रविवार को भी नहीं थमी रेत माफिया की लूट! प्रशासन के आंख के सामने चल रहा खुला खेल!
पैनगंगा नदी का सीना चीरकर मशीनों से अवैध खनन, बहाव मोड़ने की साजिश
कोरपना |
कोरपना तहसील में पैनगंगा नदी के पात्र में रेत माफियाओं का कहर अब खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि रविवार जैसे अवकाश के दिन भी राजस्व अधिकारियों की आंखों के सामने पोकलैंड मशीनों से दिनदहाड़े ट्रैक्टरों में रेत भरकर अवैध परिवहन किया जा रहा है।
मौके पर देखे गए हालात के अनुसार, नदी घाट के कई हिस्सों में और यहां तक कि नदी के बीचों-बीच बहाव क्षेत्र से भी मशीनों के जरिए गहरी खुदाई की जा रही है। घाट परीसर मे जगह जगह पोकलैंड मशीन से रेत खोदकर बडा भंडारण किया जा रहा है। सीसीटीवी और निर्धारित समय का भी अंदाजा नही नही दिख रहा।इतना ही नहीं, पोकलैंड मशीनों की मदद से नदी के प्राकृतिक जल प्रवाह को मोड़ने की कोशिश भी की जा रही है, जो आने वाले समय में बड़े पर्यावरणीय संकट का कारण बन सकता है।
पर्यावरण और जीवन पर बड़ा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह का अंधाधुंध खनन न केवल नदी के अस्तित्व के लिए खतरा है, बल्कि इससे जलस्रोतों का संतुलन बिगड़ने, भूजल स्तर गिरने और मानव व वन्यजीवों के जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब यह पूरा अवैध खेल खुलेआम चल रहा है, तो राजस्व और पुलिस प्रशासन आखिर मौन क्यों है? स्थानीय नागरिकों में चर्चा है कि कहीं न कहीं इस पूरे मामले में प्रशासन की मूक सहमति या लापरवाही साफ नजर आ रही है, जिससे रेत माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
नए अधिकारियों से सख्त कार्रवाई की उम्मीद
अब जिले के नवनियुक्त जिलाधिकारी Vasumana Pant और पुलिस अधीक्षक Ayush Nopani से स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कारवाई घाट पर हो रही इस अवैध रेत तस्करी पर तुरंत लगाम लगाने की मांग की है।
नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो पैनगंगा नदी का प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह बिगड़ जाएगा और इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।
अब देखना यह होगा कि नए प्रशासनिक अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर कितनी सख्ती दिखाते हैं, या फिर रेत माफियाओं का यह खेल यूं ही जारी रहेगा।