंत ने किसानों से सीधे संवाद करते हुए जिले की हल्दी को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया।
इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि चंद्रपुर की हल्दी में 7.5 से 8 प्रतिशत तक उच्च गुणवत्ता वाला कर्क्यूमिन (Curcumin) पाया जाता है, जो इसे अन्य क्षेत्रों की हल्दी से अलग और विशिष्ट बनाता है। उत्कृष्ट गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी संभावनाओं को देखते हुए चंद्रपुर की हल्दी को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) दिलाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया, दस्तावेजीकरण, अनुसंधान और नमूना संग्रहण की दिशा में प्रशासन सक्रिय रूप से कार्य करेगा।
उन्होंने बताया कि जिले की पारंपरिक हल्दी को “वाघ्या हल्दी” के नाम से राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान दिलाने के लिए प्रशासन, किसान उत्पादक कंपनियों और किसानों के संयुक्त प्रयास किए जाएंगे।
किसान संवाद कार्यक्रम में हल्दी की खेती, बुवाई प्रबंधन, उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण, विपणन तथा बिक्री से जुड़ी चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने किसानों की समस्याएं सुनते हुए उनके समाधान के लिए आवश्यक मार्गदर्शन भी प्रदान किया।
इस दौरान उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ना समय की आवश्यकता है और “स्थानीय वाघ्या हल्दी से वैश्विक बाजार तक” का लक्ष्य सामूहिक प्रयासों से अवश्य हासिल किया जा सकता है।
बोडखा और बारव्हा में कृषि गतिविधियों का भी किया निरीक्षण
कार्यक्रम के बाद जिलाधिकारी वसुमना पंत ने बोडखा तथा आदर्श ग्राम बारव्हा का दौरा कर कृषि एवं ग्रामीण विकास गतिविधियों का जायजा लिया। उन्होंने खेतों पर जाकर किसानों से प्रत्यक्ष संवाद किया और हल्दी की खेती एवं कटाई के लिए आवश्यक आधुनिक कृषि यंत्र एवं उपकरण किसान उत्पादक कंपनी को उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
उन्होंने लभान सराड किसान उत्पादक कंपनी के बायोचार यूनिट तथा वर्मी कम्पोस्ट (गांडूळ खाद) इकाई का निरीक्षण किया। वहीं आदर्श ग्राम बारव्हा में महिला स्वयं सहायता समूहों और किसानों से चर्चा कर कृषि प्रायोगिक गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम में जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी शंकर तोटावार, नाबार्ड के महाप्रबंधक तृणाल फुलझेले, तहसीलदार योगेश कौटकर, परियोजना निदेशक कुसळकर सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि, लभान सराड एफपीसी के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में हल्दी उत्पादक किसान उपस्थित रहे।