साखरी कोयला खदान में स्थानीय ट्रक मालिकों का अनिश्चितकालीन आंदोलन
बाहरी वाहनों को काम देने का आरोप; डीओ होल्डरों और परिवहन व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
राजुरा, 8 अक्टूबर।
डब्ल्यूसीएल बल्लारपुर क्षेत्र की साखरी कोयला खदान में स्थानीय ट्रक चालक-मालकों ने विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया है। स्थानीय ट्रक मालिकों का आरोप है कि पिछले करीब चार से छह महीनों से बाहरी राज्यों के वाहनों और बड़े ट्रांसपोर्टरों को प्राथमिकता दिए जाने के कारण स्थानीय सिंगल ट्रक मालिकों का रोजगार प्रभावित हुआ है।
बजरंग ट्रक चालक-मालक वाहतूक वेलफेयर एसोसिएशन, राजुरा की ओर से पहले ही आंदोलन की चेतावनी दी गई थी। एसोसिएशन का कहना है कि वर्षों से स्थानीय ट्रक मालिक कोयला परिवहन का काम करते आ रहे हैं, लेकिन अब उन्हें काम से दूर किया जा रहा है। स्थानीय ट्रक मालिकों ने साखरी कोयला खदान परिसर में ट्रक रोककर अपना विरोध शुरू कर दिया है।
क्षेत्रीय अधिकारियों और डिस्पैच व्यवस्था पर आरोप
आंदोलन कर रहे ट्रक चालक-मालकों ने साखरी कोयला खदान के क्षेत्रीय एवं उपक्षेत्रीय प्रबंधन तथा डिस्पैच मैनेजर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
ट्रक मालिकों का आरोप है कि बड़े ट्रांसपोर्टरों को उनकी पसंद के अनुसार बड़े पैमाने पर काम दिया जा रहा है, जबकि स्थानीय सिंगल ट्रक मालिकों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं।
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया है कि साइनिंग अमाउंट और अन्य आर्थिक लेन-देन के चलते बड़े डीओ होल्डरों एवं ट्रांसपोर्टरों को फायदा पहुंच रहा है। हालांकि, इन गंभीर आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों, डीओ होल्डरों तथा ट्रांसपोर्टरों का पक्ष सामने आना बाकी है।
इन डीओ होल्डरों के नाम लेकर लगाए आरोप
स्थानीय ट्रक चालक-मालकों ने अपने आरोपों के संदर्भ में निर्मल ठाकुर, राजा बाबू, संतोष माहेश्वरी, तालीब सिद्दीकी, नुरानी ट्रांसपोर्ट, चंदन ठाकुर, मनीष राजनटी, ताहिर सिद्दीकी, सलीम शेख, नितेश नायडू, अमनदीप बसरा, वंदना ट्रांसपोर्ट, सतीश यादव, जग्गा अन्ना, सिनु राऊलवार, विकास कोल, मोहन रेड्डी, मुकेश भट्टल और मुन्ना जैन सहित कई डीओ होल्डरों एवं ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों के नाम सामने रखे हैं।
एसोसिएशन का आरोप है कि इन बड़े डीओ होल्डरों और ट्रांसपोर्टरों को स्थानीय सिंगल ट्रक मालिकों की तुलना में अधिक काम और परिवहन का अवसर मिल रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
छह महीने से स्थानीय ट्रक मालिक परेशान
आंदोलनकारियों का कहना है कि पिछले छह महीनों से सिंगल ट्रक मालिकों के सामने गंभीर आर्थिक संकट है। कई वाहन मालिकों के पास वाहन की किस्त, डीजल और रखरखाव का खर्च निकालने तक के पैसे नहीं हैं। कुछ वाहन फाइनेंसरों द्वारा जब्त किए जाने की स्थिति में पहुंच गए हैं, जबकि कई परिवारों के सामने घर का खर्च चलाने की समस्या खड़ी हो गई है।
ट्रक मालिकों का कहना है कि पिछले करीब छह वर्षों से चंद्रपुर के लिए लगभग 650 रुपये प्रति टन और वणी के लिए करीब 800 रुपये प्रति टन भाड़ा मिल रहा है। उनका दावा है कि डीजल, टायर, वाहन रखरखाव और सड़क पर होने वाले अन्य खर्च लगातार बढ़ने के बावजूद परिवहन भाड़े में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई है।
ट्रक मालिकों ने भाड़ा बढ़ाने की मांग को लेकर यूनियन पर लगाए जा रहे आरोपों को गलत बताया है और कहा है कि यूनियन को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है।
चार प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन
स्थानीय ट्रक चालक-मालकों की प्रमुख मांगों में स्थानीय वाहनों को कोयला परिवहन में प्राथमिकता देना, पुराने निर्धारित वाहन भाड़े के अनुसार भुगतान करना, एसोसिएशन के क्रमांक के अनुसार लोडिंग परमिट या स्लिप जारी करना तथा वाहन खाली होने के एक सप्ताह के भीतर भाड़े का भुगतान करना शामिल है।
इसके अलावा पुराने बकाया वाहन भाड़े का तत्काल भुगतान तथा बाहरी क्षेत्रों में होने वाले परिवहन में भी स्थानीय वाहनों को अवसर देने की मांग की गई है।
ट्रक रोककर आंदोलन, बड़ी संख्या में चालक-मालिक शामिल
मांगों को लेकर बिहारी यादव, कृष्णा कुंभाला, नंदन शर्मा, विक्की मांजरे, संतोष वर्मा, रामचंद्र निषाद, मंसूर सिद्दीकी, दीपक यादव, फुलचंद प्रजापति और विजय केशकर सहित अनेक ट्रक चालक-मालिक आंदोलन में शामिल हुए।
आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और गंभीर रूप दिया जाएगा।
स्थानीय ट्रक मालिकों के इस आंदोलन से साखरी क्षेत्र में कोयला परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति बन गई है। अब सभी की नजर डब्ल्यूसीएल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों की ओर से इस मामले में उठाए जाने वाले कदमों पर है।










