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घुग्घुस गैस चैंबर बना!

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घुग्घुस गैस चैंबर बना!



24 घंटे का वादा निकला खोखला – 72 घंटे बाद भी धुआं उगल रहा विदर्भ मिनरल एंड एनर्जी का पावर प्लांट


संवाददाता | घुग्घुस (चंद्रपुर), :
घुग्घुस की हवा में जहर घुल चुका है। शहर और आसपास के गांवों में रहने वाले हजारों लोग आज खुली आंखों से अपना भविष्य धुंधला होते देख रहे हैं। आरोप सीधे तौर पर विदर्भ मिनरल एंड एनर्जी प्रा. लिमिटेड के पावर प्लांट पर है, जो दिन-रात धुआं, राख और जहरीली गैसें उगल रहा है।
10 फरवरी को कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी ने 24 घंटे के भीतर प्रदूषण नियंत्रित करने का आश्वासन दिया था। लेकिन 72 घंटे गुजर जाने के बाद भी न धुआं रुका, न राख कम हुई और न ही लोगों की परेशानी घटी। सवाल उठता है — क्या यह आश्वासन सिर्फ जनता को शांत करने का हथकंडा था?
हवा में जहर, घरों में बीमारी
हवा में घुले सूक्ष्म कण (PM 2.5), सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे जहरीले तत्व सीधे लोगों की सांसों पर हमला कर रहे हैं।

बच्चों को सांस लेने में दिक्कत।
बुजुर्गों में अस्थमा और हृदय रोग की शिकायत।
महिलाओं में आंखों में जलन और त्वचा एलर्जी।
घर-घर में खांसी और बेचैनी।
घरों की छतों, आंगनों और पानी के टैंकों पर जमी। राख इस बात की गवाही दे रही है कि प्रदूषण अब अदृश्य खतरा नहीं, बल्कि खुला हमला बन चुका है।
खेत, पानी और भविष्य भी खतरे में।
प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश और रासायनिक कचरा जमीन और जलस्रोतों को भी प्रभावित कर रहा है। किसानों का आरोप है कि फसलों की उत्पादकता घट रही है। पीने के पानी की गुणवत्ता बिगड़ रही है। यानी यह संकट केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व पर भी सवाल खड़ा कर रहा है।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

जब चिमनियों से निकलता धुआं साफ दिखाई दे रहा है, जब वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, तब भी यदि प्रशासन खामोश है तो यह खामोशी संदेह पैदा करती है। क्या मुनाफे के आगे नागरिकों की जान की कोई कीमत नहीं?

जनता की चेतावनी
नागरिकों की मांग साफ है:
प्रदूषण फैलाने वाले संयंत्रों पर तुरंत सख्त कार्रवाई।
रियल-टाइम उत्सर्जन मॉनिटरिंग अनिवार्य।
प्रदूषण मानकों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना
CSR फंड से मल्टी-स्पेशलिस्ट अस्पताल की स्थापना।
अत्यधिक प्रदूषणकारी इकाइयों को अस्थायी रूप से बंद किया जाए।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो घुग्घुस की जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।
यह सिर्फ प्रदूषण का मुद्दा नहीं है — यह जीवन और मौत के बीच की लड़ाई है। विकास के नाम पर यदि शहर को बीमार किया जा रहा है, तो यह विकास नहीं विनाश है।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी जागते हैं या घुग्घुस की हवा यूं ही जहर उगलती रहेगी।

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