Home Breaking News घुग्घुस में प्रदूषण का कहर! 40% बढ़े श्वसन रोग

घुग्घुस में प्रदूषण का कहर! 40% बढ़े श्वसन रोग

411

घुग्घुस में प्रदूषण का कहर! 40% बढ़े श्वसन रोग



अब सड़कों पर उतरे नागरिक—नगर परिषद और MPCB पर सवाल


घुग्घुस :
औद्योगिक नगरी  घुग्घुस आज गंभीर प्रदूषण संकट से जूझ रही है। जहरीली हवा और धूल के गुबार के बीच यहां के नागरिकों का जीना मुश्किल हो गया है। हालात इतने भयावह हैं कि स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों के आंकड़ों के अनुसार पिछले छह महीनों में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी जैसी श्वसन बीमारियों में 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
क्षेत्र में बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है। आरोप है कि कई कंपनियां बिना किसी पूर्व सूचना के उत्पादन बढ़ा रही हैं, जिससे प्रदूषण स्तर लगातार बढ़ रहा है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

स्थिति को और बिगाड़ रही है भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही। म्हतारदेवी रोड पर बायपास बनने के बावजूद ट्रक और अन्य भारी वाहन गांव के अंदरूनी संकरे रास्तों से गुजर रहे हैं। इससे धूल, शोर और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि स्कूल समय के दौरान भी बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं है।

इसी गंभीर मुद्दे को लेकर “सोच संगठन” और “व्यापारी संगठन” ने पहले ही प्रशासन को अल्टीमेटम दिया था। इसके बाद आज दोनों संगठनों ने “नगर परिषद चलो” आंदोलन छेड़ दिया, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया।

हालांकि, नगर परिषद की ओर से इस मुद्दे पर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश सामने आई है। मुख्याधिकारी निलेश रांजनकर, नगराध्यक्ष दीप्ति सोनटक्के और नगर उपाध्यक्ष राजू रेड्डी का कहना है कि प्रदूषण का मुद्दा नगर परिषद के दायरे में नहीं, बल्कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने यह भी बताया कि वे लगातार कंपनी प्रबंधन के साथ पत्र व्यवहार कर रहे हैं, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा।
वहीं, नगर परिषद के अंदर ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। नगराध्यक्ष, उपाध्यक्ष और कुछ नगरसेवकों ने मुख्याधिकारी निलेश रांजनकर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने नगर परिषद में उनके कार्यकाल से पहले ही कुछ कंपनियों और शराब भट्टियों को बिना उचित जांच के NOC दे दी। इस मामले में सीएम, डिप्टी सीएम, प्रशासनिक जांच कर संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है।

घुगुस बचाओ संघर्ष समिति, सोच संगठन और व्यापारी संगठन की प्रमुख मांगें:
सभी कंपनियों को प्रदूषण नियंत्रण के सख्त निर्देश दिए जाएं और नियमित निरीक्षण हो।
धूल और प्रदूषण के स्रोत को रोकने के लिए उद्योगों को तत्काल नोटिस जारी किया जाए।
सड़कों पर जमा धूल की रोजाना सफाई सुनिश्चित की जाए।

बस स्टैंड के सामने मुख्य चौराहे पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) सिस्टम लगाया जाए।
भारी वाहनों की गांव के अंदर आवाजाही पर सख्त रोक लगाई जाए और वैकल्पिक मार्ग सुनिश्चित किया जाए।

अल्टीमेटम और चेतावनी:
संगठनों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि महीने के अंत तक घुगुस के प्रमुख मुद्दों का समाधान नहीं किया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर नगर परिषद, शासन-प्रशासन और औद्योगिक कंपनियों के खिलाफ बड़ा और उग्र आंदोलन छेड़ेंगे।

निष्कर्ष

:घुगुस में बढ़ता प्रदूषण अब केवल एक स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य का गंभीर संकट बन चुका है। जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने के बजाय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को मिलकर ठोस कदम उठाने की जरूरत है, वरना आने वाले दिनों में हालात और भी विस्फोटक हो सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here