आखिर खुला माणिकगढ़ माइंस का अनधिकृत गेट
महसूल प्रशासन का चला डंडा; सार्वजनिक सड़क पर कंपनी के अतिक्रमण को हटाने का आदेश
नितेश केराम
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राजुरा। बहुचर्चित माणिकगढ़ सीमेंट, अल्ट्राटेक कंपनी की कथित मनमानी के चलते आसपास के 8 से 10 गांवों के नागरिक लंबे समय से परेशान थे। सार्वजनिक सड़क पर कंपनी द्वारा लगाए गए लोहे के गेट को लेकर वर्ष 2019 में अबिद अली ने राजुरा तहसीलदार के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए प्रकरण प्रस्तुत किया था।
शिकायत के बाद राजस्व प्रशासन ने मामले की गहन जांच करते हुए पंचनामा किया। इसके आधार पर तत्कालीन तहसीलदार ने 7 जुलाई 2020 को आदेश पारित कर संबंधित कार्रवाई के निर्देश दिए थे। हालांकि, कंपनी ने इस आदेश के खिलाफ उपविभागीय अधिकारी, राजुरा के समक्ष अपील दायर की।
वर्ष 2022 में उपविभागीय अधिकारी ने अपील पर निर्णय देते हुए तहसीलदार के आदेश को कायम रखा। इसके बाद कंपनी की ओर से अपर जिलाधिकारी श्रीकांत देशपांडे के समक्ष अपील की गई। करीब चार वर्षों तक स्थगन आदेश के चलते यह मामला लंबित रहा।
इसके बाद अपर जिलाधिकारी ने मामले में आदेश पारित करते हुए उपविभागीय अधिकारी, राजुरा को मौके पर जाकर जांच एवं पाहणी करने तथा नए सिरे से आदेश पारित करने के निर्देश दिए।
इसी के तहत उपविभागीय अधिकारी श्री बालाजी कदम ने 23 जून 2026 को नया आदेश जारी किया। आदेश में तत्कालीन तहसीलदार होली द्वारा 7 जुलाई 2020 को पारित आदेश को कायम रखते हुए सार्वजनिक सड़क पर कंपनी द्वारा किए गए कथित अनधिकृत अतिक्रमण और लोहे के गेट को हटाने के निर्देश दिए गए।
60 दिन की अपील अवधि, आंदोलन की चेतावनी
प्रशासन के आदेश के बाद माणिकगढ़ माइंस का अनधिकृत गेट आखिरकार खोल दिया गया। इस कार्रवाई को लेकर क्षेत्र के नागरिकों में संतोष व्यक्त किया जा रहा है। शिकायतकर्ता अबिद अली ने प्रशासन के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो तीव्र आंदोलन किया जाएगा।
लगभग सात वर्षों से चल रहे इस मामले में राजस्व प्रशासन के आदेश के बाद अब सार्वजनिक मार्ग को लेकर जारी विवाद में नया मोड़ आया है। क्षेत्र के ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन द्वारा आदेश की आगे की अमलबजावणी पर बनी हुई है।










