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मुआवजा नहीं तो सड़क नहीं

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मुआवजा नहीं तो सड़क नहीं

किसानों ने रुकवाया घुग्घुस–म्हातारदेवी बायपास का निर्माण

बिना अधिसूचना और मुआवजे के सड़क निर्माण बना बड़ा विवाद, जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

घुग्घुस |
घुग्घुस–म्हातारदेवी क्षेत्र में प्रस्तावित घुग्घुस बायपास वळण मार्ग अब एक बड़े प्रशासनिक विवाद का केंद्र बन गया है। सार्वजनिक बांधकाम विभाग (PWD) द्वारा किसानों की निजी कृषि भूमि पर बिना किसी अधिसूचना, बिना भूमि अधिग्रहण और बिना आर्थिक मुआवजा दिए सीमेंट-कांक्रीट सड़क निर्माण कार्य शुरू किए जाने के विरोध में पीड़ित किसानों ने काम बंद आंदोलन छेड़ दिया।
आक्रोशित किसानों का आरोप है कि उनकी स्वामित्व वाली जमीन पर जबरन बुलडोजर चलाया जा रहा है, जो न सिर्फ भूमि अधिग्रहण कानून 2013 बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त संपत्ति के अधिकारों का भी खुला उल्लंघन है। किसानों का स्पष्ट कहना है कि अब तक न कोई संपादन आदेश जारी हुआ है और न ही एक रुपया मुआवजा दिया गया है, फिर भी सड़क निर्माण का काम बेखौफ जारी रखा गया।

मुआवजा मिले बिना एक इंच जमीन नहीं
आंदोलनरत किसानों ने दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें विकास से कोई विरोध नहीं है, लेकिन शासन के नियमों के अनुसार पूर्ण और उचित मुआवजा मिलने के बाद ही वे अपनी जमीन सड़क निर्माण के लिए देंगे। बिना सहमति और बिना मुआवजे के किया जा रहा निर्माण कार्य पूरी तरह अस्वीकार्य है।

जिलाधिकारी सहित तमाम अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन

पीड़ित किसानों ने इस गंभीर अन्याय के खिलाफ
जिलाधिकारी चंद्रपुर, पालकमंत्री चंद्रपुर, उपविभागीय अधिकारी चंद्रपुर, पुलिस अधीक्षक चंद्रपुर, कार्यकारी अभियंता (PWD) चंद्रपुर, पुलिस निरीक्षक घुग्घुस और नगर परिषद घुग्घुस को लिखित निवेदन सौंपते हुए मांग की है कि—
किसानों की जमीन पर चल रहा सड़क निर्माण कार्य तत्काल रोका जाए
नियमानुसार भूमि अधिग्रहण कर बाजार मूल्य के अनुसार पूरा मुआवजा दिया जाए
मुआवजा अदा होने के बाद ही आगे का निर्माण कार्य शुरू किया जाए
निवेदन की प्रतिलिपि सभी संबंधित विभागों को भेजी गई है।

आंदोलन और उग्र करने की चेतावन

इस आंदोलन में पूर्व उपसभापति सुरेश बोबडे, जगन्नाथ परागे, प्रेमलाल पारधी, गीताबाई लोखंडे, दादाजी खांडारकर, मधुकर निखाडे, नत्थू कामतवार, विठ्ठल पोलशेट्टीवार, सुधाकर बांदुरकर सहित बड़ी संख्या में प्रभावित किसान शामिल हुए।

किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने शीघ्र हस्तक्षेप कर निर्माण कार्य नहीं रोका और मुआवजे की प्रक्रिया शुरू नहीं की, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

आंदोलन के दौरान PWD के जूनियर इंजीनियर विष्णु ओडपल्लीवार और सहायक अभियंता रवींद्र ढोरे मौके पर मौजूद रहे।

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