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वेकोलि वणी नॉर्थ में करोड़ों की कोयला हेराफेरी का आरोप

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वेकोलि वणी नॉर्थ में करोड़ों की कोयला हेराफेरी का आरोप



क्रश कोल की जगह बड़े माल की कथित हेराफेरी, निजी डिपो तक पहुंच रहा कोयला


वणी, प्रतिनिधि।
वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) की वणी नॉर्थ क्षेत्र की कोयला खदानों में बड़े पैमाने पर कथित कोयला हेराफेरी का मामला सामने आने से हड़कंप मचा हुआ है। स्थानीय लोगों और कुछ वेकोलि कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि खदान के कोल स्टॉक से रोजाना बड़े पैमाने पर कोयले की कथित हेराफेरी की जा रही है, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान होने की आशंका है।

आरोप है कि उकणी कोयला खदान से कोयला लोड कर सीधे वणी क्षेत्र के निजी कोयला डिपो तक पहुंचाया जा रहा है। यहां क्रश कोल की जगह बड़े माल की कथित हेराफेरी के साथ कोयले में चारफाइन और काले धूलयुक्त पदार्थ की मिलावट किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।

पावर प्लांट के डीओ में मिलावट का आरोप

स्थानीय शिकायतकर्ताओं के अनुसार, पावर प्लांट के डीओ के नाम पर कोयले में बड़ी मात्रा में काला धूलयुक्त पदार्थ मिलाकर उसे रेलवे साइडिंग तथा वाहनों के माध्यम से आगे भेजे जाने का कथित खेल चल रहा है। आरोप है कि कुछ जगहों पर करीब 70 प्रतिशत धूलयुक्त सामग्री और 30 प्रतिशत शुद्ध कोयला मिलाकर पावर प्लांट तक भेजे जाने की प्रक्रिया चल रही है।

यदि ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो इससे न केवल वेकोलि को आर्थिक नुकसान हो सकता है, बल्कि कोयले की गुणवत्ता और बिजली उत्पादन व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में खदान के क्षेत्रीय, उपक्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों तथा प्रबंधकीय व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि खदान के कोल स्टॉक, परिवहन और निजी डिपो तक पहुंचने वाले कोयले की निगरानी के बावजूद कथित हेराफेरी लगातार जारी है।

स्थानीय लोगों और वेकोलि के कुछ कर्मचारियों ने मामले की उच्चस्तरीय विजिलेंस जांच के साथ सीबीआई जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि खदान से निकलने वाले कोयले की मात्रा, स्टॉक रजिस्टर, डीओ, वजन पर्चियां, परिवहन रिकॉर्ड, रेलवे साइडिंग रिकॉर्ड और निजी डिपो में पहुंचने वाले कोयले का मिलान किया जाए, तो कथित गड़बड़ी की वास्तविकता सामने आ सकती है।

जांच से सामने आ सकता है पूरा नेटवर्क

शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि उकणी खदान सहित वणी नॉर्थ क्षेत्र के संबंधित कोल स्टॉक और निजी डिपो की जांच की जाए। साथ ही पिछले कुछ महीनों के कोयला स्टॉक, डिस्पैच, डीओ, ई-रसीद, वजन कांटा, वाहन नंबर, रेलवे रेक और डिपो रिकॉर्ड की जांच की जाए।

अब देखना होगा कि इन गंभीर आरोपों पर वेकोलि प्रबंधन और संबंधित जांच एजेंसियां क्या कार्रवाई करती हैं। मामले की निष्पक्ष जांच होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में कोयले की हेराफेरी और मिलावट का कोई संगठित खेल चल रहा है या नहीं।

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