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घुग्घुस-धानोरा मार्ग पर ओवरस्पीड कैप्सुल ट्रक का कहर

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घुग्घुस-धानोरा मार्ग पर ओवरस्पीड कैप्सुल ट्रक का कहर



कार को रौंदते हुए सलून और चाय टपरी तक घुसा बल्कर,एक की मौत, दो गंभीर



घुग्घुस | प्रतिनिधि
घुग्घुस में एक बार फिर तेज़ रफ्तार और बेलगाम भारी वाहनों ने एक निर्दोष की जान ले ली।
घुग्घुस पुलिस स्टेशन अंतर्गत धानोरा–गड़चांदूर–चंद्रपुर मार्ग पर स्थित धानोरा फाटा पर बुधवार दोपहर करीब 3:30 बजे हुई भीषण सड़क दुर्घटना ने यातायात व्यवस्था की पोल खोल दी है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार यह हादसा कोई “संयोग” नहीं, बल्कि ओवरस्पीडिंग, नियमों की खुलेआम अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही का सीधा नतीजा है।

कैसे हुआ हादसा?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक,
सीमेंट से भरा कैप्सुल (बल्कर) वाहन क्रमांक MP 11 ZD 0931 तेज रफ्तार में चल रहा था।
बल्कर ने पहले MH 34 BV 8861 क्रमांक की कार को पीछे से जोरदार टक्कर मारी और बिना रुके भागने की कोशिश की।भागते हुए यही बल्कर धानोरा फाटा पर सड़क किनारे खड़ी कार MH 34 AA 0051 से टकराया, जिसके बाद वाहन अनियंत्रित होकर एक सलून शॉप और बाजू में शुरू चाय टपरी को रौंदता हुआ जा घुसा।

एक की मौके पर मौत, दो ज़िंदगी-मौत से जूझ रहे
इस भयावह हादसे में सलून शॉप के मालिक शंकर जुनारकर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
वहीं चाय टपरी पर मौजूद दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
मृतक और घायल सभी घुग्घुस के ही निवासी बताए जा रहे हैं, जो रोज़ी-रोटी के लिए इसी मार्ग पर मेहनत-मज़दूरी करते थे।घटनास्थल पर आक्रोश
हादसे की खबर फैलते ही घुग्घुस और आसपास के इलाकों से सैकड़ों लोग धानोरा फाटा पर जमा हो गए।

स्थानीय नागरिकों का गुस्सा साफ झलक रहा था।
लोगों का कहना है—

इस मार्ग पर भारी वाहनों की रफ्तार बेकाबू है
ट्रैफिक नियम सिर्फ काग़ज़ों तक सीमित हैं
पुलिस और प्रशासन की निगरानी नाम मात्र की है
इसके बावजूद न स्पीड ब्रेकर, न सिग्नल, न सख्त चेकिंग—और न ही जिम्मेदारों पर कार्रवाई।

पुलिस की चुप्पी पर सवाल

मृतक का शव चंद्रपुर शवविच्छेदन केंद्र भेज दिया गया है।
दोनों घायलों को गंभीर हालत में चंद्रपुर रेफर किया गया है।

खबर लिखे जाने तक

पुलिस की ओर से न कोई ठोस कार्रवाई, न ही विस्तृत आधिकारिक बयान सामने आया था।
सवाल जो सिस्टम से पूछे जाने चाहिए
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं,
बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता का सबूत है।
कब तक ओवरस्पीडिंग यूँ ही जान लेती रहेगी?
धानोरा फाटा जैसे संवेदनशील स्थानों पर स्थायी ट्रैफिक नियंत्रण कब होगा?
भारी वाहनों पर GPS, स्पीड मॉनिटरिंग और सख्त प्रतिबंध कब लगाए जाएंगे?
या फिर प्रशासन अगली मौत का इंतज़ार कर रहा है?

घुग्घुस की जनता अब जवाब चाहती है—
खामोशी नहीं, कार्रवाई चाहिए।

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