राजूरा में जगह-जगह धड़ल्ले से जारी अवैध रेत उत्खनन, प्रशासन कठघरे में
राजूरा |
चंद्रपुर जिले की राजूरा तहसील एवं पुलिस थाना क्षेत्र में गौण खनिज, विशेषकर अवैध रेत और मिट्टी उत्खनन के मामलों में अचानक बेतहाशा बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। हालात ऐसे हैं कि रात-दिन नदी-नाले, जंगल-पहाड़ और सरकारी ज़मीनों से चोरी-छिपे रेत का उत्खनन खुलेआम धड़ल्ले से जारी है, लेकिन प्रशासन पर सब कुछ देखकर भी आंखें मूंदे रहने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का साफ कहना है कि बड़े राजनीतिक आकाओं के संरक्षण के बिना इतने बड़े पैमाने पर रेत तस्करी संभव ही नहीं है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से लंबे समय तक कोई ठोस और निर्णायक कार्रवाई नहीं की गई, जिससे प्रशासन की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है।
जनप्रतिनिधि के करीबी रिश्तेदार पर सीधे आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधि के करीबी रिश्तेदार का अवैध रेत कारोबार से सीधा संबंध है। इसी कारण कार्रवाई केवल दिखावटी और खानापूर्ति तक सीमित रखी जा रही है।
नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे पर कई बार ज्ञापन सौंपे, शिकायतें दर्ज कराईं और सोशल मीडिया के माध्यम से भी प्रशासन को खुली चेतावनी दी, लेकिन लंबे समय तक कार्रवाई के नाम पर सिर्फ ढेंगा दिखाया गया।
छोटे पकड़े जाते हैं, बड़ी मछली पर हाथ डालने से क्यों डर?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि राजूरा क्षेत्र में
➡️ छोटे मजदूर, वाहन चालक और सामान्य लोग ही कार्रवाई का शिकार बनते हैं,
➡️ जबकि पोकलेन मशीन, ट्रक और बड़े तस्कर हर बार बच निकलते हैं।
अब जबकि आरोप सीधे सत्ता पक्ष से जुड़े प्रतिनिधि के रिश्तेदार तक पहुंच रहे हैं, तो पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
नागरिकों का सवाल है—
क्या कानून सिर्फ कमजोरों के लिए है?
क्या बड़े नामों पर कार्रवाई करने में प्रशासन के हाथ कांपते हैं?
नोटिस जारी, लेकिन कार्रवाई नदारद
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लगातार दबाव और अनुरोध के बाद अंततः कोरपना तहसीलदार पल्लवी आखरे द्वारा संबंधित व्यक्ति को सरकारी नोटिस जारी किया गया है।
हालांकि अब तक किसी भी बड़े रेत तस्कर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि—
क्या यह नोटिस केवल औपचारिकता है?
क्या बड़े तस्करों पर भी बुलडोज़र और एफआईआर चलेगी?
या फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
प्रशासन की अग्निपरीक्षा
फिलहाल पूरे जिले की निगाहें राजूरा-कोरपना क्षेत्र में चल रही गौण खनिज तस्करी पर टिकी हुई हैं।
यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच कर बड़े दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रशासन की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवालिया निशान लगना तय है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
राजूरा और कोरपना क्षेत्र में अवैध रेत तस्करी पर वास्तविक कार्रवाई कब होगी?
और क्या प्रशासन वाकई कानून को सबके लिए समान रूप से लागू करेगा?
🧨 राजनितिक संरक्षण (Political Protection Exposé) 🧨
कहा जाता है की राजूरा तहसील और पुलिस थाना क्षेत्र में अवैध रेत और मिट्टी उत्खनन इस कदर बेलगाम हो चुका है कि नदी-नाले, जंगल-पहाड़ और सरकारी ज़मीनें दिन-दहाड़े लूटी जा रही हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब पुलिस और खनिज विभाग की नाक के नीचे हो रहा है, फिर भी कार्रवाई के नाम पर खामोशी और औपचारिकता देखने को मिल रही है।






