पेलोडर मशीनों के ज़रिए खुली लूट और कोयला हेराफेरी का खेल!
घुग्घुस : वेकोलि भालर वणी नार्थ की घोन्सा,भांडेवाडा कोयला खदानों में एक बार फिर से भ्रष्टाचार की हदें पार हो गई हैं। पेलोडर मशीनों के ज़रिए कोयले की लूट खुलेआम चल रही है,और हर ट्रक पर 200 रुपये से लेकर 50 रुपये तक की बेहिचक वसूली की जा रही है। पेलोडर मशीन वणी के राजकीय पक्ष से जुड़े किसी व्यक्ति का होने के कारण यह सब कोयले कि हेराफेरी बिना किसी डर या रोक-टोक के हो रहा है। कोयला खदान में कंपनी कि पेलोडर मशीन लगाकर कोयला हेराफेरी को रोका जा सकता है।परंतु कंपनी प्रबंधन खुद इस बात को उचित ही समझते हैं।
लेकिन यह पर सिर्फ वसूली तक सीमित नहीं है। इस पूरे गोरखधंधे में कोयले की बडी हेराफेरी भी शामिल है।नीजी पेलोडर मशीनें मनमर्जी से कोल स्टॉक से कोयला निकालकर कागज़ों में कम दाम दिखाती हैं, जबकि असल में महंगे रेट का कोयला (स्टीम कोयला)उठा लिया जाता है। इस खेल से वेकोलि प्रबंधन को अरबों का नुकसान हो रहा है।
और सबसे गंभीर पहलू यह है कि इस पूरे धांधले में क्षेत्रीय प्रबंधक, उप-क्षेत्रीय प्रबंधक और व्यवस्थापक की गहरी मिलीभगत है।डीओ में क्षेत्रीय,उप-क्षेत्रीय प्रबंधक, व्यवस्थापक को 25% कमीशन बैठे बिठाई साइनिंग अमाउंट के नाम पर लक्ष्मी दर्शन होता है।बिना इन अधिकारियों की सहमति के यह सब संभव नहीं है।डीओ धारक द्वारा कोयला खदान में क्षेत्रीय उप-क्षेत्रीय प्रबंधक को 25% साइनिंग अमाउंट नही देने पर उसका कोल डिसपॅच को रोक दिया जाता है। खदान में अधिकारीयों कि जबरन वसूली भी बढ़-चढ़कर फरीयाद करने के लिए खडे रहेते है।
स्थानीय नागरिकों ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस और CBI जाँच की मांग तेज़ कर दी है। उनकी आवाज़ साफ है: इस कोयला चोरी और भ्रष्टाचार में लिप्त हर एक जिम्मेदार व्यक्ति पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या वेकोलि प्रबंधन और जांच एजेंसियां इस भ्रष्टाचार के खिलाफ ठोस कदम उठाएंगी, या फिर यह मामला भी सिर्फ कागज़ों में दबकर रह जाएगा?
वेकोलि कोयला खदान में भ्रष्टाचार का हैरान करने वाला खुलासा:
नीजी पेलोडर मशीन बनी लूट की अड्डा!
वेकोलि वणी नार्थ के भालर क्षेत्रीय प्रबंधक की कोयला खदानों में एक बार फिर भ्रष्टाचार की परतें खुलने लगी हैं। यहाँ नीजी पेलोडर मशीनों के ज़रिए कोयला लोडिंग के नाम पर बेखौफ अवैध वसूली जारी है। प्रति ट्रक 200 रुपये तक की वसूली तो कहीं-कहीं 50 रुपये तक की भी वसूली की जा रही है, और यह सब खुलेआम हो रहा है। पेलोडर मशीन के दस्तावेज में भी गड़बड़ी,अनियमित्ता मामला सामने आ रहा, पोलीस और आरटीओ अधिकारी से जांच के लिए मांग उठ रही।
लेकिन अवैध वसूली की इस गोरखधंधे के साथ-साथ कोयले की हेराफेरी भी सामने आ रही है।नीजी पेलोडर मशीनें अपने मनमर्जी से कोल स्टॉक में जाकर बडा कोयला निकाल रही हैं, कंपनी के कागज़ों में कम दाम दिखाकर असल में महंगे रेट का कोयला उठाया जा रहा है। इससे वेकोलि प्रबंधन को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
सबसे गंभीर बात यह है कि इस पूरे खेल में क्षेत्रीय प्रबंधक, उप-क्षेत्रीय प्रबंधक और व्यवस्थापक की मिलीभगत भी साफ तौर पर सामने आ रही है। यह सब बिना उनके संरक्षण के संभव नहीं हो सकता।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस गंभीर मुद्दे पर विजिलेंस और CBI जाँच की मांग की है। नागरिकों की आवाज़ साफ है—इस कोयला चोरी और भ्रष्टाचार में लिप्त सभी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
अब सवाल यह है कि क्या वेकोलि प्रबंधन और जांच एजेंसियां इस गंभीर मुद्दे पर सख़्त कदम उठाएंगी, या फिर यह मामला भी दबकर रह जाएगा?