Home Breaking News ओबीसी जनगणना में अलग कॉलम की मांग

ओबीसी जनगणना में अलग कॉलम की मांग

30

ओबीसी जनगणना में अलग कॉलम की मांग



1 नवंबर को ‘चलो दिल्ली’ आंदोलन का ऐलान


2 अक्टूबर से सत्याग्रह और 25 अक्टूबर को जिलास्तरीय मोर्चे की घोषणा; विजय वडेट्टीवार ने दी जानकारी

नागपुर, 19 सितंबर 2026। जातिवार जनगणना में ओबीसी समाज के लिए स्वतंत्र कॉलम रखने की मांग को लेकर देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की गई है। शनिवार को नागपुर में आयोजित विदर्भ स्तरीय ओबीसी नेताओं, पदाधिकारियों और प्रमुख कार्यकर्ताओं की बैठक में 1 नवंबर को ‘चलो दिल्ली’ का नारा देते हुए आंदोलन करने का निर्णय लिया गया।

बैठक के बाद ओबीसी नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि जातिवार जनगणना में ओबीसी के लिए अलग कॉलम होना चाहिए। उनका कहना है कि ओबीसी की वास्तविक जनसंख्या सामने नहीं आने पर प्रतिनिधित्व और आरक्षण से जुड़े सवाल और गंभीर हो सकते हैं।

वडेट्टीवार ने बताया कि 13 सितंबर को दिल्ली में देशभर की करीब 65 ओबीसी संगठनों की बैठक हुई थी। इसी बैठक में लिए गए निर्णयों के आधार पर आंदोलन की तैयारी शुरू की गई है।

2 अक्टूबर से सत्याग्रह, 25 अक्टूबर को जिलास्तरीय आंदोलन

घोषित कार्यक्रम के अनुसार 2 अक्टूबर, गांधी जयंती और लालबहादुर शास्त्री जयंती के अवसर पर तालुका स्तर पर सत्याग्रह किया जाएगा। इसके बाद 25 अक्टूबर को जिलास्तरीय आंदोलन और मोर्चे आयोजित किए जाएंगे। वहीं 1 नवंबर को देशव्यापी ‘चलो दिल्ली’ आंदोलन किया जाएगा।

वडेट्टीवार के अनुसार, दिल्ली में होने वाले आंदोलन का अंतिम स्वरूप देशभर के संगठनों की संयुक्त बैठक में तय किया जाएगा।

ओबीसी विद्यार्थियों के मुद्दे भी उठाए

वडेट्टीवार ने ओबीसी विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार से निर्णय लेने की मांग की। उन्होंने महाज्योती और बार्टी जैसी संस्थाओं को जनसंख्या के अनुपात में निधि, मैट्रिकपूर्व और मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति सहित अन्य विषयों पर सरकार पर समय टालने का आरोप लगाया। उन्होंने ओबीसी समाज से जुड़े अधिकारों के मुद्दों पर ठोस निर्णय लेने की मांग की।

मराठा आरक्षण पर भी रखी भूमिका

मराठा आरक्षण के मुद्दे पर वडेट्टीवार ने कहा कि किसी भी समाज के हिस्से का आरक्षण दूसरे समाज को नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन्हें आरक्षण देना है, उन्हें अलग से आरक्षण दिया जाए, लेकिन ओबीसी के हिस्से के आरक्षण में कटौती नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ओबीसी के अधिकारों पर असर पड़ा तो आंदोलन किया जाएगा।

मराठवाड़ा के सूखे पर सरकार से तत्काल मदद की मांग

बैठक के दौरान वडेट्टीवार ने मराठवाड़ा की सूखे की स्थिति का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से केंद्र की मदद का इंतजार किए बिना राज्य की तिजोरी से प्रभावित किसानों को तत्काल सहायता देने की मांग की।

उन्होंने सूखाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करने वाले पालकमंत्रियों से किसानों की स्थिति को संवेदनशीलता से समझने और दौरे के बाद ठोस निर्णय लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि ठोस निर्णय नहीं हुआ तो सरकार से जवाब मांगा जाएगा।

नांदेड की बैठक के दौरान अधिकारियों द्वारा काजू-बादाम दिए जाने की चर्चा पर भी उन्होंने टिप्पणी की। वडेट्टीवार ने कहा कि ऐसे मामलों के बजाय सूखे की स्थिति पर ठोस निर्णय और किसानों के लिए सहायता आवश्यक है।

मनोज जरांगे पाटील के आंदोलन पर भी बयान

मनोज जरांगे पाटील के आंदोलन को लेकर वडेट्टीवार ने कहा कि सरकार ने इससे पहले आंदोलनों के दौरान आश्वासन और दस्तावेजों के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया है। जरांगे पाटील की मांगों पर सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों का अध्ययन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यदि इन मांगों के कारण ओबीसी समाज के अधिकार प्रभावित होते हैं तो वे इसका विरोध करेंगे। वडेट्टीवार ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर न्यायालयीन लड़ाई भी शुरू हो चुकी है।

जरांगे समर्थकों की ओर से होने वाली आलोचना पर उन्होंने संयम बरतने की बात कही और कहा कि गाली देना उनकी संस्कृति और संस्कार नहीं है।

बैठक में उमेश कोर्राम, सदानंद इलमे, बबलू कटरे, खेमेंद्र कटरे, कैलास भेलावे, विलास काळे, मोहन हरडे, अनिल डहाके, सतीश मालेकर, आनंदराव अंगलवार, रतन शिलावार, संजय कन्नावार, राजू कुकडे, निमकर, पप्पु यादव, उमाकांत धांडे, बालकृष्ण सारवे, मोंटू पिल्लारे, लोकमान्य बरडे, राजेश काकडे, अवंतिका लेकुरवाळे, वंदना वनकर, अंजली साळवे, सुषमा भड, कांचन गुधडे, साधना बोरकर, मीरा मदनकर, रमेश पिसे, राजू चौधरी, देवेंद्र समर्थ, अशोक काकडे, पीयूष आकरे और कृतल आकरे सहित विदर्भ के 11 जिलों से ओबीसी, विमुक्त जाति और भटक्या जमाती के नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here