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“घुग्घुस में जहरीली हवा का कहर: 2,500 मासूमों की सांसों पर कोयला माफिया का कब्जा!

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“घुग्घुस में जहरीली हवा का कहर: 2,500 मासूमों की सांसों पर कोयला माफिया का कब्जा!



स्कूल के पास कोयला डंपिंग यार्ड से उड़ती ज़हरीली धूल—तीन साल से कार्रवाई नहीं, प्रशासन पर सवाल


चंद्रपुर |घुग्घुस 29 अप्रैल 2026
घुग्घुस में बच्चों की ज़िंदगी से खेला जा रहा है—और जिम्मेदार सिस्टम मूकदर्शक बना हुआ है।
माउंट कार्मेल स्कूल के करीब स्थित कोयला डंपिंग यार्ड अब 2,500 मासूम बच्चों के लिए “मौत का मैदान” बन चुका है। यहां से उड़ने वाली जहरीली कोयले की धूल बच्चों के फेफड़ों में घुसकर उनकी सांसों को जकड़ रही है।

तीन साल से सिर्फ नोटिस, कार्रवाई शून्य

2024 में नोटिस जारी होने के बावजूद महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अब तक सिर्फ कागजों में कार्रवाई करता रहा। ज़मीनी हकीकत यह है कि धूल आज भी उड़ रही है, बच्चे आज भी बीमार हो रहे हैं—लेकिन सिस्टम की नींद नहीं टूट रही।

 बैठक में खुली अफसरशाही की पोल

हाल ही में हुई एक अहम बैठक में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी यादव का गैर-जिम्मेदार रवैया सामने आया।
जब जिला प्रशासन ने तुरंत निरीक्षण का आदेश दिया, तो जवाब मिला—“अगले सप्ताह देखेंगे।”सिर्फ 15 मिनट की दूरी तय करने में “एक हफ्ता” मांगने वाले इस जवाब ने पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता उजागर कर दी।

 सांसद और कलेक्टर का फूटा गुस्सा

मामले की गंभीरता को देखते हुए सांसद Pratibha Dhanorkar और जिला कलेक्टर ने अधिकारी पर कड़ी नाराजगी जताई।कलेक्टर ने तुरंत आदेश दिया:
अगले ही दिन साइट विजिटविस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश बड़ा सवाल: क्या कोयला माफिया को संरक्षण?
तीन साल की निष्क्रियता अब कई सवाल खड़े कर रही है—क्या प्रशासन जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है?

क्या कोयला डंपिंग यार्ड को राजनीतिक या

प्रशासनिक संरक्षण मिल रहा है?आखिर बच्चों की जिंदगी से बड़ा क्या है?
आज घुग्घुस का शैक्षणिक माहौल डर और बीमारी की गिरफ्त में है, और जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ “फ
सांसद की चेतावनी: अब होगा जन आंदोलन
सांसद Pratibha Dhanorkar ने साफ शब्दों में चेतावनी दी—“अगर तुरंत ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो बड़ा जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
2,500 बच्चों की जान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रशासन ने अब भी लापरवाही दिखाई, तो इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पूरी तरह जिम्मेदार होगा।
घुग्घुस में हालात गंभीर हैं।
यह सिर्फ प्रदूषण का मुद्दा नहीं—यह आने वाली पीढ़ी के भविष्य की लड़ाई है।
अब देखना होगा—क्या प्रशासन जागेगा?
या फिर 2,500 बच्चों की सांसें यूं ही कोयले की धूल में घुटती रहेंगी…?

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