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वर्धा नदी भोयगांव– भारोसा,ठामसी घाट पर रेत माफिया का तांडव

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वर्धा नदी भोयगांव–ठामसी घाट पर रेत माफिया का तांडव



सरकारी ‘घरकुल योजना’ की आड़ में रातभर अवैध रेत तस्करी, प्रशासन मूकदर्शक


घुग्घुस | चंद्रपुर
चंद्रपुर जिले की कोरपणा तहसील में वर्धा नदी के भोयगांव– भारोसा,ठामसी रेत घाट पर सरकारी घरकुल (आवास) योजना की आड़ में खुलेआम अवैध रेत तस्करी का खेल चल रहा है। नियमों को ताक पर रखकर रात के अंधेरे से लेकर तड़के सुबह तक दर्जनों ट्रैक्टरों से रेत की लूट जारी है, जबकि प्रशासन और पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में है।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में कोरपणा तहसील क्षेत्र के 8 गांवों—गड़चांदूर, भोयगांव, उपरवाही, जैतापुर, लखमापुर, भुट्रा, कवठाळा और कोराड़ी—के लिए 200 ब्रास रेत आवंटित की गई है। इसके नाम पर घाट पर करीब 1000 ट्रैक्टरों से रेत की ढुलाई की जा रही है, जो खुद में कई सवाल खड़े करती है।

समय तय, लेकिन रात में तस्करी फुल स्पीड
सरकारी नियमों के अनुसार आवास योजना के लाभार्थियों के लिए रेत भरने और परिवहन का समय सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक तय है। इसके बावजूद हकीकत यह है कि रात के अंधेरे से सुबह 5–7 बजे तक रेत तस्करी धड़ल्ले से चल रही है।आज सुबह करीब 7 बजे तक 15 ट्रैक्टर निर्धारित समय से पहले ही घाट में रेत भरते पाए गए।जैसे कि

सुर्याभान पोतराजे भोयगांव तुळसीदास मडावि
प्रविण ठावरी भोयगांव साईनाथ भोयर के साथ ऐसे
MH 34cr 3106 t MH 34 br 2321
Mh34 bf 1615 t MH 34 l 4640
MH 34 cd 0226 t MH 34 cj 86 50
MH 34 bv 9207 t no
MH 34 cd 8725 t no
MH 34 cj 1565 t no
MH 29 bp 2048 t no
MH 34 cd 2974 t MH 34 cj 4006
MH 34 ak 3042 t mh 33 g590
MH 34 br 7169 t MH 34 cj 8657
MH 34 cd 0227 t MH 34 cj 7628
MH 34 cr 4391 t MH 34 cr 4580
MH 34 cj 1565 t no
MH 34 bv 4940 यह कुल ट्रैक्टर रेत घाट पर निर्धारित समय से पहले खडे थे।

अधिकारियों की ‘लेट एंट्री’, तस्करों की ‘फुल एंट्री

भोयगांव ठामसी घाट पर घरकुल योजना के तहत मुफ्त रेत वितरण और टीपी जांच के लिए मंडल अधिकारी विल्सण नांदेकर, राजू अहीरकर, पटवारी रूपेश पाणघाटे, कोतवाल रमेश मेश्राम, आर.आई. कालीदास तोडासे की ड्यूटी तय है।
लेकिन आरोप है कि सुबह अधिकारी समय पर घाट पर नहीं पहुंचते, और इसी देरी का फायदा उठाकर रेत माफिया रातभर घाट साफ कर देता है।

मीडिया ने दी सूचना, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं?

मीडिया के माध्यम से नायब तहसीलदार करिश्मा मैडम और संबंधित अधिकारियों को सुबह 7 बजे लोकेशन व फोटो भेजकर सूचना दी गई। इसके बाद सुबह करीब 10 बजे नायब तहसीलदार राजस्व टीम के साथ घाट पर पहुंचीं।
लेकिन हैरानी की बात यह रही कि घाट में खड़े 15 ट्रैक्टरों में से एक पर भी अवैध परिवहन की कार्रवाई नहीं हुई। केवल टीपी देखकर सभी ट्रैक्टरों को छोड़ दिया गया।

पुलिस–महसूल संरक्षण में रेत माफिया?

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि महसूल अधिकारियों और पुलिस के संरक्षण में कोरपणा तहसील क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक ट्रैक्टरों से रातभर रेत तस्करी चल रही है।
रेत तस्कर नदी घाट में मनमर्जी से गड्ढे खोदकर अवैध उत्खनन कर रहे हैं। रात में रास्तों पर मुखबिर तैनात रहते हैं, जो अधिकारियों और पुलिस की आवाजाही की खबर तस्करों तक पहुंचाते हैं।

जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से मांग की है कि नदी घाट पर चल रहे इस भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी महसूल अधिकारियों व रेत माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

अब बड़ा सवाल यह है—

क्या सरकारी घरकुल योजना गरीबों के लिए है या रेत माफियाओं की कमाई का जरिया बन चुकी है?
और क्या जिला प्रशासन इस खुलेआम चल रही लूट पर लगाम लगाएगा, या फिर वर्धा नदी यूं ही रेत माफियाओं के हवाले होती रहेगी?

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