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30 वर्ष से अधिक उम्र के पात्र विद्यार्थियों को भी ‘स्वयम्’ योजना की तर्ज पर मिलेगी आर्थिक सहायता

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30 वर्ष से अधिक उम्र के पात्र विद्यार्थियों को भी ‘स्वयम्’ योजना की तर्ज पर मिलेगी आर्थिक सहायता



चंद्रपुर, 20 अगस्त। आदिवासी विद्यार्थियों के शैक्षणिक हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने शासकीय छात्रावासों में प्रवेश को लेकर विद्यार्थियों की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया है। छात्रावास प्रवेश के लिए आंदोलन कर रहे युवक-युवतियों के साथ प्रशासन और आदिवासी विकास विभाग ने लगातार दो दिनों तक विस्तृत चर्चा की।

राज्य के आदिवासी विकास मंत्री तथा चंद्रपुर जिले के पालकमंत्री डॉ. अशोक उईके ने कहा कि ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के गरीब आदिवासी विद्यार्थियों की पढ़ाई केवल छात्रावास में प्रवेश नहीं मिलने के कारण बाधित नहीं होनी चाहिए। विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए शासन उनकी हरसंभव सहायता करेगा।

आदिवासी विकास विभाग की ओर से राज्य में कुल 490 शासकीय छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं। इनमें हर वर्ष करीब 58 से 60 हजार विद्यार्थी रहकर शिक्षा प्राप्त करते हैं। छात्रावास प्रवेश प्रक्रिया को लेकर शासन ने 14 अगस्त 2026 को शासन निर्णय जारी किया है। इसी निर्णय के तहत विद्यार्थियों के हित में आवश्यक सहयोग देने की भूमिका विभाग ने अपनाई है।

30 वर्ष से अधिक उम्र के विद्यार्थियों को राहत

छात्रावास प्रवेश के लिए अधिकतम आयु सीमा 30 वर्ष किए जाने की मांग पर भी शासन ने सकारात्मक विचार किया है। इस वर्ष नए शासन निर्णय के कारण 30 वर्ष की आयु पूरी कर चुके विद्यार्थियों का शैक्षणिक नुकसान न हो और कोई भी विद्यार्थी शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए ऐसे विद्यार्थियों को ‘स्वयम्’ योजना की तर्ज पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में आदिवासी विकास विभाग सहयोग करेगा।

यह सुविधा केवल पारंपरिक पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगी। पीएच.डी., एम.फिल., पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग, मेडिकल तथा अन्य उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत 30 वर्ष से अधिक आयु के विद्यार्थियों को यदि शासकीय छात्रावास में प्रवेश नहीं मिल पाता है, तो उन्हें ‘स्वयम्’ योजना के तहत लाभ देने की भूमिका शासन ने अपनाई है।

आंदोलन समाप्त करने की अपील

विद्यार्थियों द्वारा उठाए गए मुद्दों को लेकर शासन संवेदनशील है। आंदोलन की पृष्ठभूमि में संवाद के माध्यम से सकारात्मक समाधान निकालने पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासन ने विद्यार्थियों से आंदोलन वापस लेने की अपील की है।

पालकमंत्री डॉ. अशोक उईके ने कहा कि आर्थिक परिस्थितियां अथवा छात्रावास की अनुपलब्धता आदिवासी विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा की राह में बाधा नहीं बननी चाहिए। शासन विद्यार्थियों को विश्वास में लेकर उनके शैक्षणिक भविष्य के लिए सकारात्मक और न्यायसंगत समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है।

डॉ. अशोक उईके, आदिवासी विकास मंत्री तथा पालकमंत्री, चंद्रपुर ने कहा:
“ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के गरीब आदिवासी विद्यार्थियों की शिक्षा रुकनी नहीं चाहिए। विद्यार्थियों को विश्वास में लेकर उनके शैक्षणिक भविष्य की दृष्टि से सकारात्मक और न्यायपूर्ण रास्ता निकालना शासन की भूमिका है।”

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