Home Breaking News वेकोलि पैनगंगा खदान में चक्काजाम आंदोलन बाद प्रशासन कि नींद उड़ी

वेकोलि पैनगंगा खदान में चक्काजाम आंदोलन बाद प्रशासन कि नींद उड़ी

50

वेकोलि पैनगंगा खदान में चक्काजाम आंदोलन बाद प्रशासन कि नींद उड़ी



तहसिलदार ने वेकोलि अधिकारी और प्रकल्पग्रस्तो कि समन्वय बैठक बुलाई।


घुग्घुस : वेकोलि वणी क्षेत्र के पैनगंगा कोयला खदान के लिए अधिग्रहित कि गई 743 हेक्टेयर जमीन में आठ परीवार से प्रकल्पग्रस्तो को वेकोलि प्रशासन के ओर से 12 वर्ष गुजरने के बाद भी अभी तक प्रकल्पग्रस्तो को कोई मुआवजा नही मिलने से पिडीत प्रकल्पग्रस्तो ने अपने परीवार सहीत पैनगंगा परीक्षेञ मे 15 जुन से आमरण अनशन पर बैठे इसके
उरांन्त बीते तीन दिनो में वेकोलि प्रशासन तथा शासश,प्रशासन ,महसूल अधिकारी कि ओर से अधिग्रहित कि गई भुमी पर कोई निष्नकर्ष नही मिलने से प्रकल्पग्रस्तो ने 18 सुबह 11बजे से वेकोलि पैनगंगा कोयला खदान परीक्षेञ में कोयला परीवहन रोककर चक्काजाम आंदोलन छेड़ दिया।
इस बीच खदान से तकरीबन पांच घंटे तक कोल डिसपॅच रुकनें से वेकोलि कंपनी,तथा प्रशासन को लाखों रु कि क्षति होने से सभी वेकोलि प्रशासन,शासकीय, प्रशासकीय अधिकारी एक्शन मोड में तुरंत आ गए।
खदान परीक्षेञ में चक्काजाम आंदोलन को पांच घंटे गुजरने बाद कोरपणा तहसीलदार पल्लवी आखरे ने प्रकल्पग्रस्त आंदोलन स्थल मे पहुंचकर पुरे मामले में शासकीय प्रशासकीय वेकोलि अधिकारी कि बैठक बुलाई और समझौते में प्रकल्पग्रस्तो को लिखीत आश्वासन देने पर चक्काजाम आंदोलन को कुछ दीन के लिए स्थगित कर दिय।
25 जुन को वेकोलि अधिकारी और प्रकल्पग्रस्तो बीच समस्या को लेकर कोरपणा तहसिल कार्यलय में तहसीलदार पल्लवी आखरे कि मध्यस्थता में बैठक बुलाई गई।उक्त समस्या को शासन प्रशासन में पहुंचाने कि जवाबदारी तहसीलदार पल्लवी आखरे ने लिया। परंतु भुमि अधिग्रहण बैठक में प्रकल्पग्रस्तो को कोई मुआवजा नहीं मिलने से इसके बाद उग्र आंदोलन छेड़ने कि चेतावनी प्रकल्पग्रस्तो ने वेकोलि प्रशासन, शासन प्रशासन को दिया है।
समन्वय बैठक में प्रकल्पग्रस्तो का कहना है कि सन 2013 में वेकोलि प्रशासन ने पैनगंगा कोयला खदान परीयोजना के लिए मौजा दानोदा त, कोरपणा जि,चंद्रपुर से आठ परीवार मे सर्वे नं 41,42 का कुल 743 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित किया।
 भुमी अधिग्रहण बिक्री करारनामा के समय वेकोलि प्रशासन ने किसानों से पडीत जमीन 6 लाख रु प्रति एकर गीली जमीन 8 लाख रु प्रति एकर के भाव से सौदा हुआ था। कुल राशि 1,95,2090 लाख होता है।यह भुगतान वेकोलि कंपनी ने प्रकल्पग्रस्तो को न देते हुए विश्वनाथ कर्णुजी सोनटक्के रा, साईबाबा वार्ड चंद्रपुर गैर प्रकल्पग्रस्त के 11014613386 मे चेक में  नं 205742 द्वारा जमा किया है।जो कि विश्वनाथ सोनटक्के वेकोलि कंपनी में बनावटी(झुठी) दस्तावेज जमा करवाकर प्रकल्पग्रस्त होने का दावा कोर्ट से कर रहा है। कोर्ट से अपना केस widral भी कर चुका है। वेकोलि के प्लानर आफीसर कुलकर्णी और केदार पर प्रकल्पग्रस्तो ने दगाबाजी करने का आरोप लगाया है।
मामले में बताया जा रहा है कि मौजा दानोदा त, कोरपणा जि, चंद्रपुर जमीन सर्वे नं 41 में वामन मालेकर, शांताराम खंडाळकर,प्रविण वडस्कर, शंकर सपाट तथा सर्वे नं 42 में इंदु सपाट, भालचंद्र डाहुले, सुभाष वांढरे, मधुकर वांढरे,कुल आठ लोगों ने पंजीकृत जमीन कि खरीदी दि,1 अक्टूबर 2009 को किया था।यह सभी जमीन का अधिग्रहण वेकोलि ने सन 2009 में कर लिया और प्रकल्पग्रस्तो से अधिग्रहित कि गई जमीन का लिखीत करारनामा दि,7 एप्रिल 2013 को हुआ। वेकोलि में जमीन अधिग्रहण होने की खबर जब विश्वनाथ सोनटक्के को पता चला तो उन्होंने वेकोलि कंपनी में झुठे दस्तावेज जमा करवाकर करोड रुपए हड़प करनें का इरादा बनाया और वेकोलि में दलाल बनकर सारे पैसे अपने बॅक खाता में जमा करवा लिया था।
वेकोलि कंपनी में जमीन अधिग्रहीत कि गई प्रकल्पग्रस्तो को 12/13 वर्ष गुजरने बाद भी भुमी मुआवजा तथा पैनगंगा परीयोजना में अभी तक नौकरी नही मिला। जिसके कारण प्रकल्पग्रस्त किसानों,परीवार पर भुखे मरने कि नौबत आ गई है। पैनगंगा कोयला खदान परीयोजना में अग्रीमेंट 7 एप्रिल 2013 को होकर 10 जुन 2009 को सेक्शन 4 लगा,5 जनवरी 2010 को सेक्शन 7 हुआ,29 अक्टूबर 2010 को सेक्शन 9 लगा था।वहीं 17 सप्तेबर 2011 को अंतिम में सेक्शन 11 लगाया था।
प्रकल्पग्रस्तो को 21 मार्च 2015 को नौकरी देने के लिए दस्तावेज के साथ आवेदन फार्म भराया। लेकिन अंतिम में 12/13 वर्ष गुजरने के बाद प्रकल्पग्रस्तो को कंपनी में न कोई नौकरी मिली और न कोई मुआवजा दिया है। जिसके कारण पिडीत प्रकल्पग्रस्तो ने 15 जुन से पैनगंगा कोयला खदान परीक्षेञ में वेकोलि कंपनी के खिलाफ आमरण अनशन पर बैठकर कोयला खदान परीक्षेञ में कोयला परीवहन रोककर चक्काजाम आंदोलन किया।
पाच घंटे बीतने के बाद आंदोलन को रोककर तहसीलदार ने वेकोलि अधिकारी और प्रकल्पग्रस्तो कि बैठक बुलाई। बैठक में प्रकल्पग्रस्तो ने कहा कि वेकोलि कंपनी द्वारा हमें न्याय दिया जाए अन्यथा  हमारी जमीन हमें वापस किया जाए। हम पर भुखे मरने कि नौबत आ गई है। हमारे साथ अन्याय हो रहा। बैठक में चेतन कुमार जैन अधिकारी, संजय जामगडे वेकोलि अधिकारी, शैलेश थोरात वेकोलि अधिकारी, सार्थक जैन वेकोलि अधिकारी, फाल्गुन गोहोकार मनसे नेता ,दशरथ पाटील शेतकरी संघटना,उमेश मालेकर,वामन मालेकर- रा,डोर्ली,कुरई वणी, शांताराम खंडाळकर- रा,मुगोलि साखरा वणी, शंकर सपाट-धोपटाला राजुरा चंद्रपुर, शिल्पा गौरकर,ढोके,इंदु सपाट,शिवाजी गौरकर -विरुर गाड़े गांव, सुभाष वांढरे रा,आर्वी राजुरा, मधुकर वांढरे -रा,आर्वी राजुरा, भालचंद्र डाहुले -पांढरपौणी राजुरा,प्रविण वडस्कर -अंतरगांव कोरपणा अदी से लोग बडी संख्या पर बैठक में शामिल हुए। बैठक बाद वेकोलि कंपनी तथा शासन प्रशासन में समस्या का समाधान न होने पर दुबारा वकोलि प्रशासन तथा शासन प्रशासन के खिलाफ तीव्र आंदोलन छेड़ने कि चेतावनी दी है।
 इस बीच प्रकल्पग्रस्तो पर किसी तरह कि मानहानी तथा जीवहानी होने पर उसके जिम्मेदार वेकोलि प्रशासन,शासन पर होने का दावा पिडीत प्रकल्पग्रस्तो ने किया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here