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कोयला हेराफेरी कांड: तीन दिन बाद FIR, ड्राइवर हुआ हलाल… अब CBI–विजिलेंस जांच की मांग तेज

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कोयला हेराफेरी कांड: तीन दिन बाद FIR, ड्राइवर हुआ हलाल… अब CBI–विजिलेंस जांच की मांग तेज



वणी (यवतमाळ) |
उकणी कोयला खदान से निकले उच्च गुणवत्ता वाले कोयले की कथित हेराफेरी ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। घटना सामने आने के तीन दिन बाद मामला दर्ज होने और केवल दो ट्रक चालकों पर कार्रवाई किए जाने से कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चर्चा है कि बीते छं दिन से यह सिर्फ “ऊपरी परत” है, असली खेल कहीं और से संचालित हुआ।

क्या है पूरा मामला?

22 फरवरी की शाम 7 से रात 9 बजे के बीच कथित तौर पर यह हेराफेरी हुई। शिकायत के आधार पर वणी पुलिस ने Wani Police Station में बीएनएस की धाराओं 316(3), 318(2), 3(5) के तहत ट्रक चालक सैफ अली और विश्वनाथ के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। दोनों आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं।
शिकायत कोलारपिपरी सब-एरिया के उपक्षेत्रीय प्रबंधक युसूफ एम. हुसेन की ओर से, रेल्वे साइडिंग इंचार्ज देवेंद्र प्रताप सिंह परिहार के माध्यम से दर्ज कराई गई।

जानकारी के अनुसार, उकणी खदान में मे. कृष्णा इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. कंपनी के दो ट्रक (CG 11 BM 9033 और CG 15 EH 3274) को कोयला ढुलाई का ठेका दिया गया था। यह कोयला बिजली वितरण कंपनी को भेजा जाना था। शाम 7 बजे ट्रक साइडिंग के लिए रवाना हुए।

टोल नाके से साइडिंग की दूरी महज पांच मिनट है, लेकिन ट्रक रात 9:30 बजे कांटे पर पहुंचे। जब ट्रक खाली किए गए, तो उच्च दर्जे के कोयले की जगह मिट्टी और गिट्टी मिली। यहीं से पूरे खेल का पर्दाफाश हुआ।

असली कोयला गया कहां?

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, टोल नाके से निकलने के बाद ट्रक लालपुलिया क्षेत्र में एक धरमकांटे के पीछे स्थित प्लॉट पर पहुंचे। वहां से कथित तौर पर उच्च गुणवत्ता वाला कोयला उतार लिया गया और कलमना मार्ग स्थित एक कोयला प्लॉट से मिट्टी व गिट्टी मिश्रित घटिया माल भरकर साइडिंग पर पहुंचाया गया।

कोयला व्यापारियों में चर्चा है कि करोड़ों के इस कथित खेल में केवल ड्राइवरों की भूमिका संभव नहीं। सवाल उठ रहा है—क्या बिना स्थानीय प्रभावशाली संरक्षण के इतना बड़ा खेल संभव है?

पुलिस कार्रवाई पर सवाल

घटना उजागर होने के तीन दिन बाद FIR दर्ज होना चर्चा का विषय है।बीते छं दिन से असली चोर पर्दे के पिछे क्यों छिपाया गया।
क्या पुलिस पर किसी प्रकार का दबाव था?
क्या बड़े नामों को बचाने की कोशिश हो रही है?
पुलिस प्रशासन का कहना है कि तकनीकी जांच जारी है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि जब तक सप्लाई चेन, कांटा रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और जीपीएस डेटा की गहराई से जांच नहीं होगी, तब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी।

अब CBI और विजिलेंस जांच की मांग

मामले की गंभीरता को देखते हुए सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने स्वतंत्र जांच की मांग तेज कर दी है। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए Central Bureau of Investigation (CBI) तथा राज्य विजिलेंस विभाग से जांच कराने की मांग उठ रही है।
लोगों का कहना है कि यदि जांच केवल ट्रक चालकों तक सीमित रही, तो यह न्याय के साथ अन्याय होगा। कथित राजनीतिक संरक्षण और उच्च स्तर की मिलीभगत की चर्चा के बीच निष्पक्ष केंद्रीय जांच ही सच्चाई उजागर कर सकती है।

जनता की प्रमुख मांगें

खदान से साइडिंग तक पूरी सप्लाई चेन की फोरेंसिक जांच करे।
सीसीटीवी फुटेज, जीपीएस लोकेशन और वेटब्रिज डेटा सार्वजनिक किया जाए।
संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका की निष्पक्ष जांच करें।
पूरे मामले को CBI या स्वतंत्र विजिलेंस एजेंसी को सौंपा जाए।

बड़ा सवाल उच्च गुणवत्ता वाला कोयला आखिर किसके इशारे पर गायब किया गया?
क्या इस गोरखधंधे में स्थानीय राजनीतिक या ठेकेदारी नेटवर्क शामिल है?
क्या जांच असली सरगनाओं तक पहुंचेगी या मामला चालकों तक ही सिमट जाएगा?
फिलहाल पूरे यवतमाळ जिले की नजर पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है। अगर निष्पक्ष और कठोर जांच हुई, तो इस कोयला हेराफेरी कांड में कई बड़े नाम बेनकाब हो सकते हैं।

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