घुग्घुस के सरकारी अस्पताल को कब मिलेगा इलाज का मुहूर्त?
5-6 साल से तैयार 30 बेड का अस्पताल बंद पड़ा; जिलाधिकारी वसुमना पंत ने अधिकारियों को 10 दिन का अल्टीमेटम, 1 अक्टूबर तक सेवा शुरू होने की उम्मीद
घुग्घुस : कोयला नगरी घुग्घुस की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर वर्षों से चली आ रही ‘तारीख पर तारीख’ की कहानी अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। शहर में करीब 30 बेड का शासकीय ग्रामीण अस्पताल तैयार है। इमारत का निर्माण, रंगरोगन और अन्य अधिकांश काम पूरे हो चुके हैं, लेकिन अस्पताल अब तक मरीजों के लिए नहीं खुल सका है।
बताया जा रहा है कि अस्पताल शुरू करने के लिए फायर एनओसी और इलेक्ट्रिकल ऑडिट जैसी आवश्यक प्रक्रियाएं लंबित हैं। इन औपचारिकताओं के चलते घुग्घुस और आसपास के नागरिकों को आज भी गंभीर उपचार के लिए चंद्रपुर का रुख करना पड़ता है।
जिलाधिकारी की सख्त एंट्री, अधिकारियों की ली खबर
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए चंद्रपुर की जिलाधिकारी वसुमना पंत ने शुक्रवार, 28 अगस्त को घुग्घुस के निर्माणाधीन शासकीय ग्रामीण अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग, नगर परिषद और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
निरीक्षण के दौरान अस्पताल का लगभग 95 प्रतिशत काम पूरा होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद जिलाधिकारी ने लंबित कार्यों और आवश्यक मंजूरियों को लेकर संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए अगले 10 दिनों में इलेक्ट्रिकल ऑडिट और फायर एनओसी की प्रक्रिया पूरी करने को कहा।
अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि वर्षों से अटके अस्पताल को कागजी प्रक्रिया से निकालकर वास्तव में मरीजों के लिए शुरू किया जाए।
इलाज के लिए 15-20 किलोमीटर का सफर क्यों?
घुग्घुस की आबादी और आसपास के क्षेत्रों की जरूरतों को देखते हुए सरकारी अस्पताल की लंबे समय से मांग रही है। वर्तमान स्थिति में गंभीर बीमारी, प्रसूति, शस्त्रक्रिया, एक्स-रे, स्कैन सहित अन्य उपचार के लिए मरीजों को चंद्रपुर जाना पड़ता है।
विशेष रूप से रात के समय गर्भवती महिलाओं को चंद्रपुर ले जाना, दुर्घटनाओं में घायल मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने की चुनौती और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर निजी अस्पतालों का खर्च—ये समस्याएं स्थानीय नागरिक लंबे समय से झेल रहे हैं।
नगर परिषद को पांच साल से ज्यादा, अस्पताल फिर भी अधूरा
घुग्घुस को नगर परिषद का दर्जा मिले पांच वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। शहर की आबादी और आसपास के औद्योगिक क्षेत्र को देखते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल लगातार उठते रहे हैं।
नागरिकों का कहना है कि जब अस्पताल की इमारत लगभग तैयार है, तो केवल कुछ तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण उसे वर्षों तक बंद रखना समझ से परे है।
1 अक्टूबर की डेडलाइन पर टिकी निगाहें
जिलाधिकारी के निर्देशों के बाद अब 1 अक्टूबर 2026 की संभावित समयसीमा को लेकर घुग्घुसवासियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। यदि फायर एनओसी, इलेक्ट्रिकल ऑडिट और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं समय पर पूरी होती हैं, तो अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं शुरू होने की संभावना है।
लेकिन अब नागरिकों का सवाल साफ है—
“घुग्घुसवासियों को अब निरीक्षण और आश्वासन नहीं, अस्पताल में डॉक्टर, नर्स, दवाइयां और प्रत्यक्ष उपचार सेवा चाहिए।”
1 अक्टूबर अब सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि वर्षों से इंतजार कर रहे घुग्घुसवासियों की उम्मीद और प्रशासन की कार्यक्षमता की परीक्षा बन गई है।










