सुरक्षा रक्षक पर जानलेवा हमला, सिस्टम पर उठे बड़े सवाल
चंद्रपुर :
चंद्रपुर जिले की वेकोलि बल्लारपुर कोयला खदानों में बीते कुछ महीनों से तस्करी का संगठित नेटवर्क बेखौफ होकर सक्रिय है। पवणी, गौरी और सास्ती जैसी खदानों से डीजल, कोयला, लोहा, तांबा, आयल, सीएचपी बंकर और कोयला साउंडिंग परिसर से दिन-रात अवैध तरीके से माल बाहर निकाला जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस पूरे खेल में कुछ अधिकारी, सुरक्षा रक्षक और स्थानीय पुलिस थाना तक पर संरक्षण देने के आरोप लग रहे हैं।
जहां एक तरफ कुछ सुरक्षा कर्मी तस्करों से मिलकर कंपनी के साथ “नमकहरामी” कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ ईमानदार सुरक्षा रक्षक अपनी जान की परवाह किए बिना इस अवैध धंधे के खिलाफ डटकर खड़े हैं और कंपनी को लाखों के नुकसान से बचा रहे हैं।
ड्यूटी पर हमला: ईमानदारी की कीमत खून से चुकाई
9 जुलाई की शाम करीब 6 बजे पवणी सीएचपी बंकर के पास एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा रक्षक अमित सातपुते ने जैसे ही मोटरसाइकिल से आए तीन संदिग्धों को तांबा चोरी करते देखा, उन्होंने उन्हें रोकने का प्रयास किया। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी।
तीनों चोरों ने मिलकर सातपुते पर अचानक हमला बोल दिया और बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी। घटना को देख आसपास के दो अन्य सुरक्षा रक्षक मौके पर पहुंचे और बीच-बचाव करने लगे, लेकिन हमलावरों ने उन पर भी उसी तरह हमला कर दिया।
इस हमले में:एक सुरक्षा रक्षक की आंख के पास गंभीर चोट आई और खून बहता रहा।अन्य रक्षकों के शरीर पर कई जगह गहरे जख्म हुए।यह घटना न सिर्फ सुरक्षा कर्मियों पर हमला है, बल्कि पूरे सिस्टम को खुली चुनौती भी है।
पुलिस में शिकायत, लेकिन कार्रवाई पर सवाल उठ रहा।
फिलहाल घायल सुरक्षा रक्षकों ने इस मामले की शिकायत राजुरा पुलिस थाना में दर्ज कराई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।लेकिन बड़ा सवाल यही है यह भी है क्या राजुरा पुलिस तस्करों को जल्द सलाखों के पीछे डालेगी, या फिर यह मामला भी सांठगांठ की भेंट चढ़ जाएगा?
तस्करी सिंडिकेट को ‘ऊपर’ से संरक्षण?
सूत्रों की मानें तो यह कोई साधारण चोरी नहीं, बल्कि एक संगठित सिंडिकेट है, जिसे जिले के अपराध जगत से जुड़े प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है। यही कारण है कि खुलेआम तस्करी, हमले और हिंसा के बावजूद अब तक इस नेटवर्क पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।
कंपनी और प्रशासन की चुप्पी पर उठे लाखों सवाल इस तरह लगातार हो रही तस्करी और अब सुरक्षा रक्षकों पर हमले के बाद कंपनी प्रबंधन और प्रशासन की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है।
आखिर तस्करों को इतनी हिम्मत कौन दे रहा है?
सुरक्षा व्यवस्था में सेंध कैसे लग रही है?
और कब तक ईमानदार कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालते रहेंगे?
जनता की मांग है कि आरोपीयो पर सख्त कार्रवाई और उच्चस्तरीय जांच करने कि आवाज उठा रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने और कर्मचारियों ने पुलिस अधीक्षक मुमक्का सुदर्शन से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही, तस्करी में शामिल अधिकारियों, सुरक्षा कर्मियों और कथित पुलिस संरक्षण की भी निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि यह मामला सिर्फ कागजों तक सीमित रहता है या फिर सच में तस्करी के इस काले साम्राज्य पर बड़ा प्रहार होता है।