दुर्गम घोडणकप्पी में हाई रिस्क गर्भवती महिला का सुरक्षित अस्पताल में स्थानांतरण
पहाड़, पथरीली और फिसलन भरी राह के साथ भाषा की बाधा भी पार कर स्वास्थ्य टीम पहुंची महिला के घर
दुभाषिए की मदद से पालकमंत्री डॉ. अशोक उईके ने गर्भवती महिला से की बातचीत
चंद्रपुर, 16 अगस्त। पहाड़ों के बीच बसा गांव, जहां वाहन पहुंचने तक की पक्की सड़क नहीं है। बारिश के मौसम में पथरीली और फिसलन भरी राह और ऊपर से भाषा की बाधा। ऐसी तमाम चुनौतियों के बीच जिवती तहसील के दुर्गम घोडणकप्पी (ऊपरी) गांव की एक हाई रिस्क गर्भवती महिला तक स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची और उसे सुरक्षित रूप से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पाटण में भर्ती कराया।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य के आदिवासी विकास मंत्री तथा चंद्रपुर जिले के पालकमंत्री डॉ. अशोक उईके ने 15 अगस्त को आयुष्मान भारत केंद्र, पाटण में इस गर्भवती महिला से मुलाकात की। भाषा की बाधा को देखते हुए दुभाषिए की मदद से उन्होंने महिला से बातचीत कर उसकी तबीयत की जानकारी ली।
20 किलोमीटर दूर है स्वास्थ्य केंद्र
घोडणकप्पी गांव पाटण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से करीब 20 किलोमीटर, जबकि नंदप्पा उपकेंद्र से लगभग 10 किलोमीटर दूर है। गांव में मुख्य रूप से आदिम कोलाम समाज के लोग रहते हैं।
गांव तक पहुंचने वाले रास्ते का करीब 800 मीटर हिस्सा पहाड़ी, पथरीला और बेहद कठिन है। बारिश में यह रास्ता और भी फिसलन भरा एवं खतरनाक हो जाता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को प्रसव के समय पहाड़ से नीचे लाना जोखिम भरा साबित हो सकता है।
पहले हुई घटना ने बढ़ाई चिंता
इसी गांव में 14 जून 2026 को दूसरी बार गर्भवती संगीता तुलशीराम गेडाम को प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद पहाड़ से नीचे लाते समय अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और रास्ते में ही उनकी दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु हो गई थी।
इस घटना की पृष्ठभूमि में घोडणकप्पी निवासी इंदिराबाई रामा जुमनाके के पांचवें गर्भावस्था होने के कारण स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें हाई रिस्क गर्भवती महिला के रूप में विशेष निगरानी में रखा।
उनके पूर्व गर्भधारण के मेडिकल इतिहास को देखते हुए प्रसव से पहले ही उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना जरूरी था। उनका रक्तचाप, ब्लड शुगर और हिमोग्लोबिन 10.7 ग्राम पाया गया। दो सोनोग्राफी जांच भी सामान्य रही हैं। सोनोग्राफी के अनुसार संभावित प्रसव तिथि 25 अगस्त 2026, जबकि मासिक धर्म की रिकॉर्ड के अनुसार 8 सितंबर 2026 बताई गई है।
स्वास्थ्य टीम सीधे महिला के घर पहुंची
पहाड़ी क्षेत्र, बारिश में फिसलन भरी सड़क, वाहन की अनुपलब्धता और प्रसव के समय महिला को पहाड़ से नीचे लाने के संभावित खतरे को देखते हुए 10 अगस्त 2026 को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाटण की स्वास्थ्य टीम सीधे घोडणकप्पी पहुंची।
लेकिन चुनौती सिर्फ दुर्गम रास्ते की नहीं थी। इंदिराबाई को मराठी भाषा समझने में परेशानी होने के कारण उनके और परिवार के साथ संवाद करना भी महत्वपूर्ण था।
जिलाधिकारी वसुमना पंत की संकल्पना से शुरू की गई ‘माता सखी’ ने इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। माता सखी ने महिला और उसके परिवार से उनकी परिचित भाषा में बातचीत कर संस्थागत प्रसव तथा समय पर अस्पताल पहुंचने के महत्व को समझाया।
“बच्चों और मजदूरी की चिंता मत करो” — पालकमंत्री
अस्पताल आने को लेकर परिवार के सामने सिर्फ स्वास्थ्य संबंधी चिंता नहीं थी। महिला के अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान घर में मौजूद बच्चों की देखभाल, उनके भोजन और पति की रोज की मजदूरी छूटने जैसी व्यावहारिक समस्याएं भी परिवार के सामने थीं।
इन चिंताओं को समझते हुए पालकमंत्री डॉ. अशोक उईके ने 15 अगस्त को परिवार को भरोसा दिलाया कि प्रसव तक महिला के अस्पताल में रहने के दौरान उसके बच्चों के लिए पाटण स्थित आश्रमशाला में कमरे, भोजन और रहने की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही पति की छूटने वाली मजदूरी के संबंध में भी सहायता का आश्वासन दिया।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम रही सक्रिय
इस दौरान जिलाधिकारी वसुमना पंत, मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुलकित सिंह, जिला पुलिस अधीक्षक आयुष नोपानी, मनपा आयुक्त अकुनुरी नरेश, पाटण की वैद्यकीय अधिकारी डॉ. कविता महेश शर्मा, डॉ. छाया शेडमाके, स्टाफ नर्स सुषमा शिरभये, अनुसया येमले, पल्लवी फुलझेले, सुपरवाइजर यशोदा राठोड़ सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
दुर्गम आदिवासी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाकर हाई रिस्क गर्भवती महिला को समय रहते सुरक्षित स्थान पर लाना प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।










