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प्रदूषण पर सियासत तेज: अधिकारियों पर केस दर्ज करने की मांग

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प्रदूषण पर सियासत तेज: अधिकारियों पर केस दर्ज करने की मांग



“मुंगंटीवार की शिकायत से हड़कंप,


प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निशाने पर अधिकारी”


चंद्रपुर,
चंद्रपुर जिले में प्रदूषण का मुद्दा अब गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का रूप लेता जा रहा है। बल्लारपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक Sudhir Mungantiwar सहित भाजपा पदाधिकारियों ने रामनगर पोलीस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराते हुए महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) के क्षेत्रीय अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, बेलसानी क्षेत्र में स्थित महामाया इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा वर्ष 2024 से संचालित कोयला धुलाई परियोजना से बड़े पैमाने पर प्रदूषण फैल रहा है। इस प्रदूषण के कारण किसानों की कपास, सोयाबीन समेत अन्य फसलें बर्बाद हो रही हैं, वहीं पशुधन की मौत और स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने के आरोप भी लगाए गए हैं।
बताया गया है कि सरकार द्वारा गठित जांच समिति ने मौके का निरीक्षण कर कुल 68 लाख 61 हजार 864 रुपये का मुआवजा निर्धारित किया था और संबंधित कंपनी से यह राशि वसूलकर प्रभावित किसानों को देने के निर्देश भी दिए गए थे। लेकिन अब तक यह वसूली नहीं हो सकी है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी MPCB के क्षेत्रीय अधिकारियों पर थी, लेकिन बार-बार पत्राचार के बावजूद उन्होंने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। आरोप यह भी है कि अधिकारियों की निष्क्रियता के चलते प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग के खिलाफ न तो दंडात्मक कार्रवाई हुई और न ही कानूनी कदम उठाए गए।
शिकायत में जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974, वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के प्रावधानों के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है। साथ ही भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की मांग भी की गई है।
इस पूरे मामले में यह भी कहा गया है कि अधिकारियों की लापरवाही ने नागरिकों के जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन किया है और पर्यावरण संरक्षण जैसे संवैधानिक दायित्वों को भी कमजोर किया है।
विधायक मुंगंटीवार और भाजपा पदाधिकारियों ने मांग की है कि इस मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, प्रदूषण फैलाने वाली कंपनी के खिलाफ भी अलग से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
इस शिकायत के बाद जिले में प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और अब सभी की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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