कोयला प्रदूषण से प्रभावित किसानों को न्याय दिलाने के लिए बड़ा कदम
विधायक सुधीर मुनगंटीवार की पहल पर बनेगी राज्यस्तरीय नीति, महामाया कोल वॉशरी को लंबित मुआवजे पर फटकार
गुग्गुल/ चंद्रपुर |
चंद्रपुर जिले में कोयला धूल प्रदूषण से प्रभावित किसानों को न्याय दिलाने के लिए विधायक सुधीर मुनगंटीवार की पहल पर राज्य सरकार ने निर्णायक कदम उठाया है। उनके लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप महाराष्ट्र शासन के अपर मुख्य सचिव (राजस्व) विकास खारगे की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है, जो कोयला प्रदूषण से खेती को होने वाले नुकसान, मुआवजा व्यवस्था और भविष्य की नीति पर व्यापक अध्ययन करेगी।
इसी क्रम में शुक्रवार को बेल्सणी साखरवाही स्थित महामाया कोल वॉशरी का दौरा कर प्रभावित किसानों की समस्याओं का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया गया। इस दौरान अपर मुख्य सचिव विकास खारगे, जिलाधिकारी वसुमना पंत, उपविभागीय अधिकारी विशालकुमार मेश्राम, तहसीलदार विजय पवार, जिला कृषि अधीक्षक शंकर टोटावार, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी तथा कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
68 लाख रुपये से अधिक मुआवजा अब तक लंबित
निरीक्षण के दौरान विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। किसानों ने बताया कि महामाया कोल वॉशरी से उड़ने वाली कोयले की धूल के कारण फसलों को भारी नुकसान हो रहा है, लेकिन कंपनी द्वारा लगभग 68 लाख 61 हजार 864 रुपये की लंबित क्षतिपूर्ति अब तक वितरित नहीं की गई है।
इस पर विधायक मुनगंटीवार ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए प्रशासन को तत्काल कार्रवाई कर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को वर्षों तक न्याय के लिए इंतजार नहीं करना चाहिए और उनकी भरपाई समयबद्ध तरीके से होनी चाहिए।
फसल नुकसान के लिए बनेगी वैज्ञानिक कार्यप्रणाली
विधायक मुनगंटीवार ने कृषि विभाग को निर्देश दिए कि फसलवार नुकसान का आकलन करने के लिए वैज्ञानिक और पारदर्शी प्रणाली विकसित की जाए। प्रत्येक किसान को हुए वास्तविक नुकसान का अध्ययन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए और उसे शासन स्तर पर प्रस्तुत किया जाए।
उन्होंने कहा कि कोयले की धूल केवल फसलों को ही नहीं बल्कि भूमि की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर रही है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी उपाय, ग्रीन वॉल निर्माण और किसानों के लिए मजबूत मुआवजा नीति अत्यंत आवश्यक है।
किसान उद्योगों से अधिक महत्वपूर्ण
दौरे के दौरान विधायक मुनगंटीवार ने स्पष्ट कहा कि किसान देश का अन्नदाता है और उसका महत्व किसी भी उद्योग से कम नहीं हो सकता। यदि प्रदूषण के कारण किसानों की आय प्रभावित हो रही है, तो उनके हितों की रक्षा करना शासन और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि समिति यह तय करेगी कि नुकसान का आकलन कैसे होगा, मुआवजा कौन देगा, कितनी अवधि में देगा और उसकी जवाबदेही किसकी होगी। इसके लिए राज्य स्तर पर एक मानक कार्यप्रणाली (SOP) तैयार की जाएगी।
एमएसपी से जोड़ी जा सकती है मुआवजा व्यवस्था
मुनगंटीवार ने कहा कि किसानों को दी जाने वाली क्षतिपूर्ति को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से जोड़ने पर भी विचार किया जाएगा, ताकि उन्हें दीर्घकालीन और न्यायसंगत राहत मिल सके। यदि आवश्यक हुआ तो आगामी विधानसभा सत्र में भी इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया जाएगा।
मुनगंटीवार के प्रयासों से बनी समिति : विकास खारगे
अपर मुख्य सचिव विकास खारगे ने कहा कि विधायक सुधीर मुनगंटीवार द्वारा विधानसभा में लगातार उठाए गए मुद्दों और उनके प्रभावी प्रयासों के कारण ही यह समिति गठित की गई है।
उन्होंने कहा कि कोयला धूल से फसलों को होने वाले नुकसान को लेकर वर्षों से शिकायतें मिल रही हैं, लेकिन नुकसान के आकलन, मुआवजे के मानदंड और जिम्मेदारी तय करने के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं थी। अब समिति वैज्ञानिक, पारदर्शी और व्यावहारिक नीति तैयार करेगी।
खारगे ने बताया कि किसानों की समस्याओं, सुझावों और जमीनी स्थिति का अध्ययन कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यह रिपोर्ट अगले एक माह में शासन को सौंपी जाने की संभावना है, जिससे राज्यभर के प्रदूषण प्रभावित किसानों को राहत मिल सकेगी।
किसानों में जगी उम्मीद
महामाया कोल वॉशरी क्षेत्र के किसानों का कहना है कि वर्षों से प्रदूषण, फसल नुकसान और लंबित मुआवजे की समस्या बनी हुई है। अब राज्य सरकार द्वारा गठित समिति और विधायक सुधीर मुनगंटीवार की सक्रिय पहल से उन्हें उम्मीद जगी है कि उनके संघर्ष को न्याय मिलेगा और प्रदूषण से प्रभावित किसानों के लिए स्थायी समाधान का रास्ता खुलेगा।










