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गुंडागर्दी चरम पर! पत्रकार को कुल्हाड़ी से जान पर मारने कि धमकी।मोबाइल छीनकर पासवर्ड का दबाव

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गुंडागर्दी चरम पर! पत्रकार को कुल्हाड़ी से जान पर मारने कि धमकी, मोबाइल छीनकर पासवर्ड का दबाव



अवैध डीजल’ के काले खेल को उजागर करने पर मिली ‘सजा’!


होटल की आड़ में धड़ल्ले से चल रहा अवैध कारोबार, पुलिस की चुप्पी पर उठ रहे सवाल!


शिरपुर: यवतमाल जिला वणी तहसील के शिरपुर पुलिस थाना क्षेत्र में साखरा गांव के पास पत्रकारिता की नैतिकता को तार-तार करने वाली एक खौफनाक घटना सामने आई है। एक बेखौफ पत्रकार, जो समाज के काले चेहरों को उजागर करने की हिम्मत रखता था, उसे उसकी सच्चाई की कीमत अपनी जान जोखिम में डालकर चुकानी पड़ी।

घटना का सिलसिला:
अज्ञात सूत्रों के अनुसार, कथित तौर पर पत्रकार ने राहुल चौधरी और उनके पिता मधुकर चौधरी द्वारा संचालित होटल की आड़ में चल रहे अवैध डीजल कारोबार की तस्वीरें ले रहे थे। इस ‘गुस्ताखी’ को बर्दाश्त न करते हुए, होटल संचालक और उनके सहयोगियों ने पत्रकार को घेर लिया। गाली-गलौज और मारपीट के बाद, उन्होंने पत्रकार का मोबाइल छीन लिया और उस पर पासवर्ड बताने का दबाव बनाया। जब पत्रकार ने मना किया, तो राहुल चौधरी होटल के अंदर से एक कुल्हाड़ी लेकर आए और उन्हें जान से मारने की धमकी दी।

पुलिस की भूमिका पर सवाल:
इस भयावह घटना के बाद, शिरपुर पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पत्रकार ने किसी तरह अपनी जान बचाकर 112 आपातकालीन सेवा पर पुलिस को सूचना दी और शिरपुर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। हालांकि पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत मामला दर्ज किया है,

लेकिन क्या यह कार्रवाई काफी है?अवैध कारोबार का पर्दाफाश क्षेत्र में चर्चा तेज है कि क्या यह हमला होटल की आड़ में चल रहे अवैध डीजल कारोबार को उजागर होने से रोकने के लिए किया गया था। यवतमाल जिला पुलिस अधीक्षक और शिरपुर पुलिस थाना से क्षेत्रीय समाजिक कार्यकर्ता और पञकार संघटन ने होटल के आड में होनेवाली डिझल कि खरेदी बिक्री करनेवाले होटल संचालक और वाहन चालक पर कार्रवाई करने‌ कि मांग कि है। यह घटना पत्रकारिता की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है।
यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि सच्चाई को उजागर करना कभी-कभी कितना खतरनाक हो सकता है। क्या हम एक ऐसे समाज में रहना चाहते हैं जहां पत्रकारों को उनकी हिम्मत की सजा दी जाती है? क्या हम अवैध कारोबार को बढ़ावा देना चाहते हैं? यह समय है कि हम इन सवालों पर विचार करें और सच्चाई के पक्ष में खड़े हों।

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