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घुग्घुस में बहुमत होते हुए भी कांग्रेस ने उपाध्यक्ष पद क्यों छोड़ा?

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घुग्घुस में बहुमत होते हुए भी कांग्रेस ने उपाध्यक्ष पद क्यों छोड़ा?



अजीत पवार गुट को फायदा, कांग्रेस में बगावत के सुर


घुग्घुस
घुग्घुस नगरपरिषद में बहुमत पूरी तरह कांग्रेस के पक्ष में होने के बावजूद सत्ता की राजनीति ने अब नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
22 सदस्यीय नगरपरिषद में कांग्रेस ने 11 सीटें जीतकर और अध्यक्ष पद अपने नाम कर कुल 12 का आंकड़ा पार कर लिया—यानी स्पष्ट बहुमत, किसी गठबंधन की ज़रूरत ही नहीं।

लेकिन इसके बावजूद उपाध्यक्ष पद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) को देने की ज़िद ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को उजागर कर दिया है।
कांग्रेस कार्यालय में ही उठा विवाद
सोमवार दोपहर चंद्रपुर में कांग्रेस सांसद प्रतिभा धानोरकर के कार्यालय में हुई बैठक में हालात उस समय बिगड़ गए जब एनसीपी (अजीत पवार) के नगरसेवक रवीश सिंह को उपाध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव सामने रखा गया।

बैठक में मौजूद थे—

नगरपरिषद समूह नेता राजीव रेड्डी
रोशन पचारे
वैशाली चिकनकर
कई कांग्रेस पार्षद
तालुका अध्यक्ष अनिल नारूले
और चौंकाने वाली बात यह कि
एनसीपी (अजीत पवार) के नगरसेवक रवीश सिंह भी बैठक में मौजूद थे।

“बहुमत हमारा, फिर पद दूसरों को क्यों?

सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही रवीश सिंह के नाम पर सहमति बनाने की कोशिश हुई,
समूह नेता राजीव रेड्डी ने तीखा विरोध किया।
रेड्डी का साफ कहना था—
“जब कांग्रेस पूर्ण बहुमत में है, तो उपाध्यक्ष पद किसी दूसरी पार्टी को देना पार्टी के साथ विश्वासघात है।”
बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर नाराज़ होकर
राजीव रेड्डी बैठक छोड़कर बाहर निकल गए।
कांग्रेस के भीतर ही खींचतान
इसके बाद समीकरण बदलते गए—
पहले रोशन पचारे को उपाध्यक्ष बनाने का फैसला हुआ
बदले में राजीव रेड्डी को निर्माण कार्य (बांधकाम) विभाग देने की बात तय हुई
लेकिन रोशन पचारे ने उपाध्यक्ष पद लेने से इनकार कर निर्माण विभाग की मांग रख दी
यहीं से मामला और उलझ गया।
कुछ देर बाद फिर से
एनसीपी (अजीत पवार) के रवीश सिंह को उपाध्यक्ष बनाने का मुद्दा उठाया गया,
जिससे कांग्रेस के भीतर आपसी मतभेद खुलकर सामने आ गए।
सवाल जो अब जनता पूछ रही है
जब कांग्रेस के पास पूरा बहुमत है, तो अजीत पवार गुट को उपाध्यक्ष पद क्यों?
क्या यह फैसला स्थानीय नेताओं पर थोप दिया गया?
क्या कांग्रेस के भीतर कोई “बड़ा नेता” पर्दे के पीछे से सत्ता संतुलन साध रहा है?
और सबसे अहम—क्या घुग्घुस में कांग्रेस की सत्ता कमजोर करने की कोशिश हो रही है?
खामोशी भी बहुत कुछ कहती है
इस पूरे घटनाक्रम पर
राजीव रेड्डी ने कोई भी सार्वजनिक बयान देने से इनकार कर दिया है,
लेकिन उनकी नाराज़गी पार्टी के भीतर चल रही खींचतान की गवाही दे रही है।

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