चंद्रपुर
चंद्रपुर में बांस कारीगरों और कामगारों को सशक्त बनाने के लिए विधायक किशोर जोरगेवार ने विधानसभा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि चंद्रपुर में एमआईडीसी की तर्ज पर वन विभाग की उपलब्ध भूमि पर बीआईडीसी (बांस इंडस्ट्री डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) की स्थापना की जाए, ताकि बांस उद्योग को संगठित और आधुनिक स्वरूप दिया जा सके।
चंद्रपुर बने ‘बांस इंडस्ट्री हब’
विधायक ने अपने भाषण में स्पष्ट कहा कि यदि बांस कारीगरों को उद्योग स्थापित करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा, अत्याधुनिक तकनीक, आसान ऋण सुविधा, बाजार से सीधा संपर्क और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, तो चंद्रपुर केवल उत्पादन केंद्र ही नहीं, बल्कि एक सक्षम ‘बांस इंडस्ट्री हब’ के रूप में उभर सकता है।
उन्होंने बांस को “सोने की छड़ी” बताते हुए कहा कि बांस आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने से स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा, पारंपरिक कौशल को नया मंच मिलेगा और जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। यह पहल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक आदर्श और अभिनव प्रयोग साबित हो सकती है।
बांस कारीगरों को मिले ‘कलावंत’ का दर्जा
विधायक जोरगेवार ने यह भी मांग की कि बांस कारीगरों को ‘कलावंत’ (कलाकार) के रूप में मान्यता दी जाए। समाज कल्याण विभाग की तर्ज पर उनके लिए भी मानधन योजना शुरू की जाए। विशेष रूप से वृद्ध बांस कारीगरों को मासिक मानधन देने की योजना लागू करने पर सरकार विचार करे — यह सवाल भी उन्होंने सदन में उठाया।
पर्यावरण और स्वरोजगार दोनों को बल
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी बांस से निर्मित सजावटी और उपयोगी वस्तुओं को प्राथमिकता देना समय की आवश्यकता है।
साथ ही, वन विभाग के पास उपलब्ध अतिरिक्त भूमि को बांस की खेती के लिए बुरुड समाज के कारीगरों को उपलब्ध कराने का सकारात्मक निर्णय लिया जाए, ताकि कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
वनमंत्री का सकारात्मक आश्वासन
इस पूरे मुद्दे पर वनमंत्री गणेश नाईक ने सदन में सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, जिससे बांस उद्योग से जुड़े कारीगरों और युवाओं में उम्मीद जगी है।
अब नजर सरकार के ठोस निर्णय पर है।
यदि बीआईडीसी की स्थापना होती है, तो चंद्रपुर बांस उद्योग के क्षेत्र में एक नई पहचान बना सकता है और हजारों हाथों को रोजगार का संबल मिल सकता है।