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घुग्घुस अवैध शराब,गांजा,एमडी तश्करी का अड्डा बन रहा।

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घुग्घुस अवैध शराब,गांजा,एमडी तश्करी का अड्डा बन रहा।



पुलिस और आबकारी विभाग में मौन


घुघ्घुस : शहर में लगातार अवैध शराब के धंदो का जाल इस कदर फैल चुका है कि यहा पर गांजा,माजा ,एमडी अवैध शराब सुरु होने से शहर के हर कोने में स्कुलि युवक ,बुजुर्ग,महीला,और उद्योग क्षेत्र में मजदुरो का इलाका नशेडीयो का अड्डा बनता जा रहा है। शहर के क्षेत्र और ग्रामीण में सभी जगह पर 25 से 30 स्थानों पर खुलेआम अवैध शराब की बिक्री हो रही है।
यह शराब शालीकराम नगर,तहसिल कार्यलय आंबेडकर पुतले के पास,धानोरा फाटा, घुग्घुस बस्ती के सभी दारू भट्टी से रोज सैकड़ों पेंटी अवैध शराब कि तश्करी धड़ल्ले से सुरू है। तश्तरी में अपने नेता और आका के बदौलत पार्टी के पदाधिकारि और तलवे चाटने वाले चेले चपाटे कार्यकर्ता भी शामिल हैं। रोजगार के लिए अच्छे लोग उलटे,खराब धंदा से जुड गए हैं। जिससे अपराधिक मामले बढ गए। अश्लीलता, गुंडागर्दी , झगड़ा ,मुजोरी , डकैत,चोरी,भ्रम,तनाव,भय,से पीड़ित अमराधिक मामले ने लोगों कि खुशी के ज़िंदगी में मौत हमसाया बन गया है।
बेल्सणी, अमराई ,नकोडा ,शालीकराम नगर ,हिदु श्मशान भूमि, केमीकल वार्ड,धानोरा,नागाळा,पांढरकवळा,शेनगांव,उसगांव,शिवनगर, म्हातारदेवी,शास्ञी नगर,बस्ती, बाजार, आंबेडकर नगर,गली मोहल्ला ,वार्ड से लेकर वाशरी, उद्योग ,कारखाना, क्षेत्र में भी मजदुरो के लिए शराब आसानी से मिल रही। देशी,सस्ती और जहरीली शराब ने अब तक कई लोगों की जान ले ली है।

उसगांव लाॅयड्स मेटल,एसीसी अदानी परीसर के लेबर काॅलनी में धड़ल्ले से बिक रही अवैध शराब 

इन दिनों अनेक महीने से लायड्स मेटल और एसीसी अदानी सिमेट कारखाना,वाशरी के इर्द-गिर्द टपरी,होटल,के आड मे घने जंगल,खेतो के बीच गरीब मजदूरो को सस्ते दाम कि शराब को महेंगे मे बेचा जा रहा है।खुन पसीने की कमाई करने वाले मजदूर को कार्यस्थल में तीज, त्यौहार ,अवकाश के दिन भी पुरी सुविधा मिलने से अब वे लोगो में भी शराब कि लत बढती जा रही है। उद्योग, कारखाना के अधिकारी भी अवैध शराब बिक्री करनेवाले के खिलाफ पुलिस मे कही कुछ नही कर पा रहे हैं।
जिससे कारखाने के अंदर शराब पीकर काम करनें वाले मजदुर के बीच दुर्घटना का प्रमाण बढ गया।एक सस्ती शराब कि बोटल खरेदी करने पर मजदूरों को महेगे मौत के कफन सोना पड रहा। जिससे परीवार में चिंता का विषय बना है।पुरा परीवार बिखर रहा है। शराब के सेवन से शिक्षा का ज्ञान लेने के बजाए अपराधिक ज्ञान में युवा पीढ़ी मास्टरमाइंड बनकर आगे रहे हैं।हर कोई पुराने गुंडाराजो का तख्ता पलटकर नई पीढ़ी अपना साम्राज्य प्रस्थापित करने के लिए एक दुसरे के जान के भुखे हों चुके हैं।
जबकि शराब से कई लोग गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ये अड्डे केवल गलियों या घरों तक सीमित नहीं हैं।मंदिरों के प्रांगणों और धार्मिक स्थल, होटल ,ढाबा,टपरी,उद्योग,खेत , जंगल, से लेकर महामार्ग के आसपास भी शराब का कारोबार तेजी से चल रहा है। त्यौहार में अवकाश के दिन अवैध शराब कि दुकान में ग्राहक कि भीड़ देर अंधेरे तक लंबी कतार दिखाई देती है। शराब में हर जगह शराब कि बोटल, डिस्पोजल,चख्ना के पन्नी बिखरे हुए दिखाई दे रहे हैं।
स्पेशल बात यह है कि शहर के ढाबे और होटलो मे भी अब केवल अवैध शराब बिक्री का केंद्र बन चुका हैं। देखा गया है कि कई ढाबों पर ग्राहकों की मांग अनुसार देसी,विदेशी और महुआ की कच्ची शराब तक डिमांड के अनुसार महेगे दाम में उपलब्ध कराई जा रही है।
शहर मे चिंताजनक बात यह है कि इन स्थलों के आसपास स्कूली बच्चे, किसान,गरीब मजदुर भी अकसर देखे जाते हैं। सूत्रों के अनुसार,शहर से होने वाली देशी शराब की आपूर्ति -आसपास के ग्रामीण इलाकों से की जाती है।
क्षेत्र के शालीकराम नगर,बाजार भट्टी,धानोरा फाटा,घुग्घुस बस्ती,अदी देशी शराब भट्टी से रोज सैकड़ों पेटी शराब दोपहिया और चारपहिया वाहनों के जरिए बडे प्रमाण पर अवैध परिवहन बिना रोक-टोक धड़ल्ले से जारी है। नागरिकों का आरोप है कि शहर मे इतने बड़े पैमाने पर चल रहे इस अवैध धंधे को किसी न किसी स्तर पर संबंधित अधिकारियों का संरक्षण मिल रहा है।वरना यह अवैध कारोबार इतनी मजबूती से नहीं फुलता।
जिला पुलिस अधीक्षक और Excise अधिकारी के लिए यह स्थिति बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है। कहा जाता है कि अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई केवल संबंध बनाने के लिए कि जा रही है।एसआयटी भी अवैध शराब के दुकानो कि जांच तेजी से सुरु कर दी है। जिससे जिले पर मे शैकडो दुकान पर ताला जड़ सकता है।
नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ता ने इस मामले की विशेष जांच कराने कि मांग जिला प्रशासन से कर रहे हैं।नागरीक अब यह उम्मीद कर रहे हैं कि क्या पुलिस प्रशासन, आबकारी विभाग इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगाएगी। जिससे शहर , अपराधिक मामले,आमहत्या कि घटणा, दुर्घटना से सुरक्षित और शहर नशामुक्त बने।

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