राष्ट्रवादी काँग्रेस के पत्र से ऊर्जा विभाग में भूचाल
चंद्रपुर महाऔष्णिक विद्युत केंद्र में रिश्तेदारी–रिश्वत का ‘पावर प्लांट’, करोड़ों के खेल का सनसनीखेज खुलासा
चंद्रपुर |
दिनांक : 21 जनवरी 2026
चंद्रपुर महाऔष्णिक विद्युत केंद्र में वर्षों से दबा बैठा कथित महाघोटाला अब खुलेआम सामने आ गया है। राष्ट्रवादी काँग्रेस द्वारा पार्टी के अधिकृत लेटरपैड पर की गई गंभीर शिकायत ने ऊर्जा विभाग से लेकर मंत्रालय और मुख्यमंत्री कार्यालय तक खलबली मचा दी है।
राष्ट्रवादी काँग्रेस के जिला वरिष्ठ पदाधिकारी सुनील दहेगांवकर द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में महानिर्मिती के मुख्य अभियंता विजय राठोड पर पद के दुरुपयोग, रिश्तेदारी को बढ़ावा देने और पूरे विद्युत केंद्र को ठेकेदारी साम्राज्य में तब्दील करने के गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए गए हैं।
भतीजे को बनाया ‘सुपर पावर’, नियम-कानून ताक पर शिकायत के अनुसार, विजय राठोड ने अपने ही भतीजे विक्की राठोड को तकनीकी सहायक के पद पर नियुक्त कर ऐसे अधिकार सौंप दिए जो किसी अतिरिक्त कार्यकारी अभियंता को भी देना असंवैधानिक माना जाता है।
आरोप है कि— कौन सा ठेकेदार काम करेगा। किस काम को बजट मिलेगा। किसे वर्क ऑर्डर जारी होगा। फाइल किसके नाम पर खुलेगी।
इन सभी फैसलों पर विक्की राठोड का सीधा नियंत्रण है। हालात इतने गंभीर हैं कि पूरे चंद्रपुर महाऔष्णिक विद्युत केंद्र में उन्हें “छोटा सीई” कहा जाने लगा है—जो व्यवस्था की सड़ांध को खुद बयां करता है।
आउटडोर प्लांट से लेकर हर सेक्शन में ‘कट सिस्टम’
शिकायत में आरोप है कि आउटडोर प्लांट जैसे महत्वपूर्ण सेक्शन में जानबूझकर भारी-भरकम बजट स्वीकृत किए गए ताकि मनपसंद ठेकेदारों को खुली लूट का मौका मिले।
आरोपों की जद में—
कोल हैंडलिंग प्लांट ,सिविल सेक्शन,इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस,ऐश हैंडलिंग,टरबाइन मेंटेनेंस,आउटसोर्सिंग
वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट,रिसोर्स प्लानिंग सेक्शन
बताया गया है कि “प्रतिशत” दिए बिना कोई भी काम आगे नहीं बढ़ता।
अधूरे काम, पूरे बिल, 40–60% की हिस्सेदारी!
शिकायत में दावा किया गया है कि कई ठेकेदारों से खुलेआम कमीशन वसूला गया, अधूरे और घटिया कामों के बावजूद पूरे बिल पास किए गए, और ठेकेदारों व अधिकारियों के बीच 40 से 60 प्रतिशत तक हिस्सेदारी तय की गई।
टेंडर मैनेजमेंट का खेल, पसंदीदा ठेकेदारों को फायदा रिसोर्स प्लानिंग सेक्शन को लेकर भी गंभीर आरोप हैं। कहा गया है कि—
तकनीकी और प्राइस बिड मुख्य अभियंता की अनुमति के बिना न खोलने के निर्देश बिना जरूरत बड़े पैमाने पर डीपीआर कार्य योग्यता शर्तें इस तरह डिजाइन कि सिर्फ चुनिंदा ठेकेदार ही पात्र बनें
मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायत, मामला दबेगा नहीं
सबसे अहम बात यह है कि यह शिकायत केवल विभागीय फाइलों तक सीमित नहीं रखी गई। इसकी प्रतिलिपि सीधे मुख्यमंत्री व ऊर्जा मंत्री देवेंद्र फडणवीस, मुख्य सचिव, ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव, महानिर्मिती के व्यवस्थापकीय संचालक, संचालक (संचालन) और कार्यकारी संचालक, नागपुर को भेजी गई है।
साफ संकेत है—अब यह मामला दबाया नहीं जा सकता।
उच्चस्तरीय जांच की मांग, ऊर्जा विभाग की साख दांव पर राष्ट्रवादी काँग्रेस ने मांग की है कि विजय राठोड के कार्यकाल में हुए और वर्तमान में चल रहे सभी कार्यों की निष्पक्ष, उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
यदि आरोप सही पाए गए, तो यह सिर्फ एक अधिकारी का भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि पूरे ऊर्जा विभाग की साख पर लगा सबसे बड़ा दाग होगा।
अब बड़ा सवाल क्या सरकार इस गंभीर शिकायत को फाइलों में दबा देगी?
या फिर चंद्रपुर महाऔष्णिक विद्युत केंद्र में चल रहे “रिश्तेदारी और रिश्वत के पावर प्लांट” पर सख्त कार्रवाई कर मिसाल कायम करेगी?
नज़रें अब मंत्रालय और मुख्यमंत्री के अगले कदम पर टिकी हैं।