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लॉयड्स मेटल्स के खिलाफ किसानों का गुस्सा फूटा!

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लॉयड्स मेटल्स के खिलाफ किसानों का गुस्सा फूटा!



जहर’ बनकर खेतों में पहुंच रहा काला पानी? किसानों ने MPCB कार्यालय में ही उड़ेल दिया प्रदूषित पानी


घुग्घुस/उसगांव, प्रतिनिधि : चंद्रपुर जिले के घुग्घुस क्षेत्र में लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड के खिलाफ किसानों का आक्रोश अब खुलकर सामने आया है। उसगांव के किसानों ने कंपनी पर नालों में कथित रूप से रासायनिक एवं प्रदूषित पानी छोड़ने का आरोप लगाते हुए तीव्र आंदोलन किया।

किसानों का आरोप है कि इस कथित प्रदूषित पानी के कारण उनकी कृषि भूमि प्रभावित हो रही है और खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। बार-बार शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने से किसानों का गुस्सा बढ़ता गया।

MPCB कार्यालय पहुंचे किसान, जवाब नहीं मिला तो फूटा आक्रोश

प्रदूषण की स्थिति और अपनी शिकायत पर कार्रवाई की जानकारी लेने के लिए किसान क्षेत्रीय महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) के कार्यालय पहुंचे। किसानों का कहना है कि वहां उन्हें कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट और ठोस आश्वासन नहीं मिला।

इसके बाद किसानों ने विरोध का अनोखा और तीखा तरीका अपनाया। वे अपने साथ कंटेनर में कथित रूप से खेतों से संबंधित काला और प्रदूषित पानी लेकर पहुंचे और इसे अधिकारियों के कार्यालय परिसर में उड़ेलकर अपना विरोध दर्ज कराया।

‘खेत बचाओ, किसान बचाओ’ की मांग

किसानों का कहना है कि यदि खेतों में प्रदूषित पानी पहुंचता रहा तो खेती और फसलों का भारी नुकसान होगा। इससे किसानों की आय और परिवार की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ेगा।

किसानों ने मांग की है कि मामले की तत्काल और निष्पक्ष जांच की जाए, प्रदूषण फैलाने के लिए जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो तथा प्रभावित किसानों को कृषि नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए।

‘अब सिर्फ आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए!’

किसानों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रदूषण नियंत्रण मंडल और स्थानीय प्रशासन की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण अब किसानों ने अपना आंदोलन और तेज करने का संकेत दिया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर किसानों के खेतों में पहुंच रहा पानी वास्तव में प्रदूषित है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? और यदि आरोप गलत हैं, तो संबंधित विभाग इसकी वैज्ञानिक जांच कर सच्चाई जनता के सामने कब रखेगा?

किसानों ने प्रशासन से स्पष्ट मांग की है

प्रदूषण की जांच करो, दोषियों पर कार्रवाई करो और किसानों का नुकसान भरपाई से पूरा करो।

अब मामला सिर्फ खेत और फसल का नहीं, बल्कि किसान की जमीन, उसकी मेहनत और उसके भविष्य का सवाल बन चुका है।

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