” हाईटेक जुगाड ” से कारवाही घाट मे रेत माफिया की लूट!
प्रशासन की आंखों के सामने पैनगंगा का ‘सीना चीर’ खेल!
कोरपना |
कोरपना तहसील में पैनगंगा नदी अब रेत माफियाओं के लिए ‘सोने की खान’ बन चुकी है। हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि रविवार जैसे अवकाश के दिन भी खुलेआम पोकलैंड मशीनों से नदी का सीना चीरकर सैकड़ों ब्रास रेत निकाली जा रही है—और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
दिनदहाड़े मशीनों का आतंक, रात में धड़ल्ले से रेत कि तस्करी,मौके पर जो तस्वीर सामने आई, वह किसी संगठित लूट से कम नहीं।
चौबीस घंटे नदी के बीचों-बीच बहाव क्षेत्र में पोकलैंड मशीनें उतरकर गहरी खुदाई कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर, हायवा ट्रक और ट्रैक्टरों में रेत भरकर दिन-रात अवैध परिवहन जारी है।
इतना ही नहीं नदी के बहते पानी में पाइप डालकर रेत निकालने का ‘हाईटेक जुगाड़’ भी किया गया है। घाट के ऊपर बड़े पैमाने पर रेत का भंडारण किया गया है, और उस पर मिट्टी-मुरुम बिछाकर बाकायदा ‘तस्करी रोड’ तैयार कर दी गई है।
नदी का बहाव मोड़ने की खतरनाक साजिश
रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब वे पोकलैंड मशीनों के जरिए पैनगंगा के प्राकृतिक जल प्रवाह को मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो यह सीधे-सीधे पर्यावरण के साथ खिलवाड़ है, जिससे आने वाले समय में नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है।
पर्यावरण और जीवन पर मंडरा रहा खतरा
इस अंधाधुंध खनन के गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं—भूजल स्तर में भारी गिरावट,नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ना,आसपास के गांवों में जल संकट,वन्यजीवों और मानव जीवन पर खतरा
प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल
सबसे बड़ा सवाल—जब चौबीस घंटे यह सब अधिकारी के नाक के नीचे खुलेआम हो रहा है, तो तश्करी पर कार्रवाई क्यों नहीं?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि महसूल विभाग, कुछ अधिकारी और पुलिस प्रशासन की मिलीभगत या लापरवाही के कारण यह अवैध कारोबार 24 घंटे बेखौफ चल रहा है।
रातभर गूंजती मशीनों की दहशत
नदी घाट के आसपास रहने वाले नागरिकों की हालत खराब है।
रातभर पोकलैंड मशीनों और हायवा ट्रकों की गड़गड़ाहट से लोगों की नींद उड़ चुकी है। डर और बेचैनी का माहौल बना हुआ है।
नए अफसरों से उम्मीद या फिर वही ढिलाई?
अब नजरें टिकी हैं जिले की नई कलेक्टर Vasumana Pant और पुलिस अधीक्षक Ayush Nopani पर।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि—कारवाही घाट पर तुरंत छापेमारी हो
पोकलैंड मशीनों और हायवा ट्रकों को जब्त किया जाए।
दोषी अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई हो
चेतावनी साफ है…
अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो पैनगंगा नदी सिर्फ नक्शों में रह जाएगी—और इसकी कीमत आने वाली पीढ़ियों को चुकानी पड़ेगी।