पेल्लोरा–छोटा मारडा में सरकारी नियमों की खुलेआम धज्जियाँ
गड्डे भरते ही फिर शुरू हुई रात-दिन रेत तस्करी
घुग्घुस | चंद्रपुर | विशेष रिपोर्ट
चंद्रपुर जिले की राजुरा तहसील और राजुरा पुलिस थाना क्षेत्र अंतर्गत पेल्लोरा–छोटा मारडा वर्धा नदी रेती घाट से सरकारी नियमों को ताक पर रखकर दिन-रात चमचमाती बारीक रेत की अवैध तस्करी धड़ल्ले से जारी है।
इस वर्ष के जनवरी महीने में राजुरा तहसील के राजस्व अधिकारियों ने दिखावटी कार्रवाई करते हुए नदी घाट परिसर के मुख्य मार्ग पर बीच सड़क गहरे गड्ढे खोदकर रेत परिवहन करने वाले ट्रैक्टरों को रोकने का प्रयास किया था।
लेकिन यह कार्रवाई महज़ कुछ दिनों की साबित हुई।
जेसीबी से गड्डे बुझाए, तस्करी फिर चालू हुई।
सूत्रों के अनुसार, रेत तस्करों ने जेसीबी मशीन की मदद से सरकारी गड्डों को भर दिया और कुछ ही दिनों में पेल्लोरा–छोटा मारडा वर्धा नदी घाट से अवैध रेत तस्करी दोबारा शुरू कर दी गई।
छोटा मारडा ग्रामीण क्षेत्र से रेत की तस्करी पूरी मुजोरी के साथ चल रही है।
प्रतिदिन 5 से 7 ट्रैक्टरों द्वारा दिन-रात रेत निकाली जा रही है, जिससे जिला प्रशासन को हर महीने लाखों रुपये के राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है।
“देरकर” की जागीर बना घाट?
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि पेल्लोरा–छोटा मारडा वर्धा नदी घाट पर ‘देरकर’ नामक व्यक्ति ने पिछले कई महीनों से अपनी दबंग जागीरदारी कायम कर रखी है।
अपने मनमर्जी से घाट संचालन करते हुए वह खुलेआम कहता फिरता है—
“झुकेगा नहीं साला!”
रात के अंधेरे में आधा दर्जन से अधिक ट्रैक्टरों से रेत तस्करी का बड़ा सिंडिकेट सक्रिय है, जिससे लाखों रुपये की अवैध कमाई की जा रही है।
पुलिस-राजस्व की चुप्पी, तस्करों के हौसले बुलंद
राजुरा पुलिस और राजस्व विभाग की रात में पेट्रोलिंग लगभग न के बराबर होने के कारण रेत तस्करों के हौसले और बुलंद हो गए हैं।
गांव मे यह भी चर्चा है कि कुछ राजस्व अधिकारी और पुलिस कर्मियों के संरक्षण में ही यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।
ग्रामीणों की नींद और बच्चों की पढ़ाई हुई प्रभावित
रात-रात भर ट्रैक्टरों की आवाज़ से ग्रामीणों, किसानों और परिवारों का सोना हराम हो गया है।स्कूल जाने वाले बच्चों और छात्र-छात्राओं की पढ़ाई-लिखाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से पेल्लोरा–छोटा मारडा वर्धा नदी रेती घाट पर तुरंत सख्त कार्रवाई करने,
दोषी तस्करों के साथ-साथ संरक्षण देने वाले अधिकारियों की भी जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
अब बड़ा सवाल यह है कि
क्या जिला प्रशासन इस खुलेआम चल रही रेत तस्करी पर लगाम लगाएगा, या फिर वर्धा नदी ऐसे ही लुटती रहेगी