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डेढ़ साल में 43 मजदूरों की मौत… क्या मुआवज़े की रकम से जान वापस आएगी?

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डेढ़ साल में 43 मजदूरों की मौत… क्या मुआवज़े की रकम से जान वापस आएगी?



नागपुर की विस्फोटक फैक्ट्री हादसे पर विधानसभा में विधायक विजय वडेट्टीवार सरकार से तीखे सवाल


नागपुर | विशेष रिपोर्ट
नागपुर स्थित विस्फोटक निर्माण कंपनी SBL Energy Limited में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में 20 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 19 महिलाएं शामिल हैं। इस घटना को लेकर विधानसभा में सरकार से कड़े सवाल पूछे गए और जवाबदेही तय करने की मांग की गई।

नागपुर में 11 विस्फोटक कारखाने, लेकिन नियंत्रण किसका?

जानकारी के अनुसार नागपुर जिले में ऐसे 11 विस्फोटक कारखाने संचालित हैं। आरोप है कि इन इकाइयों पर प्रभावी निगरानी और सुरक्षा नियंत्रण का अभाव है। बीते डेढ़ वर्ष में हुए विभिन्न हादसों में कुल 43 मजदूर अपनी जान गंवा चुके हैं।

एक ओर “ट्रिलियन डॉलर इकॉनॉमी” के सपने दिखाए जा रहे हैं, विदेश दौरों और निवेश सम्मेलनों की तस्वीरें सामने आती हैं, वहीं दूसरी ओर 300 रुपये की दिहाड़ी पर काम करने वाले मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं। यह स्थिति सरकार के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय है।
19 महिलाओं की मौत — उजड़ गए परिवार
SBL फैक्ट्री हादसे में जान गंवाने वालों में अधिकांश महिलाएं थीं। उनके जाने के बाद परिवारों पर आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। छोटे-छोटे बच्चे और परिजन असुरक्षा के साए में हैं।
सरकार द्वारा घोषित मुआवज़े पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि —
“क्या नकद राशि से किसी की जान वापस आ सकती है?”
पीड़ित परिवारों को केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सुरक्षा और न्याय की आवश्यकता है।

सेफ्टी ऑडिट की मांग अनसुनी?
बताया गया कि केंद्र और राज्य सरकार से बार-बार इन फैक्ट्रियों का अनिवार्य “सेफ्टी ऑडिट” कराने की मांग की गई, लेकिन उस पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि लापरवाही साबित होती है, तो क्या संबंधित विभाग और निरीक्षण तंत्र भी जिम्मेदार नहीं हैं?
कारखाना निरीक्षक और श्रम विभाग की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए गए हैं।
“मौत के बाद मुआवज़ा नहीं, पहले सुरक्षा चाहिए”
विधानसभा में चंद्रपुर जिले के ब्रम्हापुरी विधायक विजय वडेट्टीवार ने स्पष्ट कहा गया कि नागरिकों को मृत्यु के बाद मुआवज़ा नहीं, बल्कि जीवित रहते हुए सुरक्षित कार्यस्थल चाहिए।
सरकार केवल बयान जारी कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकती। दोषियों पर कठोर कार्रवाई, जवाबदेही तय करना और भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त सुरक्षा मानक लागू करना अनिवार्य है।
अब पूरा महाराष्ट्र यह देख रहा है कि सरकार इस त्रासदी को केवल आंकड़ों तक सीमित रखती है, या फिर जिम्मेदारों पर कार्रवाई कर मजदूरों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।

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