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वणी तंबाखू तस्करी मामला: आरोपी खुलेआम आज़ाद, पुलिस कार्रवाई शून्य!

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वणी तंबाखू तस्करी मामला: आरोपी खुलेआम आज़ाद, पुलिस कार्रवाई शून्य!



एसपी को ‘अंतिम स्मरणपत्र’, 7 दिन का अल्टीमेटम


26 जनवरी को तहसील कार्यालय के सामने ‘धरणा आंदोलन’ का ऐलान


वणी | यवतमाळ | विशेष रिपोर्ट
वणी शहर में सुगंधी तंबाखू तस्करी का मामला दर्ज हुए एक महीना बीत चुका है, लेकिन आज तक न तो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, न ही तस्करी में इस्तेमाल वाहन की जप्ती। यह स्थिति अब सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक संरक्षण की ओर इशारा कर रही है।

इस गंभीर मामले को लेकर युवासेना उपजिल्हा प्रमुख अजिंक्य सुभाष शेंडे ने पुलिस अधीक्षक, यवतमाल को “अंतिम स्मरणपत्र” सौंपते हुए प्रशासन को सीधा अल्टीमेटम दे दिया है।

एक महीना बीता… आरोपी अब भी आज़ाद!
दिनांक 08 दिसंबर 2025 से नामजद आरोपी आज भी खुलेआम समाज में घूम रहे हैं।
न कोई गिरफ्तारी,
न कोई दबिश,
न कोई ठोस कार्रवाई—

यह स्थिति पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
वाहन जप्ती पर भी लीपापोती तस्करी में प्रत्यक्ष रूप से उपयोग किया गया वाहन MH-24-BL-7051
आज तक जप्त नहीं किया गया है।

सवाल साफ है—
क्या कानून सिर्फ काग़ज़ों में चलता है?
या फिर तस्करों को किसी स्तर पर संरक्षण प्राप्त है?
जांच के नाम पर सिर्फ काग़ज़ी कार्रवाई
उपविभागीय पुलिस अधिकारी वणी की जांच रिपोर्ट में “तपास सुरू आहे” लिखा गया है,
लेकिन ज़मीनी हकीकत में—कोई गिरफ्तारी नहीं
कोई जप्ती नहीं कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं
यह स्थिति साफ दर्शाती है कि जांच को जानबूझकर धीमा किया जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
निवेदन में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि—
जांच में दिरंगाई करने वाले पुलिस अधिकारियों पर
कठोर विभागीय कार्रवाई की जाए
दोषी अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए
क्योंकि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि कर्तव्यहीनता का मामला बन चुका है।

7 दिन का अल्टीमेटम – वरना आंदोलन

प्रशासन को अंतिम अवसर देते हुए साफ चेतावनी दी गई है कि—अगर अगले 7 दिनों में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई।

वाहन जप्त नहीं किया गया

दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई
तो दिनांक 26 जनवरी 2026 | सुबह 10 बजे
वणी तहसील कार्यालय के सामने तीव्र ‘धरणा आंदोलन’ किया जाएगा।

प्रशासन जिम्मेदार होगा

निवेदन में स्पष्ट कहा गया है कि—
प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की पूरी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होगी।

अब सवाल सीधे सिस्टम से
क्या वणी में तस्करों को खुली छूट मिल चुकी है?
क्या कानून सिर्फ आम नागरिकों के लिए है?
क्या तंबाखू तस्करी के पीछे कोई मजबूत संरक्षण तंत्र काम कर रहा है?

अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ माना जाएगा कि सिस्टम खुद अपराधियों को ताकत दे रहा है।
अब नज़रें पुलिस अधीक्षक कार्यालय और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।

क्योंकि यह सिर्फ तंबाखू तस्करी का मामला नहीं,
यह कानून की साख और प्रशासन की विश्वसनीयता की परीक्षा बन चुका है।

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