महामाया कोल वॉशरी पर बरसे अपर मुख्य सचिव विकास खारगे, किसानों की समस्याओं पर जताई नाराजगी
मुआवजा, प्रदूषण और रोजगार के मुद्दे पर कंपनी प्रबंधन को लगाई फटकार, किसानों को न्याय दिलाने का भरोसा
घुग्घुस /चंद्रपुर : घुग्घुस बेल्सणी स्थित महामाया कोल वॉशरी के खिलाफ किसानों और ग्रामीणों का वर्षों पुराना आक्रोश शुक्रवार को उस समय खुलकर सामने आया, जब महाराष्ट्र शासन के अपर मुख्य सचिव एवं वेकोलि प्रदूषण नियंत्रण समिति के अध्यक्ष विकास खारगे ने विधायक सुधीर मुनगंटीवार के साथ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
दौरे के दौरान महामाया कोल वॉशरी, भटाली ओपन कास्ट परियोजना, ओव्हर बर्डन डंपिंग क्षेत्र तथा दुर्गापुर में रोप-वे से फैल रहे प्रदूषण की प्रत्यक्ष समीक्षा की गई। निरीक्षण के दौरान किसानों और ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी व्यथा अधिकारियों के समक्ष रखी।
ग्रामीणों ने बताया कि महामाया कोलवाशरी कंपनी द्वारा कई श्रमिकों को बिना पूर्व सूचना रोजगार से बाहर कर दिया गया। वहीं, किसानों का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से करीब 68 लाख रुपये का मुआवजा लंबित है। इसके अलावा कोयला धुलाई से निकलने वाला दूषित काला पानी खेतों में छोड़े जाने से फसलें बर्बाद हो रही हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।कुछ महीने पहीले गंभीर समस्या पर्यावरण राज्य मंत्री पंकजा मुंडे का महामाया कोलवाशरी में दौरा कर चेतावनी दी थी। लेकिन पर्यावरण मंत्री के निर्देश का पालन नही किया।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदूषण के कारण क्षेत्र में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं तथा पशुधन भी प्रभावित हो रहा है। लगातार कोयला परिवहन से सड़कों पर जाम और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। किसानों कि जमीन हडपी जा रही है।
महामाया कोलवाशरी के भीतर प्रत्यक्ष जांच के दौरान अपर मुख्य सचिव विकास खारगे तथा विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने कंपनी के अधिकारियों अग्रवाल, चौधरी, एचआर विभाग के प्रतिनिधियों तथा अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब-तलब किया। अधिकारियों ने किसानों के लंबित मुआवजे, रोजगार से हटाए गए श्रमिकों और प्रदूषण से हुए नुकसान के मामलों पर गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुए तत्काल समाधान के निर्देश दिए।
बैठक में स्पष्ट कहा गया कि किसानों, मजदूरों और ग्रामीणों के हितों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा प्रभावित लोगों को विज्ञानीक जा़च टीम का गठन कर न्याय दिलाने के लिए प्रशासन आवश्यक कदम उठाएगा।
इस अवसर पर चंद्रपुर जिलाधिकारी वसुमना पंत, उमेश घाडगे, विभागीय सह-संचालक कृषि, शंकर टोटावार (जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी), नितीन भटकर, मीनाक्षी बंसोडे (विस्तार अधिकारी), ब्रिजभूषण पाझारे, विवेक बोढे, अनिल डोंगरे, बबन विधाते, पांडुरंग मठे, भगवान भोंगे, पराग तुराणकर, परमेश्वर आसुटकर, बापूजी भोंगडे सहित कृषि विभाग के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, किसान, महिला-पुरुष एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिक उपस्थित थे।
दौरे के बाद किसानों में उम्मीद जगी है कि वर्षों से लंबित मुआवजा, प्रदूषण नियंत्रण और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर अब ठोस कार्रवाई होगी। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि कंपनी की जवाबदेही तय कर प्रभावित परिवारों को शीघ्र न्याय दिलाया जाए।