Home Breaking News घुग्घुस ग्रामीण अस्पताल को 18 गांवों का बोझ मरीजो का हाल-बेहाल!

घुग्घुस ग्रामीण अस्पताल को 18 गांवों का बोझ मरीजो का हाल-बेहाल!

52

घुग्घुस ग्रामीण अस्पताल को 18 गांवों का बोझ मरीजो का हाल-बेहाल!



30 बेड का ग्रामीण अस्पताल बना ‘रेफरल सेंटर’! मरीजों की भीड़, नर्सों की कमी,


बेड और दवाइयों का टोटा; गंभीर मरीजों को चंद्रपुर भेजने की मजबूरी


घुग्घुस, प्रतिनिधि : घुग्घुस के 30 बेड के ग्रामीण अस्पताल पर अकेले 18 गांवों की स्वास्थ्य व्यवस्था का बोझ डाल दिया गया है। हजारों नागरिकों के इलाज की जिम्मेदारी संभाल रहे इस अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या के मुकाबले न तो पर्याप्त स्टाफ है, न बेड और न ही साफ सफाई से लेकर आवश्यक सुविधाएं भी नही। नतीजा यह है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को समय पर और पर्याप्त उपचार मिलना मुश्किल होता जा रहा है।

अस्पताल की इमारत बड़ी, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था छोटी पड़ रही है!

घुग्घुस सहित 18 गांवों के मरीज इलाज के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन अस्पताल की क्षमता और सुविधाएं उसी अनुपात में नहीं बढ़ाई गई हैं। भीड़ के कारण मरीजों को उपचार के लिए इंतजार करना पड़ता है और कई बार आवश्यक चिकित्सा सुविधा समय पर नहीं मिल पाती।

नर्सों की कमी से व्यवस्था चरमराई

अस्पताल में पर्याप्त संख्या में डाक्टर,नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध नहीं होने की शिकायत सामने आ रही है। मरीजों की संख्या अधिक और स्टाफ कम होने के कारण मौजूदा नर्सों पर काम का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

सवाल यह है कि 18 गांवों का इलाज करने वाले अस्पताल में पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ क्यों नहीं है? क्या मरीजों की संख्या बढ़ने का अंदाजा स्वास्थ्य विभाग को नहीं था?

भर्ती मरीजों के लिए कमरे और बेड भी कम!

अस्पताल में मरीजों को भर्ती करने के लिए उपलब्ध कमरे और बेड भी मरीजों की संख्या के सामने कम पड़ रहे हैं। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को भर्ती करने के दौरान जगह की समस्या सामने आने की बात कही जा रही है।

एक तरफ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने की बात करती है, दूसरी तरफ जमीन पर मरीजों को बेड और कमरे के लिए जूझना पड़ रहा है।

दवाइयां समय पर नहीं, तो इलाज कैसे?

मरीजों के लिए आवश्यक दवाइयां भी समय पर उपलब्ध नहीं होने की शिकायत है। जब मरीज अस्पताल तक पहुंचता है और उपचार के लिए जरूरी दवा ही उपलब्ध नहीं होती, तो सरकारी स्वास्थ्य सेवा की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

मरीज को बीमारी से लड़ना है या अस्पताल की व्यवस्था से?

ब्लड शुगर और अन्य जांच की मशीन तक पर्याप्त नहीं!

सबसे गंभीर सवाल बुनियादी जांच सुविधाओं को लेकर है। मरीजों की ब्लड शुगर जांच के लिए आवश्यक मशीन और सुविधा भी नियमित एवं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं होने की शिकायत सामने आ रही है।

जब सामान्य और रोजमर्रा की जांच के लिए ही मरीजों को परेशानी उठानी पड़े, तो गंभीर बीमारियों के मरीजों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

बड़ी बीमारी आई तो सीधा चंद्रपुर!

घुग्घुस के ग्रामीण अस्पताल में सीमित सुविधाओं के चलते गंभीर और बड़ी बीमारी के मरीजों को अक्सर चंद्रपुर जिला अस्पताल का रास्ता दिखाया जाता है।

यानी सवाल सीधा है—
18 गांवों के हजारों लोगों के लिए बनाया गया अस्पताल इलाज का भरोसा बनेगा या सिर्फ मरीजों को रेफर करने का केंद्र?

औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण घुग्घुस और आसपास के गांवों में दुर्घटनाओं, गंभीर बीमारियों और आपातकालीन परिस्थितियों का खतरा बना रहता है। ऐसे में मजबूत और पर्याप्त स्वास्थ्य व्यवस्था होना बेहद जरूरी है।

18 गांवों का बोझ, लेकिन सुविधाएं कितनी?

अगर एक ही अस्पताल पर 18 गांवों के मरीजों का बोझ है, तो उसी हिसाब से डॉक्टर, नर्स, बेड, कमरे, दवाइयां, जांच उपकरण और अन्य चिकित्सा सुविधाएं भी बढ़ाना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है।

सिर्फ अस्पताल की इमारत खड़ी कर देने से स्वास्थ्य सेवा मजबूत नहीं होती। अस्पताल में पर्याप्त कर्मचारी, उपकरण, दवाइयां और तत्काल उपचार की सुविधा होना जरूरी है।

अब जनता पूछ रही है—जिम्मेदारी किसकी?

घुग्घुस और आसपास के 18 गांवों की जनता जानना चाहती है कि मरीजों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त नर्सिंग स्टाफ कब नियुक्त किया जाएगा? भर्ती मरीजों के लिए पर्याप्त कमरे और बेड कब उपलब्ध होंगे? दवाइयों की नियमित आपूर्ति कब सुनिश्चित होगी? ब्लड शुगर सहित जरूरी जांच की सुविधाएं कब सुधरेंगी? और गंभीर मरीजों को हर बार चंद्रपुर भेजने की मजबूरी कब खत्म होगी?

जनता को सिर्फ अस्पताल की इमारत नहीं चाहिए, जनता को इलाज चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग को तत्काल स्थिति का जायजा लेकर अस्पताल में पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ, अतिरिक्त बेड व कमरे, नियमित दवा आपूर्ति, आवश्यक जांच उपकरण और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।

क्योंकि सवाल सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था का नहीं है—
यह 18 गांवों के हजारों लोगों की जिंदगी का सवाल है।

अस्पताल को रेफरल सेंटर नहीं, भरोसे का केंद्र बनाइए!

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here